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आओ सुनाऊं एक कहानी एक थी राजा की राजधानी कठिनाई

आओ सुनाऊं एक कहानी
एक  थी राजा की राजधानी 
कठिनाई से लड़ लड़ कर
राजा बन जाने तक  की कहानी

राजतिलक अब हुआ है उसका 
राजमुकूट सर उसके चमका 
कभी तो था वो भीड़ का हिस्सा 
अब भीड़ सुनाती उसका किस्सा 

उसने कभी न झुकना सीखा 
नही कभी भी रुकना सीखा 
कर संकट को पार गया वो 
हर उलझन तो तार गया वो

जो स्वयं से जीता वो राजा 
अभिमान रहित है वो राजा 
जो सुख दुख  समझे वो राजा
जनहित जो करे है वो राजा

©Shailesh Yadav
  #राजा