White ग़ज़ल सुना है कि नफ़रत करते हैं हम से, नफ़रत से उनके सुकून मिलता है। हमारी मोहब्बत जो गुनाह ठहरी, तभी तो हर दर्द का जूनून मिलता है। चलो दूर होकर दुआ हम करेंगे, लगता है उन्हें भी सुकून मिलता है। वफ़ा की सज़ा जब से मुक़र्रर हुई है, तभी तो हर जुर्म में कानून मिलता है। हमारे ही लहू से जलते चराग, मगर नाम उनका फ़लून मिलता है। — अशोक वर्मा हमदर्द ©Ashok Verma "Hamdard" गजल