Nojoto: Largest Storytelling Platform

तुझे रास नहीं आएगी इतनी खुदपरस्ती ऐ दिल ! थोड़ा त

तुझे रास नहीं आएगी इतनी खुदपरस्ती 
 ऐ दिल ! थोड़ा तो लोगों से मिलके चला कर !!

शीशी में उतार लेंगे तेरी महक सारी !
"गुलिस्तां में यूँ बेबाक न ख़िल के चला कर !! 

नमक की मण्डी में उतरने से पहले ।
"बखिए ज़ख्मों के ज़रा सिल के चला करा!!


तुझे  नोच खाएगें इस शहर के ये मसीहे ! 
तेवर अपने कुछ तो बदल के चला करं !!

किसके लिए हैं "जग्गी" ये तेरी जाफ़रानी ग़ज़लें !
 रुख बदल अब इनका, अब न मचल के चला कर!|

©Jagjeet Singh Jaggi... ख़्वाबगाह...! #ऐ_दिल 

#Time
तुझे रास नहीं आएगी इतनी खुदपरस्ती 
 ऐ दिल ! थोड़ा तो लोगों से मिलके चला कर !!

शीशी में उतार लेंगे तेरी महक सारी !
"गुलिस्तां में यूँ बेबाक न ख़िल के चला कर !! 

नमक की मण्डी में उतरने से पहले ।
"बखिए ज़ख्मों के ज़रा सिल के चला करा!!


तुझे  नोच खाएगें इस शहर के ये मसीहे ! 
तेवर अपने कुछ तो बदल के चला करं !!

किसके लिए हैं "जग्गी" ये तेरी जाफ़रानी ग़ज़लें !
 रुख बदल अब इनका, अब न मचल के चला कर!|

©Jagjeet Singh Jaggi... ख़्वाबगाह...! #ऐ_दिल 

#Time