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बादल आकार बरसते रहे हम बूंद बूंद को तरसते रहे। लो

बादल आकार बरसते रहे हम बूंद बूंद को तरसते रहे। 
लोगों की प्यास बुझती रही मेरी प्यास कांटे बनकर चुभती रही।

©Karam Chand
  #doori