Kranti Thakur

Kranti Thakur Lives in Darbhanga, Bihar, India

रोज़ की जद्दोजहद में उलझता नहीं हाँ ज़िन्दगी से ज़ंग है और मैं अब लड़ता नहीं।।।

  • Popular
  • Latest
  • Repost
  • Video

#Gulzar diary

53 Love
4.4K Views
2 Share

""

"यूँ तो ज़िन्दगी की सभी उलझनों से पार पाया है। कम्बख्त इस 'काश' ने लेकिन मुझे बेहद सताया है। यही अफ़सोस अब भी है के तुझको रोक पाता मैं। तो खुद को इस कदर अपने कभी बेबस ना पाता मैं। मगर अब ये हक़ीक़त है कि ऐसा हो नहीं पाया। मेरे हिस्से में पछताने को फ़क़त ये 'काश' आया है। कभी ये सोचता हूँ मैं तेरी ही आरज़ू क्यूँ है। मेरे ख़्वाबों ख्यालों को तूँ क्युँ इतनी जरुरी है। गर ये तब समझ पाता तो तुझसे दूर ना जाता। तेरी ज़ुस्तज़ु में दिल को यूँ तनहा नहीं पाता। एकाकी हो कर तेरे बिन मुझे कुछ भी न भाया है। मेरे हिस्से में पछताने को फ़क़त ये 'काश' आया है। - क्रांति"

यूँ तो ज़िन्दगी की सभी उलझनों से पार पाया है।
कम्बख्त इस 'काश' ने लेकिन मुझे बेहद सताया है।
यही अफ़सोस अब भी है के तुझको रोक पाता मैं।
तो खुद को इस कदर अपने कभी बेबस ना पाता मैं।
मगर अब ये हक़ीक़त है कि ऐसा हो नहीं पाया।
मेरे हिस्से में पछताने को फ़क़त ये 'काश' आया है।

कभी ये सोचता हूँ मैं तेरी ही आरज़ू क्यूँ है।
मेरे ख़्वाबों ख्यालों को तूँ क्युँ इतनी जरुरी है।
गर ये तब समझ पाता तो तुझसे दूर ना जाता।
तेरी ज़ुस्तज़ु में दिल को यूँ तनहा नहीं पाता।
एकाकी हो कर तेरे बिन मुझे कुछ भी न भाया है।
मेरे हिस्से में पछताने को फ़क़त ये 'काश' आया है।

- क्रांति

#काश #क्रांति

35 Love
1 Share

""

"तेरे दर से चलें हम तो कहाँ जाके पहुँचे, राश्ते तो वही हैं मगर मंजिलें हैं नदारद। है सफर भी वही ख़्वाहिशें भी तुम्ही हो, ख्वाब में भी हैं तनहा हमसफ़र है नदारद। इबादत भी तुम से दुआ में भी तुम ही, मगर अब न जाने क्यूँ असर है नदारद। कसमकस में है जीवन उलझनें है बहुत सी, ना खुशियाँ है हासिल सुकून भी नदारद। है ये कोहरे का मौसम या अमावस है छायी, आस्मां तो वहीँ है मगर चाँद है अब नदारद। - क्रांति"

तेरे दर से चलें हम तो कहाँ जाके पहुँचे,
राश्ते तो वही हैं मगर मंजिलें हैं नदारद।
है सफर भी वही ख़्वाहिशें भी तुम्ही हो,
ख्वाब में भी हैं तनहा हमसफ़र है नदारद।
इबादत भी तुम से दुआ में भी तुम ही,
मगर अब न जाने क्यूँ असर है नदारद।
कसमकस में है जीवन उलझनें है बहुत सी,
ना खुशियाँ है हासिल सुकून भी नदारद।
है ये कोहरे का मौसम या अमावस है छायी,
आस्मां तो वहीँ है मगर चाँद है अब नदारद।

- क्रांति

#नदारद #क्रांति

32 Love
2 Share

#बाग़ी वज़ूद

31 Love
1.0K Views
1 Share

""

"ख़त को जला कर भी कहाँ चैन आया। गर ज़ज़्बातों को जलाते तो फिर सुकूँ आता।।"

ख़त को जला कर भी कहाँ चैन आया।
गर ज़ज़्बातों को जलाते तो फिर सुकूँ आता।।

#ख़त #सुकूँ #ज़ज़्बात #क्रांति

29 Love