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*रहिमन पानी राखिए,बिन पानी सब सून। पानी गए न उबरे,

*रहिमन पानी राखिए,बिन पानी सब सून।
पानी गए न उबरे,मोती मानुष चून।*

जिस तरह चमक के बिना मोती का महत्व नहीं,पानी
के बिना चूना या अन्न का महत्व नहीं ठीक उसी प्रकार
बिना विनम्रता और सम्मान के मनुष्य का कोई महत्व
  होता है। अतः हर हाल में इसे बनाया रखना चहिए।

©नागेंद्र किशोर सिंह ( मोतिहारी, बिहार।)
  शिक्षा