Monika Chopra

Monika Chopra Lives in Jalandhar, Punjab, India

apni marzi se kahan apne safer ke hum hain

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ख्याल आपका कोशिश मेरी जानती हूं आपकी आवाज़ ही इस कविता को पूर्ण कर सकती है पर यु ही मेरा भी एक ख्याल इसको कहने का ,,,बिना आपकी इज़्ज़ाज़त एक गुस्ताखी की है उम्मीद है कि माफ़ी मिल जायेगी

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to bola kya hoga

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"जो प्रेम किया है न तुमसे उसका हर दर्द उधार रहा जो बादल सा ग़ुबार मन ने और बरसात आँखों से वही न सब कर्ज है तुम पे मैं तो मुक्त हो जाऊँगी मैंने जिया है तुम्हें क्या तुम मेरी आत्मा को मार मुक्त हो पाओगे ?"

जो प्रेम किया है न तुमसे
उसका हर दर्द उधार रहा
जो बादल सा ग़ुबार मन ने
और बरसात आँखों से वही न
सब कर्ज है तुम पे 
मैं तो मुक्त हो जाऊँगी
मैंने जिया है तुम्हें
क्या तुम मेरी आत्मा
को मार मुक्त हो पाओगे ?

#darkness

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"नज़र भर के देखा खुदा कर दिया जो फेरी नज़र जां से जुदा कर दिया ये कैसा सफ़र है मोहब्बत का या रब लगाया गले से फ़ना कर दिया"

नज़र भर के देखा खुदा कर दिया
जो फेरी नज़र जां से जुदा कर दिया
ये कैसा सफ़र है मोहब्बत का या रब
लगाया गले से फ़ना कर दिया

mohabat ka safer

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"क्या तुम प्रेम में हो ???? आज ये सवाल उठाया एक अपने ने तो सोच में पड़ गयी की क्या चेहरा सब बोलता है ? ये बोलता है दिल के सब भेद ? पर मैं हूं क्या इस अहसास में ? क्योंकि प्रेम बहुत पीछे छूट गया अब तो जिस मद में हूं वो है आराधना मेरी आँखों में जो प्रेम है वो प्रेम है मेरे आराध्य के लिए जो न जाने कब प्रेम से आराधना में परिवर्तित हो गया मेरी हँसी , मेरे आँसू सब उसकी आत्मीयता पर न्योछावर हैं हर कोई अपने आराध्य को किसी न किसी रूपमें पूजता है मैंने भी पूजा है, प्रेम का ये रूप कब इस सोपान तक पहुँच गया ये तब समझ आया जब खुद के चेहरे में झलक दिखी उस पूजनीय सानिध्य की जहाँ सब इच्छाये समाप्त हो गयी रह गयी तो मात्र एक लगन उसको चाहने की और बदल गया प्रेम पूजा में हाँ ,,,मैं हूं प्रेम में !!!!! (मोनिका)"

क्या तुम प्रेम में हो ????
आज ये सवाल उठाया एक अपने ने
तो सोच में पड़ गयी
की क्या चेहरा सब बोलता है ?
ये बोलता है दिल के सब भेद ?
पर मैं हूं क्या इस अहसास में ?
क्योंकि प्रेम बहुत पीछे छूट गया
अब तो जिस मद में हूं
वो है आराधना
मेरी आँखों में जो प्रेम है
वो प्रेम है मेरे आराध्य के लिए
जो न जाने कब प्रेम से 
आराधना में परिवर्तित हो गया
मेरी हँसी , मेरे आँसू 
सब उसकी आत्मीयता पर
न्योछावर हैं
हर कोई अपने आराध्य को 
किसी न किसी रूपमें पूजता है
मैंने भी पूजा है, प्रेम का ये रूप 
कब इस सोपान तक पहुँच गया 
ये तब समझ आया 
जब खुद के चेहरे में झलक दिखी 
उस पूजनीय सानिध्य की
जहाँ सब इच्छाये समाप्त हो गयी
रह गयी तो मात्र एक लगन
उसको चाहने की
और बदल गया प्रेम पूजा में
हाँ ,,,मैं हूं प्रेम में !!!!!
(मोनिका)

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