Dilip Makwana

Dilip Makwana Lives in Mumbai, Maharashtra, India

यू तो जमाने से बेखबर, बेअसर सा हूं कलम लिए बैठू तो अम्बर सा हूं आओ..बैठो कभी फ़ुर्सत में सामने मेरे समझने में तो मैं पूरे समंदर सा हूं !! दिलीप.....

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"ए.... समंदर !! नदी बन तुझमे घुलना चाह रहा हूं खुद को मिटाकर... समंदर कहलाना चाह रहा हूं !!"

ए.... समंदर !!

नदी बन तुझमे घुलना चाह रहा हूं

खुद को मिटाकर...
समंदर कहलाना चाह रहा हूं !!

ख्वाब

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"#OpenPoetry सम्मुख मेरे कोई परी भी आ जाए तो कोई बात नही बस तेरे नाम का कोई कंकर भी आ जाए उससे बड़ी कोई सौगात नही !!"

#OpenPoetry  सम्मुख मेरे कोई परी भी
आ जाए तो कोई बात नही

बस तेरे नाम का कोई कंकर 
भी आ जाए
उससे बड़ी कोई सौगात नही !!

"प्रिये"

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"#OpenPoetry आधी रात को ख्याल आया है मेरा इश्क मेरी छत पर आया है !!"

#OpenPoetry आधी रात को ख्याल आया है 
मेरा इश्क मेरी छत पर आया है !!

#OpenPoetry

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"तन्हा सा हूं तुमसे दूर होकर तन्हाई अच्छी है या मुझसे कोई गुस्ताखी हो गई !!"

तन्हा सा हूं तुमसे दूर होकर
तन्हाई अच्छी है या 
मुझसे कोई गुस्ताखी हो गई !!

तन्हाई

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"तुम रहो ताउम्र इस घर की चार दीवारी में बन्दिशों में नही बल्कि रौनक बनकर !!"

तुम रहो ताउम्र इस घर की चार दीवारी में

बन्दिशों में नही बल्कि रौनक बनकर !!

 

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