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Knazimh
हम किस को बताए,अपना हाल-ए-दिल, यहां तो नाजिम सभी कबूतर बैठे है।। ©Knazimh #दर्द #दिल #बेवफाई #समाज #दुनिया #khnazim #knazimh शायरी हिंदी
Deependra Dubey
White हमें राहों में उनकी तलाश थी जो हमारी राहों में कांटो की जगह फूल बिछा सके। ज़िन्दगी को उन्हीं राहों में खुशी से चला सके। ज़िंदगी उनसे कुछ नहीं मांगती बस ज़िंदगी का दो पल, ख़ुशी बिता सके। ©Deependra Dubey #Thinking शायरी शायरी शायरी
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read moreParasram Arora
White ज़ब एक दिन घर मे आग लगी तो एक समाज सुधारक ने आकर आग बुझाने मे सहायता का आश्वासन दिया लेकिन वो स्नाजसेवी उस लगी आग को बुझाने के बजाय उसे हवा देकर आग को और भी बड़ा गया था ©Parasram Arora आग और समाज सुधारक
आग और समाज सुधारक
read moreSangam Pipe Line Wala
अनुजा तुझे मेरी उम्र लग जाए देखे जो तू सपने वो सच हो जाए रब ना करे तेरी जिंदगी में ग़म आए तू खुशियों में खेलती रहे हरपल सदा तेरे जन्मदिन पर चाँद तारे जमींपर आए दुआ करता रहूँगा जबतक मेरी सांस चले तेरा मेरा है जो भी रिश्ता मुक्कुमल हो जाए... ©Sangam Pipe Line Wala शायरी attitude शेरो शायरी शायरी लव शायरी दोस्ती शायरी
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read moreRoshan shayar
तुझसे बिछड़ कर मुलाकात तो फिर भी हो जाती है तू आज भी मेरे ख्यालों में आती है ©Roshan Shayar शायरी लव शायरी दोस्ती शायरी शायरी दर्द
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read moreपूर्वार्थ
White आधुनिक समाज का सच आज के इस आधुनिक युग में, देखो कैसा हाल हुआ, रिश्तों का मोल घटा, हर रिश्ता बस सवाल हुआ। दिल के बंधन अब कमजोर, स्वार्थ की दीवारें ऊँची, भावनाएँ रह गईं पीछे, आगे दौड़ी इच्छाएँ दूषित। रिश्ते अब खेल बन गए, बस पल भर की बात, जहाँ प्यार की गहराई थी, वहाँ दिखावा है रात। दिखावे की इस दुनिया में, सच्चाई गुमनाम हुई, दिलों के जुड़ने की जगह, बस सौदे की बात हुई। शादियाँ अब तमाशा हैं, बस एक आयोजन भव्य, जहाँ सादगी थी पहले, अब दिखावे का पर्व। सात फेरे, सात वचन, अब रस्में बन गईं, जहाँ प्रेम था कभी गहरा, वहाँ रिवाजें सिमट गईं। तलाक अब मजाक है, बंधन को तोड़ना आसान, जहाँ समझौता था पहले, अब बस अभिमान। साथ चलने की जगह, अलग राहें चुन ली जातीं, प्यार की जगह नफरत, हर रिश्ते को खा जाती। प्रोग्रेसिव इस समाज का, ये कैसा सच है भाई, जहाँ रिश्तों की कीमत नहीं, बस स्वार्थ की भरपाई। कहाँ गए वो दिन पुराने, जहाँ प्रेम था आधार, आज तो सब बन गया है, बस एक व्यापार। सोचो, समझो, और बदलो, रिश्तों को मोल दो, जहाँ दिलों की बातें हों, वहाँ मत स्वार्थ जोड़ो। इस आधुनिकता में कहीं, रिश्तों का सम्मान न खो दो, वरना ये समाज एक दिन, बस खाली नाम रह जाएगा। ©पूर्वार्थ #समाज
Rajesh Arora
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