Kalika Jitendra Singh

Kalika Jitendra Singh Lives in Guntur, Andhra Pradesh, India

I write to Escape from the World

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कामयाब लोगों के चेहरों पर दो चीजें होती है,
एक साइलेंस और दूसरा स्माइल।

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Apne chehre se zara ye naqab to hata lo
ke chand ko grahan lage hame ye pasand nahi

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"भूल जीवन का एक पेज है और सम्बन्ध पूरी किताब. जरुरत पड़े तो भूल का एक पेज फाड़ देना, लेकिन एक छोटे- से पेज के लिए पूरी किताब नहीं।"

भूल जीवन का एक पेज है और सम्बन्ध पूरी किताब. जरुरत पड़े तो भूल का एक पेज फाड़ देना, 
लेकिन एक छोटे- से पेज के लिए पूरी किताब नहीं।

#भूल #जीवन का एक पेज है और #सम्बन्ध पूरी #किताब. जरुरत पड़े तो भूल का एक पेज फाड़ देना, लेकिन एक छोटे- से पेज के लिए पूरी किताब नहीं।

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"थोड़ा धीरज रख, थोड़ा और जोर लगाता रह !! किस्मत के जंग लगे दरवाजे को, खुलने में वक्त लगता है !! कुछ देर रुकने के बाद, फिर से चल पड़ना दोस्त !! हर ठोकर के बाद, संभलने में वक्त लगता है !! बिखरेगी फिर वही चमक, तेरे वजूद से तू महसूस करना !! टूटे हुए मन को, संवरने में थोड़ा वक्त लगता है !! जो तूने कहा, कर दिखायेगा रख यकीन !! गरजे जब बादल, तो बरसने में वक्त लगता है !!"

थोड़ा धीरज रख, थोड़ा और जोर लगाता रह !!
किस्मत के जंग लगे दरवाजे को, खुलने में वक्त लगता है !!

कुछ देर रुकने के बाद, फिर से चल पड़ना दोस्त !!

हर ठोकर के बाद, संभलने में वक्त लगता है !!

बिखरेगी फिर वही चमक, तेरे वजूद से तू महसूस करना !!

टूटे हुए मन को, संवरने में थोड़ा वक्त लगता है !!

जो तूने कहा, कर दिखायेगा रख यकीन !!

गरजे जब बादल, तो बरसने में वक्त लगता है !!

थोड़ा धीरज रख, थोड़ा और जोर लगाता रह !!
किस्मत के जंग लगे दरवाजे को, खुलने में वक्त लगता है !!

कुछ देर रुकने के बाद, फिर से चल पड़ना दोस्त !!

हर ठोकर के बाद, संभलने में वक्त लगता है !!

बिखरेगी फिर वही चमक, तेरे वजूद से तू महसूस करना !!

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"लोग काँटों से बच के चलते हैं मैं ने फूलों से ज़ख़्म खाए हैं"

लोग काँटों से बच के चलते हैं
मैं ने फूलों से ज़ख़्म खाए हैं

#Flower #nojotohindi

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