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Bheem Bheemshankar
दिल मे मेरे बसने वाला किसी दोस्त का प्यार चाहिए ना दुआ💖 ना खुदा ना हाथों मे कोई तलवार चाहिए💞 मुसीबत मे किसी एक प्यारे साथी का हाथों मे हाथ चाहिए कहूँ ना मै कुछ💯 समझ जाए वो सब कुछ दिल मे उस के अपने लिए ऐसे जज़्बात चाहिए💥 उस दोस्त के चोट लगने पर हम भी दो आँसू बहाने का हक़ रखें💢 और हमारे उन आँसुओं को पोंछने वाला उसी का रूमाल चाहिए मैं तो तैयार हूँ💫 हर तूफान को तैर कर पार करने💔 ©Bheem Bheemshankar #DryTree दिल मे मेरे बसने वाला किसी दोस्त का प्यार चाहिए ना दुआ ना खुदा ना हाथों मे कोई तलवार चाहिए मुसीबत मे किसी एक प्यारे साथी का हा
#DryTree दिल मे मेरे बसने वाला किसी दोस्त का प्यार चाहिए ना दुआ ना खुदा ना हाथों मे कोई तलवार चाहिए मुसीबत मे किसी एक प्यारे साथी का हा
read morePraveen Jain "पल्लव"
पल्लव की डायरी चिंतवन और मनन की धारा विस्फोटक है नैतिकबल कमजोर हो रहा है जब से सुख सुविधाओं ने आवरण विकास का पहना खोखला समाज परिवार हो रहा है लोभ लालच हक खा गया अपनो का तूफान घरो को उजाड़ रहा है प्रवीण जैन पल्लव ©Praveen Jain "पल्लव" #AloneInCity तूफान घरो को उजाड़ रहा है
#AloneInCity तूफान घरो को उजाड़ रहा है
read moreVijay Vidrohi
a-person-standing-on-a-beach-at-sunset तूफानों से लड़ना सिखा लहरें क्या बिगड़ेंगी। हम पले बड़े है संघर्ष के थपेड़ों में उनका मामूली कहरें क्या बिगड़ेंगी। ©Vijay Vidrohi #तूफानों_से_लड़ना_सीखा sad shayari sad motivational shayari in english motivational quotes in marathi motivation shayari moti
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read moretheABHAYSINGH_BIPIN
White वफ़ा को ढूँढ़ना बेमानी सा लगता, दिल का ये ख्वाब पुराना सा लगता। खुद को संभालूं या शिकवे लिखूं, हर दर्द अब एक फसाना सा लगता। इश्क़ सिर्फ कहानी सा लगता है, ग़म अब निशानी सा लगता है। कौन चाहता है ज़ख्मों को भरना, दर्द-ए-दिल अब रूहानी सा लगता है। आँखों में न कोई ख्वाब अब बाकी है, दिल का हर कोना खाली सा लगता है। जिनसे उम्मीदें थीं, वो पराये निकले यारो, ज़िंदगी भी अब तूफानी सा लगता है। हर राह में बस सन्नाटा सा है, हर कदम पर धोखे का साया सा है। जिनसे दिल लगाया, वही दूर निकले, अब हर रिश्ता अफ़साना सा है। इश्क़ अब सिरफिरा सा खेल लगता है, हर कदम पर ये जाल सा बिछता है। फिर भी दिल क्यों लौट जाता है वहीं, जहाँ हर दर्द अब रूहानी सा लगता है। ©theABHAYSINGH_BIPIN #sad_shayari वफ़ा को ढूँढ़ना बेमानी सा लगता, दिल का ये ख्वाब पुराना सा लगता। खुद को संभालूं या शिकवे लिखूं, हर दर्द अब एक फसाना सा लगता।
#sad_shayari वफ़ा को ढूँढ़ना बेमानी सा लगता, दिल का ये ख्वाब पुराना सा लगता। खुद को संभालूं या शिकवे लिखूं, हर दर्द अब एक फसाना सा लगता।
read moreबेजुबान शायर shivkumar
Unsplash // खुद को निखार लेना // छोटे छोटे पैर तो कभी चलना सीख ही जाते हैं मंजिल दूर है पर वो धीरे धीरे बढ़ जाते हैं हम अपने ही दम से " खुद को निखार लेना " जानते है तप कर आग में हम सोना बन ही कर आते हैं मजबूरी जब ,अपने सर पे जिम्मेदारी आई तो समझ आ आती है इस जिंदगी की दौड़ भी यु बढ़ती ही जाती है वो अनाड़ी भी एक खिलाड़ी बन जाते हैं जब गिर-गिर कर और ठोकर पर ठोकर यु खाते हैं बारिश में भीग कर कड़ी धूप में यु जल कर भी वो बढ़ जाते हैं न भाग कर ,अपने मुश्किलों से लड़ कर वो जीत कर दिखाते हैं वो भी अपने वक्त के साथ साथ चलना भी सीख आता है उसे अपने मेहनत का फल लेना भी आता है अपने इन हाथों की लकीरों को भी बदल देते हैं मेहनत करने वाले तूफान का रुख भी यु मोड़ देते हैं ये दुनिया रोकती ही रहेगी मगर तुम चलते ही रहना न सुनना किसी की बात को तुम अपनी मंजिल को ही देखना कर हौसला बुलंद तू , तुमने तो इतिहास रचा कदम बड़ा हंसने वालो को एक दिन चुप करा देना , तुम इतिहास बना देना ©बेजुबान शायर shivkumar छोटे छोटे पैर तो कभी चलना सीख ही जाते हैं मंजिल दूर है पर वो धीरे धीरे बढ़ जाते हैं हम अपने ही दम से " खुद को निखार लेना " जानते है तप कर आग
छोटे छोटे पैर तो कभी चलना सीख ही जाते हैं मंजिल दूर है पर वो धीरे धीरे बढ़ जाते हैं हम अपने ही दम से " खुद को निखार लेना " जानते है तप कर आग
read moreAnant Nag Chandan
बाँधे जाते इंसान, कभी तूफान न बाँधे जाते हैं, काया जरूर बाँधी जाती, बाँधे न इरादे जाते हैं। —गोपालप्रसाद व्यास ©Anant Nag Chandan बाँधे जाते इंसान, कभी तूफान न बाँधे जाते हैं, काया जरूर बाँधी जाती, बाँधे न इरादे जाते हैं। —गोपालप्रसाद व्यास
बाँधे जाते इंसान, कभी तूफान न बाँधे जाते हैं, काया जरूर बाँधी जाती, बाँधे न इरादे जाते हैं। —गोपालप्रसाद व्यास
read moreबेजुबान शायर shivkumar
//सुकुन आँचल का// एक बार नही आपको मैं सौ बार लिखूंगा मांँ तुझे ही अपने जीवन का वो सार लिखूंगा बाबू बाबू कह कर जब मुझें यु पालना में झुलाती है स्वर्ग के अप्सरा भी यु मंद मंद कर वो मुस्कुराती है मां की गोद में आकर भगवान भी यु बच्चे बन जाते हैं मां की ममता का सुख ईश्वर भी खूब मजा उठाते हैं ईश्वर ने खुद को बनाया है एक ख्याल उनके मन में आया है अपने जैसा ही हर किसी को खुद को पहुंचाया है जिसका नाम माँ बतलाया है समंदर से गहरी ममता का होती है उठते तूफान को शांत वो करती है न छोटा न बड़ा इस भेदभाव में मांँ कहाँ पड़ती है मीठे सपनो को अपने बच्चे के लिए मांँ संजोती है वक्त बदल जाए हालात बदल जाए पर मांँ की ममता को कोई न बदल पाए है आज तक उसकी आवाज में ऐसा जादू होता है की किसी के मुर्झाया चेहरा भी यु खिल जाता है जब मांँ की आवाज कानों में आती है सारी दुनिया से लड़ने की हिम्मत दे जाती है घर से निकल कर सर को झुका देते है मांँ का आशीर्वाद लेकर बिगड़े काम भी बना देते हैं बचपन में हो या हो बड़े आज भी मांँ के उस आंँचल में पड़े रहते है मुझे तो सुकून आँचल का मिलता है मांँ तेरी उस गोद में आ कर धनंजय शुक्ला✍ ©बेजुबान शायर shivkumar //सुकुन आँचल का// एक बार नही आपको मैं सौ बार लिखूंगा मांँ तुझे ही अपने जीवन का वो सार लिखूंगा बाबू बाबू कह कर जब मुझें यु पालना में झुलाती
//सुकुन आँचल का// एक बार नही आपको मैं सौ बार लिखूंगा मांँ तुझे ही अपने जीवन का वो सार लिखूंगा बाबू बाबू कह कर जब मुझें यु पालना में झुलाती
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