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हर किसी को प्यार से अपना बनाना सीखिये ज़िंदगी मे मु

हर किसी को प्यार से अपना बनाना सीखिये
ज़िंदगी मे मुस्कुरा कर ग़म भुलाना सीखिये।

चार दिन की ज़िंदगी मे क्यों किसी से रूठना
प्यार है नेमत ख़ुदा की सर झुकाना सीखिये।

हार कर यो बैठ जाना ज़िंदगी तो ये नहीं
दौर कैसा आ भी जाये  मुस्कुराना सीखिये।

प्यार से जो बोलता है जीत लेता वो जहाँ
नफरतों की आंधियों से घर बचाना सीखिये।

गीत गूंजेंगे फिज़ा में देख लेना तुम सभी
दुश्मनों को भी गले अपने लगाना सीखिये

हौसलों से ही "अनुपम" ग़म के अन्धेरे है मिटे 
आंधियों में भी चराग़ों को जलाना सीखिये।।

©"ANUPAM"
  #अनुपम_की_कविता