Govind Pandram

Govind Pandram Lives in Betul, Madhya Pradesh, India

"अधूरे अल्फाज़"

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"फूलों सी नाजुक, तितलियो की पर है बेटियाँ.. लहरों सी शीतल, पावन समंदर है बेटियाँ... घर की रौनक, पिता की दौलत है बेटियाँ... चाँद तारों से, सजी हुई अंबर है बेटियाँ... ©Govind Pandram"

फूलों सी नाजुक, 
तितलियो की पर है बेटियाँ..

लहरों सी शीतल, 
पावन समंदर है बेटियाँ... 

घर की रौनक, 
पिता की दौलत है बेटियाँ...

चाँद तारों से,  
सजी हुई अंबर है बेटियाँ...

©Govind Pandram

#HappyDaughtersDay2020

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"खुद को तनहा छोड़ा है, तो सिर्फ तेरे लिए नाता इश्क़ का जोड़ा है, तो सिर्फ तेरे लिए। तुमको देखा तो, रोक नहीं पाया खुद को.. इन कदमो को मोड़ा है, तो सिर्फ तेरे लिए। वादा ना तोडूँगा,खुद से ये वादा था.. मैंने वादा तोड़ा है, तो सिर्फ तेरे लिए। बिन तेरे मर ही जायेगा, ये "गोविन्द"अब.. चादर इश्क़ का ओड़ा है, तो सिर्फ तेरे लिए। गोविन्द पन्द्राम"

खुद को तनहा छोड़ा है,  
तो सिर्फ तेरे लिए 
नाता इश्क़ का जोड़ा है, 
तो सिर्फ तेरे लिए। 
तुमको देखा तो, रोक 
नहीं पाया खुद को.. 
इन कदमो को मोड़ा है, 
तो सिर्फ तेरे लिए। 
वादा ना तोडूँगा,खुद से 
ये वादा था..
मैंने वादा तोड़ा है, 
तो सिर्फ तेरे लिए। 
बिन तेरे मर ही जायेगा, 
ये "गोविन्द"अब..
चादर इश्क़ का ओड़ा है,  
तो सिर्फ तेरे लिए। 
      गोविन्द पन्द्राम

#leftalone

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"छोटे से जहाँ में, छोटी सी बस्ती मेरी, भीषण 'बाढ़' में छोटी सी कस्ती मेरी, हे! भगवान कुछ तो मुझ पर दया कर.. तेज लहरों में मिट न जाये हस्ती मेरी। .....गोविन्द पन्द्राम"

छोटे से जहाँ में, छोटी सी बस्ती मेरी,  
भीषण 'बाढ़' में छोटी सी कस्ती मेरी,  
हे! भगवान कुछ तो मुझ पर दया कर.. 
तेज लहरों में मिट न जाये हस्ती मेरी।

          .....गोविन्द पन्द्राम

#flood = बाढ़

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"मैं कहने ही वाला था, पर वो दीदार-इ-यार की तमन्ना को मचल बैठे, बहकने ही वाले थे कि फिर संभल बैठे, मैं कहने ही वाला था, दास्तान ए जिन्दगी उनसे.. पर वो आये करीब तो अरमान भी निकल बैठे!!"

मैं कहने ही वाला था, पर वो दीदार-इ-यार की तमन्ना को मचल बैठे, 
बहकने ही वाले थे कि फिर संभल बैठे, 
मैं कहने ही वाला था, दास्तान ए जिन्दगी उनसे.. 
पर वो आये करीब तो अरमान भी निकल बैठे!!

#Adhuri_baat

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"सीख लो जमाने के आदतन जीना, खुद को बदलना सीख लो। मजबूरियों को मत कोसो, हर परिस्थिति में चलना सीख लो। गोविन्द पन्द्राम"

सीख लो जमाने के आदतन जीना, 
खुद को बदलना सीख लो।
मजबूरियों को मत कोसो,  
हर परिस्थिति में चलना सीख लो।
          गोविन्द पन्द्राम

#सीख लो

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