हर साल ज़िन्दगी का बहाना बदलता रहा जिस्म की सीरत थी अबोदाना बदलता रहा इन्सान ने बनाए हैं महंगे मिट्टी के पिंजरे हर वक्त पंछियों का ठिकाना बदलता रहा #पिंजरे #वत्स #vatsa #dsvatsa #illiteratepoet #vatsapoet #hindvi