Aman Baranwal

Aman Baranwal Lives in Basti, Uttar Pradesh, India

poet, motivational speaker,writer, UpSc aspirants

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"कभी तुम मांग लेना दिल मेरा किसी खुशनुमा पल में, सबकुछ दे ना डालू तो मुझे गद्दार तुम कहना !"

कभी तुम मांग लेना दिल मेरा
किसी खुशनुमा पल में,
सबकुछ दे ना डालू तो
मुझे गद्दार तुम कहना !

मेरी कलम से

5 Love

"मिट्टी का जिस्म और आग सी ख्वाहिशें, खाक होना लाजमी है, क्योंकि आदमी आखिर आदमी है!"

मिट्टी का जिस्म और आग सी ख्वाहिशें,
खाक होना लाजमी है,
क्योंकि आदमी आखिर आदमी है!

जीवन का अर्थ

4 Love

"खुले हुये किताब की तरह हूं.मैं जो चाहे पढ़ सकता है.........."

खुले हुये किताब की तरह हूं.मैं
जो चाहे पढ़ सकता है..........

emotionally post

12 Love

"#OpenPoetry वो भी सोने के भाव की तरह मुझसे दूर होती चली गयी. नजदीक रहने का प्रयास भी असफल रहा. क्योंकि मैं ग्राहक नया जो ठहरा ...!"

#OpenPoetry वो भी सोने के भाव की तरह मुझसे दूर होती चली गयी.

नजदीक रहने का प्रयास भी असफल रहा.
क्योंकि मैं ग्राहक नया जो ठहरा ...!

current time condition..

17 Love

by ajay

28 Love
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