गंगा की अविरल निर्मलता और हरि-हरा का धाम हूँ मैं र

गंगा की अविरल निर्मलता
और हरि-हरा का धाम हूँ मैं
राम-लखन के झूले का
हिलता डुलता विश्राम हूँ मैं
रभ्या के तप की भूमि हूँ
भावों का भावावेश हूँ मैं
ऋषिकेश हूँ मैं, ऋषिकेश हूँ मैं
ऋषिकेश हूँ मैं, ऋषिकेश हूँ मैं

योग हूँ मैं, आरोग्य हूँ मैं
जप, पूजा हूँ और ध्यान हूँ मैं
सीधा, सुंदर और सहज, सरल
गंगा आरती का गान हूँ मैं
जगहित प्रभु ने विषपान किया
शिव शंकर का संदेश हूँ मैं
ऋषिकेश हूँ मैं, ऋषिकेश हूँ मैं
ऋषिकेश हूँ मैं, ऋषिकेश हूँ मैं

©Manaswin Manu
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