Find the Latest Status about लब्जो मे कहा from top creators only on Nojoto App. Also find trending photos & videos about, लब्जो मे कहा.
Shashi Bhushan Mishra
सही-सही दो टूक कहा, दर्दे दिल को हूक कहा, जली दूध से जुबां हमारी, पियो छाछ भी फूंक कहा, ज़ुल्म देखकर भी चुप बैठे, अभिभावक को मूक कहा, कोयल की मीठी बोली पर, पीड़ा को भी कूक कहा, सीख नहीं पाए अतीत से, ग़लती को भी चूक कहा, इन्सां की बदहाली देखी, बक्से को संदूक कहा, 'गुंजन' हुई मुहब्बत अंधी, गदहे को माशूक़ कहा, -शशि भूषण मिश्र 'गुंजन' प्रयागराज उ०प्र० ©Shashi Bhushan Mishra #सही-सही दो टूक कहा#
#सही-सही दो टूक कहा#
read moreUrmeela Raikwar (parihar)
White ऊपर आकाश, निचे धरती, बीच मैं, मै और मैरा प्रेम, कहां ले जाऊँ इसे wrote by Urmee ki Diary ©Urmeela Raikwar (parihar) #sad_quotes कहा ले जाऊँ?
#sad_quotes कहा ले जाऊँ?
read moreRAMLALIT NIRALA
एक माँ के दो लाल दोनो का प्यार निराला है दूनिया के रित अजिब है यारो जब हो रहा बटवारा है। मन मोह के जाल में फंस के आखो पे पट्टी छाई है बचपन कि बाते भुल गया अब देखो घर ये कैसी आई है ©RAMLALIT NIRALA भाई भाई मे बटवारा
भाई भाई मे बटवारा
read moreRAVI PRAKASH
White सच कहा था किसी ने तन्हाई में जीना सीख लो मोहब्बत जितनी भी सच्ची हो साथ छोड़ ही जाती है ©RAVI PRAKASH #sad_quotes सच कहा
#sad_quotes सच कहा
read moreParasram Arora
White मेरी यादो मे तुम बसें हो पर अफ़सोस नाम तुम्हारा याद नहीं अगली बार ज़ब तुम मिलो तो अपना नाम ज़ोर से बोल कर मुझसे गले मिलना ©Parasram Arora मेरी यादो मे तुम
मेरी यादो मे तुम
read moreParasram Arora
White तेरी पायल की खनक से मै गहरी नींद मे भी जाग जाता हू आँखे मसल कर चारो तरफ तुझे ढूंढ़ता हू पर न जाने तुम म होती हो कहा पथरो के इस शहर मे आकर मै भी एक पत्थर बन गया हू अब तेरे मासूम स्पर्श से भी मेरे जज्बात कंपते हैँ कहा? ©Parasram Arora पथरो के शहर मे
पथरो के शहर मे
read moreParasram Arora
White बाज़ार की चहल पहल देखने मे दिन ग़ुजर जाता हैँ मेरा किसी तरह मंदिरो मे जाकर माथा टेकने की मेरे पास फुरसत हैँ कहा ? ये मेहरबानी हैँ उस पर्वरदिगार की कि उसने. मुझे जीने का अवसर नवाज़ा हैँ वरना इस तगदिल दुनिया मे खुदक्शी करने की जगह बची हैँ कहा? ©Parasram Arora जगह बची हैँ कहा?
जगह बची हैँ कहा?
read moreParasram Arora
White प्रेम के अभाव मे जीवन मारुस्थलीय जीवन की तरह हो जाता है.. ऐसे खुशक जीवन मे दूर दूर तक कोई जल स्त्रोत या कोई झरना नहीं दिखता. और न ही कही धूप मे बचने के लिए किसी वृक्ष का साया ही मिल पाता है ©Parasram Arora प्रेम के अभाव मे
प्रेम के अभाव मे
read more