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Paramjeet Kaur

कथा वाचक भी संत रामपाल जी महाराज जी का ज्ञान समझ कर शरण ग्रहण कर रहे है आप भी ज्ञान को समझो

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N S Yadav GoldMine

#Thinking {Bolo Ji Radhey Radhey} है वासुदेव, हैं नारायण, जय श्री हरि आप किसी भी माध्यम से मुझे बता दीजिए, मुझे में, क्या कमियां हैं, मुझस

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White {Bolo Ji Radhey Radhey}
है वासुदेव, हैं नारायण, जय श्री हरि
आप किसी भी माध्यम से मुझे बता 
दीजिए, मुझे में, क्या कमियां हैं, 
मुझसे क्या अपराध बन गये हैं, या 
बन रहे हैं, मुझे आपकी ओर, आपकी 
सरनागति में ही रहना हैं, वो क्या 
बाधा है, जो मुझसे मेरे को निकाल 
कर निर्मल बनने में सबसे बड़ी रुकावट 
हैं, हैं नाथ मे आपकी शरण में हूँ, 
हैं राधिका जू
तेरी कृपा का भरोसा भारी।।
जय श्री राधेकृष्ण जी!!

©N S Yadav GoldMine #Thinking {Bolo Ji Radhey Radhey}
है वासुदेव, हैं नारायण, जय श्री हरि
आप किसी भी माध्यम से मुझे बता 
दीजिए, मुझे में, क्या कमियां हैं, 
मुझस

N S Yadav GoldMine

#snow {Bolo Ji Radhey Radhey} मन भवरा बन दौड़ा जाए, श्री हरि, श्री कृष्ण, श्री राम। संभालो मुझ अधम को, में तो श्री हरि, तुमरी शरण।। जय श्री र

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Unsplash {Bolo Ji Radhey Radhey}
मन भवरा बन दौड़ा जाए,
श्री हरि, श्री कृष्ण, श्री राम।
संभालो मुझ अधम को,
में तो श्री हरि, तुमरी शरण।।
जय श्री राधेकृष्ण जी!!
N S Yadav GoldMine.

©N S Yadav GoldMine #snow {Bolo Ji Radhey Radhey}
मन भवरा बन दौड़ा जाए,
श्री हरि, श्री कृष्ण, श्री राम।
संभालो मुझ अधम को,
में तो श्री हरि, तुमरी शरण।।
जय श्री र

theABHAYSINGH_BIPIN

#good_night मन अपनी धुन में क्यूँ भागे है, चिंतन में मन क्यूँ लागे है? छेड़ रण अब ख़ुद के मन से, भजन कीर्तन कैसे न रागे है? जग झूठे सुख म

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White मन अपनी धुन में क्यूँ भागे है,
चिंतन में मन क्यूँ लागे है?
छेड़ रण अब ख़ुद के मन से,
भजन कीर्तन कैसे न रागे है?

जग झूठे सुख में अभियोग है,
जो लिप्त हुआ, सुख न पाया है।
जब अंतःमन प्रभु पुकारा है,
हर हृदय ने प्रभु को पाया है।

शरण में सर्वत्र न्यौछार दिया,
प्रभु ने उस जीवन को तार दिया।
जो नित ध्यान प्रभु में धारिता,
उसके जीवन का सार किया।

जीवन के सारे सुख निरर्थक हैं,
बिन प्रभु के कुछ भी सार्थक नहीं है।
जीवन का कोई राह दिखे न,
तो फिर प्रभु शरण ही उपाय है।

©theABHAYSINGH_BIPIN #good_night 

मन अपनी धुन में क्यूँ भागे है,
चिंतन में मन क्यूँ लागे है?
छेड़ रण अब ख़ुद के मन से,
भजन कीर्तन कैसे न रागे है?

जग झूठे सुख म
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