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गिलोय मान्यता है, समुद्र मंथन के दौरान अमृत की बूं

गिलोय
मान्यता है, समुद्र मंथन के दौरान
अमृत की बूंदे जहाँ गिरी, वहाँ गिलोय
रूपी अमृत पैदा हुआ। इसलिए इसे
आयुर्वेद में अमृता भी कहा गया।
गिलोय का रस तीनों दोषों को संतुलित
करता है। गिलोय का चूर्ण सोंठ के
साथ खाने से वात; गुड़ के साथ खाने
से पित्त और शहद के साथ खाने से
कफ संतुलित करता है।

©KhaultiSyahi
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