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शीर्षक- नकाबे चेहरा वाली, पेश जो थी हमको सूरत ----

शीर्षक- नकाबे चेहरा वाली, पेश जो थी हमको सूरत
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नकाबे चेहरा वाली, पेश जो की थी हमको सूरत।
हमको तो शक था पहले, नहीं है असली यह सूरत।।
नकाबे चेहरा वाली ----------------------------------।।

कैसे तुमने समझ लिया, हमको तुमसे कम विद्वान।
हमने पढ़ाये है तेरे जैसे, चेहरे यहाँ कल को बहुत।।
नकाबे चेहरा वाली ----------------------------------।।

देखकर तेरी पेशगी, लगी तू हमको बहुत बेदर्द।
नहीं तू प्यार के काबिल, नहीं तू प्यार की सूरत।।
नकाबे चेहरा वाली ----------------------------------।।

हमने तो सोचा नहीं था, होगी तू इतनी अहमी।
नहीं तुझमें तहजीब, नहीं है तेरी हमको जरूरत।।
नकाबे चेहरा वाली ----------------------------------।।

तू ही करेगी हमारी गुलामी, मैं नहीं करता गुलामी।
मुझमें नहीं है कोई कमी, बदल लें तू अपनी सूरत।।
नकाबे चेहरा वाली ----------------------------------।।

लूटना तू चाहती है हमको, अपने पर्दे की ओट से।
बतायेंगे तेरी हकीकत तो, तब क्या होगी तेरी सूरत।।
नकाबे चेहरा वाली ----------------------------------।।




शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

©Gurudeen Verma #साहित्यकार
शीर्षक- नकाबे चेहरा वाली, पेश जो थी हमको सूरत
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नकाबे चेहरा वाली, पेश जो की थी हमको सूरत।
हमको तो शक था पहले, नहीं है असली यह सूरत।।
नकाबे चेहरा वाली ----------------------------------।।

कैसे तुमने समझ लिया, हमको तुमसे कम विद्वान।
हमने पढ़ाये है तेरे जैसे, चेहरे यहाँ कल को बहुत।।
नकाबे चेहरा वाली ----------------------------------।।

देखकर तेरी पेशगी, लगी तू हमको बहुत बेदर्द।
नहीं तू प्यार के काबिल, नहीं तू प्यार की सूरत।।
नकाबे चेहरा वाली ----------------------------------।।

हमने तो सोचा नहीं था, होगी तू इतनी अहमी।
नहीं तुझमें तहजीब, नहीं है तेरी हमको जरूरत।।
नकाबे चेहरा वाली ----------------------------------।।

तू ही करेगी हमारी गुलामी, मैं नहीं करता गुलामी।
मुझमें नहीं है कोई कमी, बदल लें तू अपनी सूरत।।
नकाबे चेहरा वाली ----------------------------------।।

लूटना तू चाहती है हमको, अपने पर्दे की ओट से।
बतायेंगे तेरी हकीकत तो, तब क्या होगी तेरी सूरत।।
नकाबे चेहरा वाली ----------------------------------।।




शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

©Gurudeen Verma #साहित्यकार