Ram Pujari

Ram Pujari Lives in New Delhi, Delhi, India

want to start NGO, Author of Love Jihaad, Adhura Insaaf. and also an Engineer

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After Love Marrige

जिंदगी कैसे कैसे रंग दिखाती है।
read full poem in text

आज मैं सोचता हूँ,
आखिर प्रेम क्या है!

(प्रेम विवाह के बाद)

माँ से दूरी,
भाई की मजबूरी,
बहन की निराशा,
भाभी की बुझती आशा,
पिता की झुकी नजरें,
पड़ोसियों के फिकरे,
भतीजी की टूटी गुड़िया,
भतीजे की डरती साईकल,
होली की बाजारी गुजिया,
दीवाली की सौदाई लड़ियाँ,
(दूरी इतनी हुई कि भाई आर्डर देने से भी डरने लगा)
भाई का डरता-सा आर्डर,
माँ की सहमी-सी ख्वाहिश, (शायद वो मना कर दे)
बहन की भीगी राखी,
'न जाओ' भाभी की ये दुखी विनती,
बीबी के घर-अलग होने की गिनती,
बीवी बनी प्रेमिका का दरबार,
और ममता के हक़ की अदालत,
अलग घर में उड़ने की चाहत,
छोड़कर जाने से माँ है आहत,
पति बनने की कीमत मैंने,
सारे रिश्ते तोड़कर चुकाई,
सोचता हूँ आखिर प्रेम क्या है,
ये क्या सीनाजोरी है,
दिलों में जगह थोड़ी है,
अपनी अपनी पड़ी है,
प्रेम की क्या ये भी एक कड़ी है,
प्रेम तोड़ता नहीं जोड़ता है,
पर प्रेम में हम टूट गए,
अपने मेरे पीछे छूट गए,
नकली रिश्तेदारों से पार्टियां ही जचती है,
माँ की महफ़िल में अपनों की कमी खलती है।

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नजरें  मिलीं,  फिर  नजरें  झुकी।
नज़रें फिर से उठी, फिर से झुकी।
एक इकरार हुआ, कुछ बात बनी।
प्रेम कहानी शुरू हुई, 
जमाने को खबर हुई।
सपने, वादे ओ रूठना-मनाना,
छेड़, तकरार, कशमकश, यादें।
दिल तड़पे, आंखें जागी, सांसे उखड़ी,
हाथ जुड़े, सर झुका और 'उसे' याद किया।

 

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Dear
Ruskin Bond sir
Very Happy Birthday to you

#RuskinBond #author #Happy Birthday

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बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे
बोल ज़बाँ अब तक तेरी है

तेरा सुत्वाँ जिस्म है तेरा
बोल कि जाँ अब तक तेरी है

देख कि आहन-गर की दुकाँ में
तुंद हैं शोले सुर्ख़ है आहन
खुलने लगे क़ुफ़्लों के दहाने
फैला हर इक ज़ंजीर का दामन

बोल ये थोड़ा वक़्त बहुत है
जिस्म ओ ज़बाँ की मौत से पहले

बोल कि सच ज़िंदा है अब तक
बोल जो कुछ कहना है कह ले

सुतवाँ जिस्म- कसा हुआ शरीर, आहन-गर- लौहकार, सुर्ख़- लाल, आहन- लोहा, क़ुफ़्लों- बंद

#faiz #Freedom #RamPujari

बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे
बोल ज़बाँ अब तक तेरी है

तेरा सुत्वाँ जिस्म है तेरा
बोल कि जाँ अब तक तेरी है

देख कि आहन-गर की दुकाँ में
तुंद हैं शोले सुर्ख़ है आहन
खुलने लगे क़ुफ़्लों के दहाने
फैला हर इक ज़ंजीर का दामन

बोल ये थोड़ा वक़्त बहुत है
जिस्म ओ ज़बाँ की मौत से पहले

बोल कि सच ज़िंदा है अब तक
बोल जो कुछ कहना है कह ले

सुतवाँ जिस्म- कसा हुआ शरीर, आहन-गर- लौहकार, सुर्ख़- लाल, आहन- लोहा, क़ुफ़्लों- बंद

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बस
 एक ही
 बात
माँ तुझे सलाम

#Mother #maa #Mata #goddess

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