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A.B shykh

poet faraz ahmad fraz

#MainAgarKahu

poet faraz ahmad fraz #MainAgarKahu

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Zee writes

faraz Ahmed faraz#shayari

faraz Ahmed faraz#Shayari

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Adnan Ahmad (Adn)

سنا ہے اس کو بھی ہے شعر و شاعری سے شغف
تو ہم بھی معجزے اپنے ہنر کے دیکھتے ہیں

احمد فراز Faraz Ahmad Faraz

Faraz Ahmad Faraz #Shayari

5 Love

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RSM Official

chalo voh ishq nahi  chahane ki aadat hai
FIR kya Karen hamen ek dusre ki aadat hai
Tu apni shisha gari ka hunar na kar jaea

may Ayena hoo mujhe tutane ki aadat hai

main kya kahun ki mujhe sabra kyon Nahin aata
main kya Karun ki tujhe dekhne ki aadat hai

©RSM Official
  Ahmad Faraz Shayari #Nojoto #rsm

Ahmad Faraz Shayari #rsm

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Mannat

Faraz Ahmad Faraz

#Dreams

Faraz Ahmad Faraz #Dreams #शायरी

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Ali Khan

Ahmad faraz.

Ahmad faraz. #شاعری

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Ahmad Faraz

 Ahmad faraz

Ahmad faraz #nojotophoto

3 Love

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Ati

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं
सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं
सुना है रब्त है उसको ख़राब हालों से
सो अपने आपको बर्बाद करके देखते हैं
सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं
ये बात है तो चलो बात करके देखते हैं
सुना है रात उसे चाँद तकता रहता है
सितारे बामे फ़लक से उतर के देखते हैं
सुना है दिन को उसे तितलियाँ सताती हैं
सुना है रात को जुगनू ठहर के देखते हैं
सुना है उसके लबों से गुलाब जलते हैं
सो हम बहार पे इन्ज़ाम धर के देखते हैं
सुना है उसके बदन की तराश ऐसी है
कि फूल अपनी क़बाएं कुतर के देखते है
रुके तो गर्दिशे उसका तवाफ़ करती हैं
चले तो उसको ज़माने ठहर के देखते हैं #Ahmad
#Faraz
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Hamid Nasir

Ahmad faraz

Ahmad faraz

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Ati

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं
सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं
सुना है रब्त है उसको ख़राब हालों से
सो अपने आपको बर्बाद करके देखते हैं #Ahmad #Faraz
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Kamran Khan Orakzaii

Ahmad faraz

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Afd27

Ahmad faraz

Ahmad faraz #شاعری

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Vishal Kasediya

Ahmad Faraz

Ahmad Faraz

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Faraz Ahmad

 Faraz Ahmad

Faraz Ahmad

2 Love

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Satyendra vermaji

Ahmad faraz

Ahmad faraz

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Haroon Adil

faraz ahmad

faraz ahmad

27 Views

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Shaikh Ameer

Suna Hai Log Use Aankh Bhar Ke Dekhte Hai 

So Uske Shaher Me Kuch Din Thaher Ke Dekhte Hai

©Shaikh Ameer Ahmad Faraz

Ahmad Faraz

16 Love

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Muzaffar Ali official (A+A)

Ahmad faraz

Ahmad faraz #शायरी

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Pesar Asif

ahmad faraz

ahmad faraz

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Ahmad Faraz

 Ahmad faraz

4 Love

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Ahmad Faraz

 Ahmad faraz

Ahmad faraz #nojotophoto

4 Love

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Hamid Rehan

Ahmad Faraz

Ahmad Faraz

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Ahmad Faraz

 Ahmad faraz

Ahmad faraz #nojotophoto

0 Love

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Ch Ahmad

اوجالا بنائے گا دولہا AHMAD FARAZ

AHMAD FARAZ

4 Love

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Kamran Khan Orakzaii

Ahmad faraz

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CaRry oN ZiNDAGii

#Ahmad Faraz

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Urdu Revisited

Ahmad Faraz

Ahmad Faraz

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Satyendra vermaji

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं 
सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं

सुना है रब्त है उसको ख़राब हालों से 
सो अपने आप को बरबाद कर के देखते हैं 

सुना है दर्द की गाहक है चश्म-ए-नाज़ उसकी 
सो हम भी उसकी गली से गुज़र के देखते हैं 

सुना है उसको भी है शेर-ओ-शायरी से शगफ़ 
सो हम भी मोजज़े अपने हुनर के देखते हैं 

सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं 
ये बात है तो चलो बात कर के देखते हैं 

सुना है रात उसे चाँद तकता रहता है 
सितारे बाम-ए-फ़लक से उतर के देखते हैं 

सुना है हश्र हैं उसकी ग़ज़ाल सी आँखें 
सुना है उस को हिरन दश्त भर के देखते हैं 

सुना है दिन को उसे तितलियाँ सताती हैं 
सुना है रात को जुगनू ठहर के देखते हैं 

सुना है रात से बढ़ कर हैं काकुलें उसकी 
सुना है शाम को साये गुज़र के देखते हैं 

सुना है उसकी सियाह चश्मगी क़यामत है 
सो उसको सुरमाफ़रोश आह भर के देखते हैं 

सुना है उसके लबों से गुलाब जलते हैं 
सो हम बहार पर इल्ज़ाम धर के देखते हैं 

सुना है आईना तमसाल है जबीं उसकी 
जो सादा दिल हैं उसे बन सँवर के देखते हैं 

सुना है जब से हमाइल हैं उसकी गर्दन में 
मिज़ाज और ही लाल-ओ-गौहर के देखते हैं 

सुना है चश्म-ए-तसव्वुर से दश्त-ए-इम्काँ में 
पलंग ज़ाविए उसकी कमर के देखते हैं 

सुना है उसके बदन के तराश ऐसे हैं 
के फूल अपनी क़बायेँ कतर के देखते हैं 

वो सर-ओ-कद है मगर बे-गुल-ए-मुराद नहीं 
के उस शजर पे शगूफ़े समर के देखते हैं 

बस एक निगाह से लुटता है क़ाफ़िला दिल का 
सो रहर्वान-ए-तमन्ना भी डर के देखते हैं 

सुना है उसके शबिस्तान से मुत्तसिल है बहिश्त 
मकीन उधर के भी जलवे इधर के देखते हैं 

रुके तो गर्दिशें उसका तवाफ़ करती हैं 
चले तो उसको ज़माने ठहर के देखते हैं 

किसे नसीब के बे-पैरहन उसे देखे 
कभी-कभी दर-ओ-दीवार घर के देखते हैं

कहानियाँ हीं सही सब मुबालग़े ही सही 
अगर वो ख़्वाब है ताबीर कर के देखते हैं 

अब उसके शहर में ठहरें कि कूच कर जायेँ 
फ़राज़ आओ सितारे सफ़र के देखते हैं 

अभी कुछ और करिश्मे ग़ज़ल के देखते हैं
फ़राज़ अब ज़रा लहजा बदल के देखते हैं 

जुदाइयां तो मुक़द्दर हैं फिर भी जाने सफ़र
कुछ और दूर ज़रा साथ चलके देखते हैं 

रह-ए-वफ़ा में हरीफ़-ए-खुराम कोई तो हो
सो अपने आप से आगे निकल के देखते हैं 

तू सामने है तो फिर क्यों यकीं नहीं आता
यह बार बार जो आँखों को मल के देखते हैं 

ये कौन लोग हैं मौजूद तेरी महफिल में
जो लालचों से तुझे, मुझे जल के देखते हैं 

यह कुर्ब क्या है कि यकजाँ हुए न दूर रहे
हज़ार इक ही कालिब में ढल के देखते हैं 

न तुझको मात हुई न मुझको मात हुई
सो अबके दोनों ही चालें बदल के देखते हैं 

यह कौन है सर-ए-साहिल कि डूबने वाले
समन्दरों की तहों से उछल के देखते हैं 

अभी तलक तो न कुंदन हुए न राख हुए
हम अपनी आग में हर रोज़ जल के देखते हैं

बहुत दिनों से नहीं है कुछ उसकी ख़ैर ख़बर
चलो फ़राज़ को ऐ यार चल के देखते हैं Ahmad Faraz

Ahmad Faraz

4 Love

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