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navroopsingh5886
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navroop singh

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navroop singh

White "इस दिल की आहटों को सुनो ज़रा 
लफ़्ज़ कहानी के यह सुना रही हैं 
इस दिल की धड़कन को सुनो ज़रा 
उस प्रेम कहानी की गाथा गा रही है 
मुस्कुराते चेहरों के पीछे ना जाने कितने राज़ हैं
हस्ती है सूरत और अक्स नासाज़ है 

तेरे इश्क़ में जोगन बने हम ओ सनम 
प्यार की इन कसौटियों में कितने बिखरे हम
जीवन का फ़लसफ़ा तो देखो यारों 
इस दिल की आवाज़ तो सुनो मेरे प्यारों 
जीते हैं हम उसे दीवानों की तरह आज भी 
हम तो वह परवाने जो जले सुबह शाम भी 

एक मधुर सी ज़िंदगी यह धुन गुनगुना रही है
फिर एक शाम यह धड़कन वही गीत गा रही है 
चाहेंगे तुझे सदियों भर यह इश्क़ कवायत है हमारी
तेरी अक्स में महफ़ूज़ रहे हम सनम यह जन्नत है हमारी 
सदा ख़ुश रहे तू ए हसीन बस यही दुआ है हमारी 
गाता है दिल इस धड़कन को सुनो ज़रा
फिर मिलेंगे हम बेदर्दी बालमा तराने गाता है यह मन मेरा….”

©navroop singh
  #tarane
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navroop singh

Shree Ram अयोध्या में पधारो मेरे रघुवर श्री राम
जग है पुकारे तुम्हे इस पावन धाम
मुख पे सूरज सा तेज और कोमल काया
धर्म के प्रतिबिंब और न्याय के पालनहार
है मर्यादा पुरषोत्तम मेरे प्रभु श्री राम

मैया सीता और लक्ष्मण के प्रिय प्रभु श्री राम
संसार है गाए तुम्हारी लीला हे नाथ
दशरथ है पूछे क्यों जाए तुम वनवास हे राम
कहे राम माता कैकई अज्ञा धर्म अनुसार
विधि का यही विधान रघुकुल वचन प्राण समान

परम भक्त हनुमान के अराध्य प्रभु श्री राम
असुरों के तारणहार मेरे प्रिय कौशल्या लाल
एक बार फिर पधारो यह पावन अयोध्या धाम
नारायण की लीला और नारायणी का साथ
युगों युगों है ज्ञात नाम तुम्हारा हे जानकी राम

जय सियाराम ! जय सियाराम 🙏🏻🪔🕉️

©navroop singh #shreeram
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navroop singh

आज फिर दिल से एक फरियाद निकली
जैसे तेरे ख्वाबों की बारात निकली
खोजते तुम्हें हम सुबह शाम ओ हमनशीन
परछाई तेरी जैसे आस पास से गुज़री 

आज फिर एक बार तेरी बात निकली 
इन वीरान शामों को रोज़ बिखरते हम
जैसे सूरज की वो आखरी किरण निकली
चांदनी रातों के सिलवटों में कुछ खोए से हम
 इन आंखों से वो ओस की बूंदें बह चली 

आज फिर दिल से एक फरियाद निकली 
उन किस्से कहानियों की याद गुज़री
तेरे अक्स को महफूज रखें हम एक कोने में
जैसे दिल से धीमे धीमे धड़कन निकली

©navroop singh #Fariyaad
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navroop singh

"वक्त के दरमियान न जाने कितने फलसफे हैं
तेरी मेरी चाहतों के ना जाने कितने किस्से हैं 
रहेगी सदा तेरी यादें मेरे संग वो खुशबू बन कर
जैसे भंवरे से मंडराते हम उस बगीचे घूमकर..

इन सुरमई रातों के पहर जितने काले है
काजल से उन नयन में विष के प्यालें है
जी करता है झूम उठूं इस मदहोश समय में
तुम क्या जानो मैंने यह दिन कैसे निकाले हैं..

वक्त के दरमियान कितने ख्वाब सजाने हैं
कुछ पूरे तो कुछ अधूरे रह जाने है 
जिंदगी का यही फलसफा है देखो यारो
यह लम्हे तो बस पल में बीत जाने है..

छोटी सी है जिंदगी जीलो किसी अपने संग
ना जाने वो रिश्ते कहां छूट जाने है 
अपना सफर तो बस यही तक था ओ साथी
चल अब चलें इस सफर में कई अफसाने है.. "

©navroop singh
  #safar
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navroop singh

'अंजाने रस्तों पे सफर आसान ना था,
कोई हमसफर मिला पर वोह अपना ना था,
कहता है जी ले अपनी ज़िन्दगी कुछ लम्हों की,
बस कम्बखत वक़्त ना था,
पाना चाहा उसे पर ना समझा वोह,
लौट आया एक दिन फिर वोह
पर इतेफ़कान वक़्त कम था,
अंजाना सा सफर बस 
वोह हमसफर जो अपना सा था..'

©navroop singh
  #humsafar💖

humsafar💖 #Shayari

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navroop singh

'अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें

ढूँढ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती
ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें

तू ख़ुदा है न मेरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा
दोनों इंसाँ हैं तो क्यों इतने हिजाबों में मिलें

ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो
नशा बड़ता है शरबें जो शराबों में मिलें

आज हम दार पे खेंचे गये जिन बातों पर
क्या अजब कल वो ज़माने को निसाबों में मिलें

अब न वो मैं हूँ न तु है न वो माज़ी है “फ़राज़”
जैसे दो शख़्स तमन्ना के सराबों में मिलें.."     

 #AhmadFaraz

©navroop singh #faraz
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navroop singh

'यूँ ही बेसबब न फिरा करो, कोई शाम घर में भी रहा करो 
वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है, उसे चुपके चुपके पढ़ा करो 

कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से 
ये नये मिज़ाज का शहर है, ज़रा फ़ासले से मिला करो 

अभी राह में कई मोड़ हैं, कोई आयेगा कोई जायेगा 
तुम्हें जिसने दिल से भुला दिया, उसे भूलने की दुआ करो 

मुझे इश्तहार सी लगती हैं, ये मोहब्बतों की कहानियाँ 
जो कहा नहीं वो सुना करो, जो सुना नहीं वो कहा करो 

कभी हुस्न-ए-पर्दानशीं भी हो ज़रा आशिक़ाना लिबास में 
जो मैं बन-सँवर के कहीं चलूँ, मेरे साथ तुम भी चला करो 

ये ख़िज़ा की ज़र्द-सी शाम में, जो उदास पेड़ के पास है 
ये तुम्हारे घर की बहार है, इसे आंसुओं से हरा करो 

नहीं बेहिजाब वो चाँद सा कि नज़र का कोई असर नहीं 
उसे इतनी गर्मी-ए-शौक़ से बड़ी देर तक न तका करो..

©navroop singh
  #EkShaamUsHaseenKeNaam
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navroop singh

"ज़िन्दगी का फलसफा तो देखो यारों
कभी धूप कभी छाओं तो कभी पानी है
दो पल की यह ज़िन्दगी पल में मिट जाएगी
बोल दो शब्द प्यार के तुम भी ओ सनम
जाने जीवन की डोर कब कट जानी है 

सांझ ढले इस जल में आग लग जानी है
गुनगुनाते है जो धुन हम अक्सर इन शामों को
रात की चमकती चाँदनी में धुल जानी है
जीवन का यही परम सत्य है ओ सखा
शमशान मैं बैठा तेरा शंकर ही औघर दानी है

बहती है गँगा की धारा धरातल पे जहाँ
एक दिन ज़िन्दगी वही बह जानी है
जीवन की यही अमर कथा है यारों
वो भूली दास्तान एक दिन फिर याद आनी है..."

©navroop singh
  #Kashi
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navroop singh

वक़्त के पन्नो पे जाने कितने अफ़साने लिखे हैं
कुछ गमहीन तो कुछ सुरीले तराने लिखे हैं 
बहती फ़िज़ाओं की कहानी है यह ज़िंदगी 
इनमें हमसफ़र कई तो कई हमसाये लिखे हैं 

किस किस की कहानी सुनाये आपको 
इन कोरे काग़ज़ों पे अनगिनत ख़त लिखे हैं 
ज़िंदगी सफ़र है बस चलती जा रही है 
कुछ मिल जाने को हैं कुछ बिछड़ जाने को हैं 

आज फिर एक नई डगर एक नया सवेरा है
इन रास्तों पे ना जाने कौन मिल जाए 
एक साथी एक हमसफर जो बस मेरा है
वक़्त के सिलवटों पे बड़े अफ़साने लिखे हैं 
कुछ नए तो कुछ पुराने लिखे हैं

©navroop singh #Humsafar
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navroop singh

"जीवन का दास्ताँ सुनो तो जाने
किसी को अपना मानो तो माने,
होते है साथी कई इस सफ़र में
उन में से कोई हमसफ़र चुनो तो जाने,

किस ने कहा की रह में साथी नहीं होते,
कौन कहता है गुलाब में काँटे नहीं होते,
होते हैं साथी कई जीवन के सफ़र में
उन्मे से अपने प्यार को पहचानो तो जाने..

कुछ लम्हों का कहानी है यह ज़िंदगी
इनसे दो पल अपने लिए चुरा सको तो जाने
यह मोहब्बत नहीं आसान डूब के जाना हैं
नदी के उस किनारे अपना आशियाना है

मिले लोग हजार पर तुमसा कोई नहीं 
साथ नहीं तो क्या तेरी याद में बीते यह पल
देखे अफसाने कई पर कोई अपना तो माने
जीते हैं जिसे हम रोज़ वो नादान तो यह भी ना जाने.."

©navroop singh #Lamhe
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