Meri Mati Mera Desh अकेला मेघो की गर्जना ये

Meri Mati Mera Desh       अकेला

मेघो की गर्जना ये;
क्या नूर बन जाऊं?
लगती कहाँ चिंगारी अब यहाँ ?
रात्रि में कैसे प्रभात बन जाऊं ?

चलती है कश्ती यहाँ, जरा धीरे;
बेड़िया, कैसे पार कर जाऊं ?
कहते वो, अकेले हो तुम ;
भला क्या, अब रार कर जाऊं ?

फूलों में महकना भी;
देख उन्हें क्या मंडराना सीख जाऊं ?
जन्नत की इन झूठी लकीरो में-
क्या जिंदगी को सहलाना भूल जाऊं ?

नजरंदाजियो का यहां खौफ भी 
लकीरें उनकी, क्या संभालने को मिट जाऊं ?
अभी हूँ मैं, यहाँ अकेला ?
क्या अब महफ़िल को आनंद लुटाना भी भूल जाऊं ?

©Saurav life #MeriMatiMeraDesh 
#sauravlife
Meri Mati Mera Desh       अकेला

मेघो की गर्जना ये;
क्या नूर बन जाऊं?
लगती कहाँ चिंगारी अब यहाँ ?
रात्रि में कैसे प्रभात बन जाऊं ?

चलती है कश्ती यहाँ, जरा धीरे;
बेड़िया, कैसे पार कर जाऊं ?
कहते वो, अकेले हो तुम ;
भला क्या, अब रार कर जाऊं ?

फूलों में महकना भी;
देख उन्हें क्या मंडराना सीख जाऊं ?
जन्नत की इन झूठी लकीरो में-
क्या जिंदगी को सहलाना भूल जाऊं ?

नजरंदाजियो का यहां खौफ भी 
लकीरें उनकी, क्या संभालने को मिट जाऊं ?
अभी हूँ मैं, यहाँ अकेला ?
क्या अब महफ़िल को आनंद लुटाना भी भूल जाऊं ?

©Saurav life #MeriMatiMeraDesh 
#sauravlife
saurav6866843768414

Saurav life

Bronze Star
New Creator
कल, आज और कल


यू न बदली थी दुश्वारियां मेरी,
अब, क्या फिर बदलेंगी ?
आज श्याम, गगन, चमन भी है साथ
पर, क्या दूर तलक फिर पहुँचेगी? 


आशियाना है आज, पैसे भी
अब, क्या कुछ शेष बदलेगी ?
हां, आज कुछ तो है पास 
पर, क्या 'वो' जज्बात मुझतक फिर पहुँचेगी ?


इंसान हूं, आकांक्षाएं शेष है मेर
क्या, कुछ न अब ठहरेगी ?
आह! क्या ठहराव मुझतक पहुँचेगी ?
ना, समय की चाह ही बहुरेगी।
यू न बदली थी दुश्वारियां मेरी
अब, नव-उन्नति की राह फिर संवरेगी।।

©Saurav life
  #sauravlife
play
saurav6866843768414

Saurav life

Bronze Star
New Creator

#sauravlife #Life

17,825 Views

White रिश्तों में "सिलवटों" का पड़ना भी अच्छा है;
आखिर,
यहां, "सिलाई" का मौका तो नही मिलता।

©Saurav life
  #SAD 
#sauravlife
play
White रिश्तों को जकड़कर, उसे निभा नहीं सकते; 
बह गया जो दरिया में, उसे समझा नही सकते।। 
जिनको "विश्वास" पर तौहीन हो; 
उनको हाथ थमा चला नही सकते।।

©Saurav life
  #Moon 
#sauravlife
play
saurav6866843768414

Saurav life

Bronze Star
New Creator

#Moon #sauravlife

225 Views

मेरी कहानी

ढल रहा है अब सांझ;
मुझे अब ठहरने दो।।
बस! दो पल है बाकी;
जीभर के जीने दो।

रात है ये या आशियाना;
मुझे थोड़ा संवरने दो।
चढ़ रही है रात अब;
जरा! खुद बदलने दो।


तपिश थी बहोत उजाले में;
उजाले को चमकने दो।
रख हौसला बुलंदियों के;
रात को महकने दो।

भोर हुई अब नव-निर्माण की;
अब जरा! एक पग बढ़ने तो दो।
ये वर्तमान है अनंत की;
जरा इतिहास अब बदलने तो दो।

है संघर्ष जीवन मे;
हमे जरा बढ़ने तो दो।
अब गुलामी नहीं खुद की;
खुद को खुद से लड़ने तो दो।।

पाँव न थमते जो कोई हाथ थामेगा ?
ये रणभूमि है ललकार की , 
तलवार को जरा म्यान तो दो।
यहां जीत है आरम्भ की;
गीत है, विजय की।
उग रहा है अब सूर्य;
उसे अब बढ़ने तो दो।

©Saurav life
  #kinaara
#sauravlife
play
राह भी मुड़ जाते है, जब साथ छूट जाते है।
यहां समंदर का कहा सहारा, जहा किनारा मिल जाते है।।

©Saurav life
  #Isolation 
#sauravlife
play
"सन्नाटा" है जमीं पर, आसमाँ को क्या बोलूं।

©Saurav life
  #Sunhera 
#sauravlife
play
अंगड़ाइयां ले रही अब ये जिंदगी
 ढूंढ रहा हूँ 'मौत' अब कहा !
उमंगे भी अब शांत है
नौजवानी फिर कहा !

ढल रहा सांझ अब तो
सुबह की फेरी फिर कहा !
है पीर इस जगत में, आखिर
ढूंढ़ता हूँ "सुकून से मौत" अब कहा !

©Saurav life
  #kinaara 
#sauravlife
play
सपने भी कभी गुलजार हो रहे होंगे;
 बात छोटी सी, पर हकीकत में वो,  कितना परेशान हो रहे होंगे।।

©Saurav life
  #Soul 
#sauravlife
play
बातें


बाते होती है कुछ लंबी;
कुछ अपनो, कुछ लम्हो के साथ।।
यहाँ उम्र कहा है, जो अब ठहरे ;
 तेरे-मेरे किस्सों के साथ

©Saurav life
  #saath 
#sauravlife
play
पुष्प

हे पुष्प ! सुंदरता तेरी, मैं मोल क्या लूं ?
 महक रहा मेरा आंगन, कितना तेरा नाम लूं ?
पर -
 होती भी न तू कभी पास मेरे; 
"एहसास" है तेरा, इसे अब क्या राज दूं ??

©Saurav life
  #Blossom 
#sauravlife
play