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गर्दिशों में मेरे सितारे थे फिर भी मुस्कुरा कर जि

गर्दिशों में मेरे सितारे थे फिर भी मुस्कुरा कर  जिता गया। 
अपने पराएँ कि बात ना करो अब सब के  दिए गम भी पीता गया।
 जख्म गहरे थे मेरे जिदंगी के दर्द-ए-ला-दवा  रास आ ना सकी मुझे ,
मैं खुद ही खुद  के जख्मों को  सुईं बन सिता  गया।
 अब कोई मुझसे पूछेगा जिदंगी का अफसाना
 तो कह दूगा ख्वाब बहुत थे मेरी आँखों में, 
 जिदंगी कुछ ओर नहीं एक जहर का जाम है जिसे मैं
 मिठा जाम समझ कर पीता गया।

©Manisha patel journey of realization
  #Apocalypse