Aditya Ans [Aditya Raj Chhatrapati]

Aditya Ans [Aditya Raj Chhatrapati] Lives in Jaipur, Rajasthan, India

Poet, Writer, Stage Anchor

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"इन क़दमों का हर बार, अनजानी राहों पर चलना रोज टूटते कई मग़र, रोज नए ख्वाबों का पलना। शायद कोशिश करता हैं, खुदा भी अपनी जानिब हर बार इत्तेफ़ाक नहीं, ऐसे हम दोनों का मिलना।। #NojotoQuote"

इन क़दमों का हर बार,
अनजानी राहों पर चलना
रोज टूटते कई मग़र,
रोज नए ख्वाबों का पलना।
शायद कोशिश करता हैं,
खुदा भी अपनी जानिब
हर बार इत्तेफ़ाक नहीं,
ऐसे हम दोनों का मिलना।। #NojotoQuote

#mypoetry149

#ख्वाब #इत्तेफाक #खुदा
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16 Love

"मकर संक्रांति कविता विशेष - मकर सक्रांति :- कटी पतंग बची डोर हर तरफ हल्ला हैं ये ही, हर तरफ ये ही शोर। तिल के लड्डू खाने में, कटी पतंग बची डोर।। सक्रांति त्यौहार हैं मित्रों, दान धर्म उपकार का रहे ना कोई जन वंचित, खुशियों से इस संसार का। पर सेवा ही परम धर्म हैं, शुभ हो जाए हर भोर तिल के लड्डू खाने में, कटी पतंग बची डोर।१। ओढ़ाने और पहनाने का, इस पर्व पर हैं रिवाज छू के चरण बुजुर्गों के, करते हम खुद पर नाज। मिट जाती हैं सब दुख पीड़ा, होती खुशियाँ चहुँओर तिल के लड्डू खाने में, कटी पतंग बची डोर।२। देने से कुछ कम नहीं होता, बढ़ जाते हैं कोष खुशियाँ गम आते रहते हैं, नहीं किसी का दोष। सब की गाड़ी वो ही हाँके, चले ना 'अंस' का जोर तिल के लड्डू खाने में, कटी पतंग बची डोर।३। हर तरफ हल्ला हैं ये ही, हर तरफ ये ही शोर। तिल के लड्डू खाने में, कटी पतंग बची डोर।। #NojotoQuote"

मकर संक्रांति कविता विशेष - मकर सक्रांति 
:- कटी पतंग बची डोर

हर तरफ हल्ला हैं ये ही, हर तरफ ये ही शोर।
तिल के लड्डू खाने में, कटी पतंग बची डोर।। 

सक्रांति त्यौहार हैं मित्रों, दान धर्म उपकार का
रहे ना कोई जन वंचित, खुशियों से इस संसार का। 
पर सेवा ही परम धर्म हैं, शुभ हो जाए हर भोर 
तिल के लड्डू खाने में, कटी पतंग बची डोर।१।

ओढ़ाने और पहनाने का, इस पर्व पर हैं रिवाज
छू के चरण बुजुर्गों के, करते हम खुद पर नाज।
मिट जाती हैं सब दुख पीड़ा, होती खुशियाँ चहुँओर
तिल के लड्डू खाने में, कटी पतंग बची डोर।२।

देने से कुछ कम नहीं होता, बढ़ जाते हैं कोष 
खुशियाँ गम आते रहते हैं, नहीं किसी का दोष।
सब की गाड़ी वो ही हाँके, चले ना 'अंस' का जोर
तिल के लड्डू खाने में, कटी पतंग बची डोर।३।

हर तरफ हल्ला हैं ये ही, हर तरफ ये ही शोर।
तिल के लड्डू खाने में, कटी पतंग बची डोर।। #NojotoQuote

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"वहीं लोग मंदिर-मस्जिद की माँग करते हैं जो थक गये खुदा को दिल में रखते-रखते। इन्हें लड़ने दो जात-धर्म के नाम पर, वरना हमसे सवाल करेंगें, नेताजी बोले हँसते-हँसते। जवाबदारों ने ही झूठ-कपट से रिश्वत ली हैं बेचारा सच भी निकलता हैं इनसे बचते-बचते। माँ गंगा भी अब उनको लानत देती होगी जो सत्ता पा गए गंगा का नाम जपते-जपते। #gif"

वहीं लोग मंदिर-मस्जिद की माँग करते हैं
जो थक गये खुदा को दिल में रखते-रखते।

इन्हें लड़ने दो जात-धर्म के नाम पर, वरना
हमसे सवाल करेंगें, नेताजी बोले हँसते-हँसते।

जवाबदारों ने ही झूठ-कपट से रिश्वत ली हैं
बेचारा सच भी निकलता हैं इनसे बचते-बचते।

माँ गंगा भी अब उनको लानत देती होगी
जो सत्ता पा गए गंगा का नाम जपते-जपते। #gif

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15 Love

"Pyar Karke Jana हैं लोग जिसे जग में कहते श्रीकृष्ण की भक्ति हैं ऐसा भाव जो मिटा दें मन की सारी विरक्ति। प्यार करके हम तो बस इतना ही जान पाए हैं हैं ये हर दिल के अनकहे शब्दों की अभिव्यक्ति।।"

Pyar Karke Jana  हैं लोग जिसे जग में कहते श्रीकृष्ण की भक्ति
हैं ऐसा भाव जो मिटा दें मन की सारी विरक्ति।
प्यार करके हम तो बस इतना ही जान पाए हैं
हैं ये हर दिल के अनकहे शब्दों की अभिव्यक्ति।।

प्यार करके जाना
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15 Love

"गज़ल :- जवाज़-ए-हिज्र कुछ यूँ तुमसे मोहब्बत की उम्मीद लगाकर बैठे हैं सवेरा हो चुका हैं और हम चिराग जलाकर बैठे हैं। जब महसूस हो जाये तुमको सदाकत मेरे इश्क की, गर हो सके तो लौट आना हम राहें सजाकर बैठे हैं। मैं ही नहीं हकदार अकेला, दर्द-ए-दिल तुमको भी हैं, तुम ही तो मर्ज की हो दवा, हम चैन गवाँकर बैठे हैं। आने में तकलीफ़ कोई, हो ना तुमको मुझ तलक, आब-ए-चश्म से धोकर, कई गुल खिलाकर बैठे हैं। अब जवाज-ए-हिज्र में तकलीफ़ कोई आएगी नहीं, चाँद और तारों को हम, बिस्तर में सुलाकर बैठे हैं। #gif"

गज़ल :- जवाज़-ए-हिज्र

कुछ यूँ तुमसे मोहब्बत की उम्मीद लगाकर बैठे हैं
सवेरा हो चुका हैं और हम चिराग जलाकर बैठे हैं।

जब महसूस हो जाये तुमको सदाकत मेरे इश्क की,
गर हो सके तो लौट आना हम राहें सजाकर बैठे हैं।

मैं ही नहीं हकदार अकेला, दर्द-ए-दिल तुमको भी हैं,
तुम ही तो मर्ज की हो दवा, हम चैन गवाँकर बैठे हैं।

आने में तकलीफ़ कोई, हो ना तुमको मुझ तलक,
आब-ए-चश्म से धोकर, कई गुल खिलाकर बैठे हैं।

अब जवाज-ए-हिज्र में तकलीफ़ कोई आएगी नहीं,
चाँद और तारों को हम, बिस्तर में सुलाकर बैठे हैं। #gif

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#Reconciliation
#पुनर्मिलन
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#सदाकत :- सच्चाई
#मर्ज :- रोग, बिमारी
#आब-ए-चश्म :- आँसू

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