शुक्रगुज़ार ------------ ज़र्रा-ज़र्रा कृतज्ञ हो

शुक्रगुज़ार
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ज़र्रा-ज़र्रा कृतज्ञ हो जैसे तेरा रोम-रोम निसार है तुझ पर कुछ ऐसे मन मेरा

हर नज़ारा क़र्ज़दार हो जैसे तेरा ये इश्क़ वफ़ादार है तेरे वास्ते कुछ ऐसे मेरा

भीड़ में ये दिल सुकूँ भरा आसरा हो जैसे तेरा ज़मीर ज़िंदा है हर दम तेरी ख़ातिर कुछ ऐसे मेरा

आसमाँ सा बेहिसाब अरमाँ हो जैसे तेरा सपने सच करने को मेहरबाँ हो तुझ पर ख़ुदा कुछ ऐसे मेरा

सजदा करता हूँ, ये दिल मानो मक़ां नहीं मंदिर हो जैसे तेरा बस ये जां ही है हिफ़ाज़त को तेरे रू-ब-रू कुछ ऐसे मेरा

मनीष राज

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©Manish Raaj
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