2122 2122 2122 212 खेल दिल का जब सियासत से ये खेला जायेगा इश्क तब तब हुस्न के हाथों से मारा जायेगा बेबसी समझो इसे या की मुहब्बत ये मेरी दिल में तुम हो दिल ये तुम ही पे लुटाया जायेगा मुद्दतो से इन लबो पे गीत आये ही नहीं अब बुला कर उन्हें महफ़िल को सजाया जायेगा सोचते क्यों हो मेरी इस ज़िन्दगी के बारे में ज़िन्दगी के साथ जो होगा वो देखा जायेगा बेवफा है बेवफा ही रहने दो उनको यहाँ साथ मुश्किल में मगर उनका निभाया जायेगा ये दिलो के खेल कभी हमको समझ आये नहीं यूँ बसा के दिल में फिर दिल से निकाला जायेगा खेलते दिल से खिलौना हो समझ कर तुम मेरे ये खिलौना तेरे ही हाथो से तोडा जायेगा ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 20/1/2017 ©laxman dawani #alone #Love #Life #romance #Poetry #gazal #experience #poem #Poet #Knowledge