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aditisinha6215
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Aditi Sinha

सफर में हूँ

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Aditi Sinha

क्या चाहती हैं, तीस के उम्र की पार की महिलाएं? 
एकाकीपन! 
अकेलापन! 
या.. 
ठहराव! 
अंतर ये है की, तीस के उम्र के पार और चालीस के उम्र के पहले ज़िंदगी के किस पडाव पर हैं ये महिलाएं? 
किसी की ख्वाहिश दौड़ती भागती जिंदगी से अपनों के लिए वक़्त चुराना है;
किसी की चाहत रुकी, थकी , बेज़ार सी ज़िंदगी को धक्का देकर आगे बढ़ाने की है;
किसी को अपनों की भीड़ में 'एकाकी' की चाहत है, 
कुछ एक अकेलेपन से इतना ऊब चुकी हैं की अब उन्हें एक साथी की चाहत है;
किसी को दौड़ कर मंज़िल तक पहुंचना है, 
किसी को रुक जाना है अब बस! 
चाहतें कहाँ खत्म होती हैं, तीस के उम्र के पार की महिलाओं की, 
उनकी तो बस उम्र खर्च हो जाती है, चाहतों की ख्वाहिशों को पूरा करते करते!

©Aditi Sinha
  #Chaahat
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Aditi Sinha

वो आधी जवानी पार कर, 
सूती साड़ी पहने ;
तर्जनी से अपनी बिंदी ठीक करते हुए, 
खिलखिलाके हंसती है, 
बेबाक सी;
बेफिक्री में;
अपने चेहरे की महीन झुर्रियों को दिखाते हुए, 
काले जुल्फों के बीच कुछ चांदी सी चमकते सितारों जैसे बाल लहराते हुए, 
अपने ललाट पर अनुभवओं की लकीरें उभारते हुए, 
उन तमाम बातों को झुठलाते हुए, 
जो कहते हैं खूबसूरती उम्र की मोहताज होती है;
दिल खोल के हँसती है..

©Aditi Sinha
  #हँसी
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Aditi Sinha

उसने उसके कमर में हाथ डाल कर अपनी ओर खींचा और फुसफुसा के उसके कानों में कहा, काजल भरी आँखें इतनी खाली कैसे हो सकती है? 
उसकी आँखों से उसके गालों तक ढलके आँसूओं ने बता दिया, काजल भरी आँखें कितनी खाली है और कितनी भरी हुई....

©Aditi Sinha #suniaankhe 

#girl
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Aditi Sinha

इश्क़ में  काशी होना आसान नहीं है, 
काशी शिव को समर्पित है, 
काशी शिव को अर्पित है,
काशी में शिव बसते हैं, 
क्षण भर तांडव का शोर सुना कर, 
शिव गंगा में क्रोध डुबोते हैं, 
बैठे होते हैं, सीढ़ी पर, सन्यासी का भेष लिये
दिख जाता है वहीं कहीं कोई सांढ़ त्रिशूल का छाप लिए, 
और दिखती है कोई रांड वहीं रुद्राक्ष की माला जपती है, 
काशी के लिए बनी  नहीं, पर शिव की ताप में तपती है, ।
कल कल बहती गंगा में, मुक्ति के राख डुबोते हैं, 
हम जन्म मरण का भेद मिटा, काशी में शिव को पाते हैं., ।

©Aditi Sinha #kashi

#Life
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Aditi Sinha

सुनो! तुम्हें पता है ये इश्क़ और गुलाब एक दूसरे के पर्याय क्यों हैं? 
नहीं मुझे तो ये पता है कि इश्क़ होने का अहसास गुलाब की पंखुरियों सा मखमली होता है। 
अच्छा, फिर तो मेरे ख्याल अलग हैं तुमसे। 
वो, कैसे? 
वो इसलिए की मुझे लगता है इश्क़ का गुलाब से गहरा नाता है, 
गुलाब की पंखुरियाँ अगर इश्क़ को मखमली अहसास देती हैं तो उसमें मौजूद काँटे हक़ीक़त का अहसास दिलाते हैं, 
वो बताते हैं की इश्क़ सिर्फ कोमल ही नहीं होता, उसमें होते हैं विरह के काँटे, तन्हाई, बेवफाई और इंतज़ार...

©Aditi Sinha #roseday
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Aditi Sinha

श्श्श! उसने यही सीखा था, 
चुप रहना। 
पहली दफ़े जब ब्याह रचाया गुड़ीया का और किसी खास रिश्तेदार ने आगे की रश्म समझाई थी, 
अँधेरे में बड़ी- बड़ी आँखें कर, गोल होंठ कर ऊँगली रख कर जोर से बोला था
श्शश! 
स्कूल गई थी, मास्टर ने कॉपी जाँच करने के बहाने बुलाया था, 
गलती समझाते हुए, पीठ पर हाथ फिराया था, जब उसने विरोध किया तो बदले में सुना, 
श्शश! 
कॉलेज जा रही थी, रास्ते में मंचले ने रास्ता रोका, 
तंज कसा, चुनरी छीनी, जब आँख दिखाया तो जवाब  आया, आगे कुछ भी हो सकता है, 
श्शश! 
शादी हुई, ससुराल गयी, सब ठीक चल रहा था, 
पति गुजर गया, 
देवर ने फायदा उठाया, जिस्म तार- तार और इज्जत ज़ार- ज़ार कर  दिया
जब आवाज़ उठानी चाही तो बच्चे का मुख दिखा कर कहा
श्श्!श

©Aditi Sinha #shhh
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Aditi Sinha

सुनो! क्या सच में डूबते सूरज का दीदार उदास आँखों के सुनेपन को भर देता है? 
पता नहीं, मैं तो यहाँ इसलिए बैठा हूँ की तुम्हारी आँखों में उतरते सूरज की लालिमा से रात के ख्वाब सहेज सकूँ और सुबह तुम्हारी आँख खुले तो आसमां में खुशियाँ बिखेर सकूँ......

©Aditi Sinha #suno
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Aditi Sinha

ज़र्ज़र सी दिवार के एक छोटे रोशनदान से, उस धूप ने आना शुरू किया;
जो घिरी हुई थी झालों से और भरी हुई थी धूलों से;
बिस्तर के सिराहने पर एक मैला- कुचैला सा तकिया,
तकिये पर सपने पड़े हुए,
"वो" , जो रात पहन कर सोई थी और सुबह उठाना भूल गयी;
वो अधकच्चा , गीला सपना और बिस्तर का भीगा तकिया;
धूप ने सेंकना शुरू किया ताकि , रात पहन "वो" , फिर सो सके...

©Aditi Sinha #sapne
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Aditi Sinha

सुनो, चाय पसंद है ना अब भी तुम्हें, 
हाँ, है ना। 
वो कुल्हड़ वाली? 
 नहीं 1/2 वाली। 
आधी चाय, आधी बातें, 
अधूरी तुम, अधूरा मैं...

©Aditi Sinha #chaai
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Aditi Sinha

गुजरते दिसंबर की लगभग आखिरी खर्च होती शाम और बारिश;
भीगता शहर और ठंढ से ठिठुरती रात, 
स्ट्रीट लैम्प पर गिरती बारिश की बुँदे और चमकती रौशनी की बौछार, 
बहुत बेचैन करता है उसे महबूब का शहर में ना होना, और उसके आने का इंतज़ार;

©Aditi Sinha #december 
#Stars
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