Dr Garima tyagi

Dr Garima tyagi Lives in Delhi, Delhi, India

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"ईद मुबारक़...."

ईद मुबारक़....

#ईदमुबारक़........

169 Love

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"खुद की खुद से पहचान की जद्दोजहद में, बीत जाता है हर दिन मेरा | रिश्तों को खुश करने की चाहत में नज़र आता है, हर रोज खुद का नया चेहरा | बात ज़ब हो अपनों का दामन खुशियों से भरने की, मैं भूल जाता हूँ खुद ही सब कुछ बस यूँही अपना सारा | यही मैं हूँ बस यही पहचान है मेरी, सदके में प्रभु के झुक जाता है सर मेरा | ✍️✍️✍️डॉ गरिमा त्यागी"

खुद  की  खुद  से  पहचान  की  जद्दोजहद  में, 
बीत जाता है हर दिन मेरा | 
रिश्तों को खुश करने की चाहत में नज़र आता है,
हर रोज खुद का नया चेहरा |
बात ज़ब हो अपनों का दामन खुशियों से भरने की, 
मैं भूल जाता हूँ खुद ही सब  कुछ बस यूँही अपना सारा  |
यही   मैं   हूँ   बस   यही   पहचान   है  मेरी, 
सदके में प्रभु के झुक जाता है सर मेरा |

✍️✍️✍️डॉ गरिमा त्यागी

#SunOfHope

167 Love
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"किसी को हद से ज्यादा चाहना भी सजा है खुद के लिए, लोग अक्सर धोखा दे देते हैं प्यार में। जिदंगी जिसे बना लेते हैं वो अपनी, पलभर में उस रिश्ते को रौंदकर चले जाते वे।"

किसी को हद से ज्यादा चाहना भी सजा है खुद के लिए,
लोग अक्सर धोखा दे देते हैं प्यार में।
जिदंगी जिसे बना लेते हैं वो अपनी,      पलभर में उस रिश्ते को रौंदकर चले जाते वे।

प्यार में सच्चाई,निश्छलता और विश्वास होना ही प्यार को पवित्र बनाता है। हमारे रिश्ते किसी के लिये भी हो माता-पिता,भाई -बहिन,दोस्त लेकिन उनमें प्यार और सच्चाई होनी चाहिये तभी ठहरते हैं जीवन में।

165 Love
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"Maa निःशब्द मृत्तिका-सी कभी नर्म कभी सख्त साँचे में खुद को ढालकर, सभी को ऊर्जस्वित करती है माँ | कभी जल-सी तरलता, कभी विटप-सी प्राणमयता लिये, खुद की ख्वाहिशों से अनजान बनकर सभी को ख़ुश रखती है माँ | जिम्मेदारियों की शिकन कभी दिखे ना मस्तक पर, हँसकर हर पल को गुज़ार देती है माँ | तानों रूपी कंटकों से तिरस्कृत हर दिन विष का घूंट क्यों पीना पड़ता है उसे, ज़ब हर पल अपना सबके लिये जीती है माँ| ओहदा माँ का इस ज़हान में सबसे पृथक होकर भी होता है ऐसा क्यों, ज़ब हर बच्चे के लिये जन्नत होती है उसकी माँ | ✍️✍️✍️डॉ गरिमा त्यागी"

Maa  निःशब्द 

 मृत्तिका-सी कभी नर्म कभी सख्त साँचे में खुद को ढालकर,   
 सभी को ऊर्जस्वित करती है माँ |
कभी जल-सी तरलता, कभी विटप-सी प्राणमयता लिये, 
खुद की ख्वाहिशों से अनजान बनकर सभी को ख़ुश रखती है माँ |
जिम्मेदारियों की शिकन कभी दिखे ना मस्तक पर, 
हँसकर हर पल को गुज़ार देती है माँ |
  तानों रूपी कंटकों से तिरस्कृत हर दिन विष का घूंट क्यों पीना पड़ता है उसे,   
ज़ब हर पल अपना सबके लिये जीती है माँ|
 ओहदा माँ का इस ज़हान में सबसे पृथक होकर भी होता है ऐसा क्यों, 
 ज़ब हर बच्चे के लिये जन्नत होती है उसकी माँ |
 
✍️✍️✍️डॉ गरिमा त्यागी

मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनायें.........

164 Love
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#कविता #कोरोना #covid19 #corona

covid-19 (कोरोना वायरस )
विनती (कविता)
घर में रहें, सुरक्षित रहें......
यह एक ऐसी महामारी है जिससे सम्पूर्ण देश इस समय जूझ रहा है इसी विषय पर मेरी नई कविता है ( विनती)https://www.youtube.com/channel/UCBARtiDF3we_HrOpBqn_JLA

162 Love
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