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बृहत् मेरे विरह के बृहत् आसमान में, हर

बृहत्
मेरे   विरह   के   बृहत्   आसमान   में,
हर  रोज  तेरे  यादों  के तारे निकल आतें हैं ।
हर  रात  पिघलता  है  चाँद  कतरा  कतरा,
सहर होते ही शबनम बन जमीं पर बिखर जाते हैं ।।

अम्बिका मल्लिक ✍️

©Ambika Mallik
  #बृहद  वंदना .... Anshu writer Gyanendra Pandey gaTTubaba Mohan raj  poonam atrey Anil Ray Sethi Ji Bhavana kmishra Rakesh Srivastava  Lalit Saxena Disha Kirti Pandey Ashtvinayak Poonam Suyal  MIND TALK meri_diary(R*) Riya Poonam Awasthi Raj Guru  अभिलाष द्विवेदी (अकेला ) एक अनपढ़ शायर कवि संतोष बड़कुर Dinesh