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माना जीवन में अँधियारा है ऋषि पर, जुगनू कब रातों

माना जीवन में अँधियारा है ऋषि पर,
 जुगनू कब रातों से हारा  है 
 माना राहों में कांटे हैं बहुत ऋषि 
 पर पावों में भी छाले हैं
पर इन्ही अंधेरों के आगे जीवन के उजाले हैं !!
तुमको हर पथ पर चलना होगा ऋषि,
 हर मुश्किल से खुद लड़ना होगा ऋषि ! 
पल पल हिम्मत जुटानी होगी 
तब जाकर सफल कहानी होगी ऋषि
आंधी हो तूफान हो या कोई सैलाब हो तुम ऋषि
, तुमको खुद में विश्वास है रखना
 चाहे दुनिया खिलाफ हो ऋषि! 
अपनी नइया के तुम्ही खेवइया,
 तुमको पार लगाना है ऋषि ! 
लहरें है विपरीत तुम्हारे,
 तुमको उन्हें हराना है ऋषि ! 
सब संभव कर दिखलाना है !
 हर मुश्किल से लड़ जाना है ऋषि..!!
माना समय बुरा है लेकिन
 अच्छा समय भी आएगा ऋषि! 
मेहनत यदि जारी रखे तो सब
 कुछ तुमको मिल जाएगा ऋषि!!
जब राह ही तुमने कठिन चुना है
 तो फिर आपा क्यों खोते हो ऋषि
 । जब जीतना तुम्हें हर युध्द ही है
 फिर आलस में क्यों सोते हो ऋषि!!
मंजिल इतनी आसान होगी इस भ्रम को 
खुद से दूर रखो ऋषि! 
हर मुश्किल से टकरा लोगे इतना
 खुद को मजबूत रखो ऋषि !!
आज मिल रहे तानों से तुम धैर्य न 
अपना खोने देना ! तुम मेहनत का हथियार 
पकड़ना जो होता है होने देना !!

                                                                              लफ्ज़ ए समीर...✍️

©sameer Kumar
  # hindi poetry on life