Dev Faizabadi 💎

Dev Faizabadi 💎 Lives in Ayodhya, Uttar Pradesh, India

"दर्द, उम्मीद, बेबसी व जूनून- ए- हालात लिखता हूं। जब वक़्त मिलता है तो दिल के जज़्बात लिखता हूं।। - देव "ज़िन्दगी क्या से क्या गुल खिला रही है। कुछ बनना था बहुत कुछ सिखा रही है।।- देव "कोशिश नहीं, चाहत से हर चीज़ हासिल होती है" - देव.🌠🌠🌠⏬ ✴️Education.- *B. A. (Hindi, English) *LLb 4th semester *CCC-(course on computer concepts) *O levels (2 paper pass 3rd in schedule) ✴️literature background *विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित (साकेत सुधा, ह्देश पत्रिका, बेनकाब मुज़रिम, अपना दर्द, उदय स्मारिका, चन्दन विरवे, आदि) ✴️Dreams. *अपने जाॅब की आय का कुछ हिस्सा जरूरतमंद लोगों की सेवा में लगाना *Insta I'd =dev Faizabadi * Facebook = dev Faizabadi *utube =................ *mob.=9918223442

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"दोस्त तो बहुत थे सब कहने को क़रीब थे। कुछ तो अमीरचंद थे कुछ बड़े ही अजीब थे। दौर बुरा था और ज़िन्दगी की जंग हार जाता पर, बुरे वक्त पे काम जो आये सच में बड़े गरीब थे। -देव फैज़ाबादी अयोध्या ( यू.पी.) ©Dev Faizabadi 💎"

दोस्त तो बहुत थे सब कहने को क़रीब थे।
कुछ तो अमीरचंद थे कुछ बड़े ही अजीब थे।
दौर बुरा था और ज़िन्दगी की जंग हार जाता पर,
बुरे वक्त पे काम जो आये सच में बड़े गरीब थे।
-देव फैज़ाबादी
अयोध्या ( यू.पी.)

©Dev Faizabadi 💎

#सच्चे_दोस्त#nojoto_shayri#nojotohindi#nojotoenglish#nojotourdu#nojotonews#NojotoFilms

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"विधा- कविता शीर्षक-माँ की ममता.. ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ बच्चों के खातिर जिसमें स्वार्थ-भाव दिखता नहीं। माँ की ममता है साहब जो बाजार में बिकता नहीं।। खुद तो भूखा रह लेगी पर बच्चों का पेट वो पालेगी। पता नहीं क्यों भूख नहीं है वो कहकर ऐसा टालेगी। काल भी जिसके आगे आकर पलभर भी टिकता नहीं। माँ की ममता है............................. बिकता नहीं। हर रिश्तों में सबसे प्यारा माँ का रिश्ता प्यारा है। लाखों शोहरत हो दुनियाँ में पर माँ का आँचल न्यारा है। भाग्य जो लिखती माँ बेटे की मिटाये से मिटता नहीं। माँ की ममता है ................................. ...बिकता नहीं। बेटे को कुछ ना हो जाये यूँ दिलों जान से मरती है। दवा, दुआ, टोना, टोटका हर भागदौड़ वो करती है। ग़र ना होती सच्ची ममता तो 'देव' कभी लिखता नहीं। माँ की ममता है.............................. बिकता नहीं। -देव फैज़ाबादी अयोध्या ( यू. पी.) ©Dev Faizabadi 💎"

विधा- कविता
शीर्षक-माँ की ममता..
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बच्चों के खातिर जिसमें स्वार्थ-भाव दिखता नहीं।

माँ की ममता है साहब जो बाजार में बिकता नहीं।।


खुद तो भूखा रह लेगी पर बच्चों का पेट वो पालेगी।

पता नहीं क्यों भूख नहीं है वो कहकर ऐसा टालेगी।

काल भी जिसके आगे आकर पलभर भी टिकता नहीं।

माँ की ममता है.............................  बिकता नहीं।


हर रिश्तों में सबसे प्यारा माँ का रिश्ता प्यारा है।

लाखों शोहरत हो दुनियाँ में पर माँ का आँचल न्यारा है।

भाग्य जो लिखती माँ बेटे की मिटाये से मिटता नहीं।

माँ की ममता है ................................. ...बिकता नहीं।


बेटे को कुछ ना हो जाये यूँ दिलों जान से मरती है।

दवा, दुआ, टोना, टोटका हर भागदौड़ वो करती है।

ग़र ना होती सच्ची ममता तो 'देव' कभी लिखता नहीं।

माँ की ममता है.............................. बिकता नहीं।
-देव फैज़ाबादी
अयोध्या ( यू. पी.)

©Dev Faizabadi 💎

#MothersDay2021
#if_feel_the_lines_then_repost
#माँ_की_ममता #कविता #nojotohindi#nojotoenglish#nojotoenglish#NojotoFilms#nojotonews# @aman6.1 @himanshi Singh @सत्यप्रेम @कवि राहुल पाल Pushpvritiya

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"गज़ब का असर है माँ तेरी दुवाओं में............ कोई ग़म छू नहीं सकता जब तक हूँ तेरी पनाहो में। -देव फैज़ाबादी ©Dev Faizabadi 💎 "

गज़ब  का  असर  है माँ  तेरी  दुवाओं  में............

कोई ग़म छू नहीं सकता जब तक हूँ तेरी पनाहो में।

-देव फैज़ाबादी

©Dev Faizabadi 💎

#MothersDay2021

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"~~~~~विधा-गज़ल~~~~~ शीर्षक- बात गैरों की... रिश्ते अपनो के ऐसे भुलाया ना करिए। बात गैरों की दिल से लगाया ना करिए। माना तेरे दिल में भी अरमां बहुत है, पर ऐसे सभी को यूंँ बताया ना करिए। एहसान जो तुमने दिल से किया हैं, यूँ मुँह पे किसी के जताया ना करिए। रूठा हो जो तुमसे मना लीजिएगा, रूठे का और दिल दु:खाया ना करिए। बात 'देव' की तो वैसे निराली लगेंगी, निकालना हो तो दिल में बसाया ना करिए। -देव फैज़ाबादी अयोध्या ( यू. पी.) 01/05/21 ©Dev Faizabadi 💎"

~~~~~विधा-गज़ल~~~~~
         शीर्षक- बात गैरों की...

रिश्ते अपनो के ऐसे भुलाया ना करिए।
बात गैरों की दिल से लगाया ना करिए।

माना तेरे दिल में भी अरमां बहुत है,
पर ऐसे सभी को यूंँ बताया ना करिए।

एहसान जो तुमने दिल से किया हैं,
यूँ मुँह पे किसी के जताया ना करिए।

रूठा हो जो तुमसे मना लीजिएगा,
रूठे का और दिल दु:खाया ना करिए।

बात 'देव' की तो वैसे निराली लगेंगी,
निकालना हो तो दिल में बसाया ना करिए।

          -देव फैज़ाबादी
         अयोध्या ( यू. पी.)
        01/05/21

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"फिल्मों में एक से ज्यादा किरदार जो निभाया जाता है, वो महज़ कल्पना मात्र का प्रतिबिंब होता है.............. वहीं असली किरदार तो एक शादीशुदा औरत निभाती है जो पति के लिए धर्मपत्नी का किरदार, पुत्र के लिए एक ममतामयी का किरदार, परिवार वालों के लिए बहू का किरदार, आज वो सारे किरदारों के साथ -साथ एक कोरोना महामारी का अद्भुत त्याग, और समर्पण का किरदार निभा रही हैं, जिसे भाषा में व्यक्त नहीं किया जा सकता। -देव फैज़ाबादी #dev_da_thought ©Dev Faizabadi 💎 "

फिल्मों में एक से ज्यादा किरदार जो निभाया जाता है,
 वो महज़ कल्पना मात्र का प्रतिबिंब होता है..............
वहीं असली किरदार तो एक शादीशुदा औरत निभाती है

जो पति के लिए धर्मपत्नी का किरदार,
पुत्र के लिए एक ममतामयी का किरदार,
परिवार वालों के लिए बहू का किरदार,


आज वो सारे किरदारों के साथ -साथ
 एक कोरोना महामारी का अद्भुत त्याग,
और समर्पण का किरदार निभा रही हैं,
जिसे भाषा में व्यक्त नहीं किया जा सकता।

-देव फैज़ाबादी
#dev_da_thought

©Dev Faizabadi 💎

#warrior

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