Praveen Jain

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Yo!

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हर एक कपड़े का टुकड़ा माँ का आँचल हो नहीं सकता, 
जिसे दुनिया को पाना हो वो पागल हो नहीं सकता,
जफाओं की कहनी जब तलक इसमें न शामिल हो,
वफाओं का कोई किस्सा मुकम्मल हो नहीं सकता;
#KumarVishwas #KVpoetry

16 Love

कोई अल्हड़ हवा जब चली झूमती, 
मन को ऐसा लगा ज्यों तुम्हीं से मिला,
जब भी तुम मिल गए राह में मोड़ पर,
मुझको मालूम हुआ जिंदगी से मिला; 
#KumarVishwas #KVpoetry

14 Love

सातवें आसमान तक, चल ना !
चल! सितारों के जाल तक, चल ना !
दिल, बिना देवता की काशी है ,
जिस में हर घाट पर उदासी है ,
कुछ है चटका हुआ सा मुझ में भी ,
तू भी कितने जनम से प्यासी है ,
मेरे अश्कों के ताल पर, चल ना !
सातवें आसमान पर, चल ना !

13 Love

ये भी दिन देखने थे आज तुम्हारे बल पर,
ख़्वाब कि मुर्दा रियाया के भी यूँ पर निकले,
तुम्हारी बातें, निगाह, वादे तो तुम जैसे थे,
तुम्हारे ख्वाब भी तुम जैसे ही शातिर निकले;
#KumarVishwas #KVpoetry

13 Love

अजब सी ऊब शामिल हो गयी है रोज़ जीने में
पलों को दिन में, दिन को काट कर जीना महीने में
महज मायूसियाँ जगती हैं अब कैसी भी आहट पर
हज़ारों उलझनों के घोंसले लटके हैं चैखट पर
अचानक सब की सब ये चुप्पियाँ इक साथ पिघली हैं
उम्मीदें सब सिमट कर हाथ बन जाने को मचली हैं
मेरे कमरे के सन्नाटे ने अंगड़ाई सी तोड़ी है
मेरी ख़ामोशियों ने एक नग़मा गुनगुनाया है

13 Love