Rajesh rajak

Rajesh rajak Lives in Jabalpur, Madhya Pradesh, India

A Police Man

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"मां स्वप्न में भी दुआ देते दिखाई देती है, श्वेताम्बर उलझे से बाल, झुर्रियों वाले गाल, कितना अनुभव,कैसे गुजारे नब्बे साल, बिन चश्मे के सुई में धागा डाल लेती है, आज भी उठती है बड़े सकारे, घूम कर देखती है हर चीजों को बिना सहारे, जब भी मां गुस्से में होती है, उस दिन बो देर तक सोती है, पूरा घर उसके गुस्से से कांप जाता है, फिर मै जाता हूं पास उसके पूछता हूं, क्या हुआ होगा मेरा मन भांप जाता है, कुछ देर गुस्सा दिखाएगी, सबकी शिकायत बारी बारी से मुझे बताएगी, आज भी जब मैं तक ड्यूटी से घर नहीं आ जाता, मां ताकती रहती है मेरी राह,चैन नहीं आता, मेरी मां मेरा कितना रखती है ख्याल, ईश्वर से यही है प्रार्थना,मेरी मां जिए हजारों साल,"

मां स्वप्न में भी दुआ देते दिखाई देती है,
श्वेताम्बर उलझे से बाल, झुर्रियों वाले गाल,
कितना अनुभव,कैसे गुजारे नब्बे साल,
बिन चश्मे के सुई में धागा डाल लेती है,
आज भी उठती है बड़े सकारे,
घूम कर देखती है हर चीजों को बिना सहारे,
जब भी मां गुस्से में होती है,
उस दिन बो देर तक सोती है,
पूरा घर उसके गुस्से से कांप जाता है,
फिर मै जाता हूं पास उसके पूछता हूं,
क्या हुआ होगा मेरा मन भांप जाता है,
कुछ देर गुस्सा दिखाएगी,
सबकी शिकायत बारी बारी से मुझे बताएगी,
आज भी जब मैं तक ड्यूटी से घर नहीं आ जाता,
मां ताकती रहती है मेरी राह,चैन नहीं आता,
मेरी मां मेरा कितना रखती है ख्याल,
ईश्वर से यही है प्रार्थना,मेरी मां जिए हजारों साल,

मेरी मां जिए हजारों साल,

122 Love

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"शहर की इन उजली रातों में बहुत गुनाह होते हैं, जागते हैं दरिंदे,शिकार की तलाश में, आ गए जो जद में उनकी, वो तवाह होते हैं, मजबूरियां फसा देती हैं,उनके जाल में, और जमाना सोचता है कि हम लापरवाह होते हैं,"

शहर की इन उजली रातों में बहुत गुनाह होते हैं,
जागते हैं दरिंदे,शिकार की तलाश में,
आ गए जो जद में उनकी, वो तवाह होते हैं,
मजबूरियां फसा देती हैं,उनके जाल में,
और जमाना सोचता है कि हम लापरवाह होते हैं,

#StreetNight

120 Love

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"शूट बूट जापानी था, चश्मा काला,कमर बन्द निराला, टोपी खाकी,बटुआ ईरानी था, तूफानी दौरे किए विदेशी, फिर भी दिल उनका हिन्दुस्तानी था, बेशर्म तरीके राज काज के,सूखे से जनता तड़प रही थी हुआ अचंभा,नेता जी की आंखो में पानी था,"

शूट बूट जापानी था,
चश्मा काला,कमर बन्द निराला,
टोपी खाकी,बटुआ ईरानी था,
तूफानी दौरे किए विदेशी,
फिर भी दिल उनका हिन्दुस्तानी था,
बेशर्म तरीके राज काज के,सूखे से जनता तड़प रही थी
हुआ अचंभा,नेता जी की आंखो में पानी था,

#waterfall&Stars

117 Love

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"न जाने क्यों बो सितारों को देखकर सहम जाती है, दुबक जाती है,बिस्तर में जाकर, बस सिसकियों की आवाज आती है, भींच लेती है मुट्ठियां,नोच लेती है अपने ही केशों को, दहकने लगती हैं, आंखें अंगार की तरह, न जाने क्यों उसे सितारों से सजी रात नहीं भाती है, सोचने लग जाती है,उस भयानक रात के बारे में, चांद सितारों से भरा आसमां था,खो जाती है उसी नजारे में, संगमरमरी वादियों में सखियों संग घूम रही थी, देख कर आसमां को झूम रही थी, अचानक,,अचानक इक चीख निकल जाती है, कोई भेड़िया झाड़ियों में छुपा बैठा था, इक पल में,सपने तार तार,उजड़ गया संसार, हो गया चांद भी दागदार,तब से उसे ये रात नहीं भाती है,"

न जाने क्यों बो सितारों को देखकर सहम जाती है,
दुबक जाती है,बिस्तर में जाकर,
बस सिसकियों की आवाज आती है,
भींच लेती है मुट्ठियां,नोच लेती है अपने ही केशों को,
दहकने लगती हैं, आंखें अंगार की तरह,
न जाने क्यों उसे सितारों से सजी रात नहीं भाती है,
सोचने लग जाती है,उस भयानक रात के बारे में,
चांद सितारों से भरा आसमां था,खो जाती है उसी नजारे में,
संगमरमरी वादियों में सखियों संग घूम रही थी,
देख कर आसमां को झूम रही थी,
अचानक,,अचानक इक चीख निकल जाती है,
कोई भेड़िया झाड़ियों में छुपा बैठा था,
इक पल में,सपने तार तार,उजड़ गया संसार,
हो गया चांद भी दागदार,तब से उसे ये रात नहीं भाती है,

#Stars&Me

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"जिनके हृदय में उपजती थी प्रेम की फसलें, समय के थपेड़ों ने पाषाण पैदा कर दिए, बहुत दुख हुआ,जब उसी हृदय को बंजर देखा, शब्द जिनके गंगा की तरह होते थे, उन्ही शब्दों में खौलता,खारा समन्दर देखा, आज हमने बहुत ही हौलनाक मंजर देखा, जो बेचा करते थे कभी गुलाब, उन मासूम से हांथों में खंजर देखा,"

जिनके हृदय में उपजती थी प्रेम की फसलें,
समय के थपेड़ों ने पाषाण पैदा कर दिए,
बहुत दुख हुआ,जब उसी हृदय को बंजर देखा,
शब्द जिनके गंगा की तरह होते थे,
उन्ही शब्दों में खौलता,खारा समन्दर देखा,
आज हमने बहुत ही हौलनाक मंजर देखा,
जो बेचा करते थे कभी गुलाब,
उन मासूम से हांथों में खंजर देखा,

#InspireThroughWriting

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