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गहरा है वक़्त का दरिया डूब उसमे चुका हुँ अपने माज़ी

गहरा है वक़्त का दरिया
डूब उसमे चुका हुँ
अपने माज़ी से अब
मैं हार चुका हूँ..
कोई न है अब
हाथ थामने को बचा
लहरों मे वक़्त कि
मैं उलझ चुका हूँ ..
रौशनी जो कि
आसमा की तरफ
तो पता लगा
मंज़िलो से अब
मैं बिछड़ चुका हूँ..

©Jai Pathak
  #माज़ी