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abhaybipin6063
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theABHAYSINGH_BIPIN

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theABHAYSINGH_BIPIN

White आज कल ये नींद क्यूँ सता रही है,
मानती नहीं अपना, पूरी रात जगा रही है।
आँखों ने पलकों से ख़फ़ा होकर कहा,
"अब सपनों की राहें भी हमें नहीं भा रही हैं।"

चाँदनी भी जैसे तन्हा लगती है,
हवा भी कोई शिकवा सुना रही है।
दिल की बेचैनियों का सबब क्या कहूँ,
यादें हैं कि हर रात रुला रही हैं।

कभी करवटों में सुलझता नहीं,
कभी ख्वाबों में उलझा जाता हूँ।
सोचता हूँ शायद ये रात गुज़र जाए,
मगर हर सहर में खुद को वहीँ पाता हूँ।

धड़कनों की ताल भी धीमी सी लगती है,
जैसे कोई दास्तां अधूरी सुना रही है।
तकिए पे गिरते हैं खामोश आँसू,
जिनकी गूँज रातभर मुझे जगा रही है।

सुबह की रोशनी भी अजनबी लगती है,
जैसे कोई याद फिर से बुला रही है।
हर रात एक नया किस्सा कह जाती है,
और हर सुबह फिर वही कहानी दोहरा रही है।

ख़ामोश लफ्ज़ों में सिसकती है रात,
जैसे कोई भूला हुआ नग़्मा हो साथ।
नींद आँखों से मानो रूठी हुई,
तेरी बातों की चादर बिछा रही है।

कभी सोचता हूँ कि भूल जाऊँ तुझे,
पर ये दिल भी कहाँ मेरी सुनता है।
तेरी हर याद इक साज़ सा बजता है,
और मैं हर धुन में खुद को ढूँढता हूँ।

क्यों ये रातें सवाल बन जाती हैं,
क्यों तन्हाई ही जवाब बन जाती है?
कब तक जिऊँ इस अधूरी तलाश में,
जहाँ हर सुबह फिर वही शाम लाती है?

©theABHAYSINGH_BIPIN #Sad_shayri  शायरी दर्द Extraterrestrial life Entrance examination Monu Kumar  Satyaprem Upadhyay  बाबा ब्राऊनबियर्ड  Sheetal Shekhar  Internet Jockey  Sheetal Shekhar 

 खूबसूरत दो लाइन शायरी
आज कल ये नींद क्यूँ सता रही है,
मानती नहीं अपना, पूरी रात जगा रही है।
आँखों ने पलकों से ख़फ़ा होकर कहा,
"अब सपनों की राहें भी हमें नहीं भा रही हैं।"

#Sad_shayri शायरी दर्द Extraterrestrial life Entrance examination Monu Kumar Satyaprem Upadhyay बाबा ब्राऊनबियर्ड Sheetal Shekhar Internet Jockey Sheetal Shekhar खूबसूरत दो लाइन शायरी आज कल ये नींद क्यूँ सता रही है, मानती नहीं अपना, पूरी रात जगा रही है। आँखों ने पलकों से ख़फ़ा होकर कहा, "अब सपनों की राहें भी हमें नहीं भा रही हैं।"

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theABHAYSINGH_BIPIN

White उड़ती तितलियों से सबक इतना तो सीखा था,
उड़ान कितनी भी ऊँची हो, ज़मीं पर ही उतरना।
कितना कुछ सिखाती है वक़्त की पाठशाला,
सफलता के मुकाम पर भी ख़ुद विनम्र रहना।

कुछ लोग हवा में खोकर ज़मीन ढूंढते हैं,
बादलों में खोकर खुद को आसमां समझते हैं।
पर जब भ्रम टूटता है, वक्त तलवार-सी चलती,
टुकड़े-टुकड़े होकर, आसमां से जमीं गिरते हैं।

उड़ो पतंग-सी, मचलो पतंग-सी, घूमो पतंग-सी,
पर इशारे पर ही रहना, बंधी हो जिस डोर से।
कोई अहंकार नहीं रखना मन में उड़ान की,
इशारे पर ही चलना, जुड़ी रहना उस डोर से।

थामे रखा है एक डोर, तुम्हें गिरने नहीं देगा,
उड़ो, आसमां को चीर, डोर तुम्हें गिरने नहीं देगा।
उत्साहित रहना और जीवन से सीखते रहना,
बिखरे कभी तो उस डोर को थामे रखना।

मत समझो कि कोई तुम्हें रोक रहा है,
अहंकार में आकर कभी डोर मत छोड़ना।
जो तुम्हें संभाल रहे हैं, उनका भी मान रखना,
उनकी भावनाओं को दिल में बसाए रखना।

जब तक वह डोर तुम्हारे साथ रहेगी,
हर मुश्किल में संतुलन बनाए रखेगी।
पर अगर अभिमान से हाथों की पकड़ ढीली होगी,
तब गिरकर समेटने को सिर्फ़ तन्हाई मिलेगी।

इसलिए उड़ो, मगर अपनी हद पहचान के,
सपनों के आसमां में पर फैलाकर, मगर जान के।
क्योंकि हर उड़ान का एक मुकाम होता है,
हर चढ़ते सूरज को एक दिन ढलना होता है।

पर ढलते सूरज की भी एक पहचान होती है,
नई सुबह की उसकी यही तो जान होती है।
रात चाहे अंधेरी हो, सवेरा फिर आता है,
हर मुश्किल के बाद एक आसान होता है।

मंज़िलों तक पहुँचने का यही दस्तूर है,
जो टिके राहों पर, उसका ही सुरूर है।
संघर्ष के आँधियों में जो खुद को समेटता है,
अगली उड़ान के लिए वही तैयार होता है।

©theABHAYSINGH_BIPIN #Sad_Status  Extraterrestrial life
 Rakesh Srivastava  An_se_Anshuman  ASHISH KUMAR TIWARI  gudiya  h m alam s 

उड़ती तितलियों से सबक इतना तो सीखा था,
उड़ान कितनी भी ऊँची हो, ज़मीं पर ही उतरना।
कितना कुछ सिखाती है वक़्त की पाठशाला,
सफलता के मुकाम पर भी ख़ुद विनम्र रहना।

#Sad_Status Extraterrestrial life Rakesh Srivastava An_se_Anshuman ASHISH KUMAR TIWARI gudiya h m alam s उड़ती तितलियों से सबक इतना तो सीखा था, उड़ान कितनी भी ऊँची हो, ज़मीं पर ही उतरना। कितना कुछ सिखाती है वक़्त की पाठशाला, सफलता के मुकाम पर भी ख़ुद विनम्र रहना। #कविता

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theABHAYSINGH_BIPIN

मन का दुश्मन बनना होगा

मन का दुश्मन बनना होगा,
खुद से भी तो लड़ना होगा।
यह छल न जाए जीवन को,
सदैव ध्यान रखना होगा।

बुझ न जाए प्रगति की मशाल,
खुद आग बनकर जलना होगा।
बनो सारथी खुद के रथ का,
अर्जुन भी तुम्हें बनाना होगा।

जीवन की रणभूमि से,
सदैव चौकस रहना होगा।
कोई हित-मित्र नहीं है पीछे,
अकेले ही आगे बढ़ना होगा।

निराशा की घटाएँ घेरें,
तब खुद में जोश भरना होगा।
इम्तिहान लेगी रणभूमि जब,
समशिरों पर चलना होगा।

प्रहरी हो तुम जीवन के,
पूरी रात तुम्हें जागना होगा।
इम्तिहान नहीं, युद्ध समझो इसे,
प्रत्येक व्यूह से तुम्हें लड़ना होगा।

काबू में रखना अवचेतन को,
संघर्ष में दृढ़ रहना होगा।
ठान सको जब ख़ुद से ही रण,
ख़ुद पर प्रथम विजयी पाना होगा।

विचलित ना होना इस रण में,
भावों का नाश करना होगा।
भेद गए जब व्यूह को तुम,
अंतिम क्षण तक तुम्हें लड़ना होगा।

संकल्प लो, उद्घोष करो,
निर्भीक बाणों की वर्षा करना होगा।
तोड़ सको तुम द्वार सभी,
अभिमन्यु तुमको बनना होगा।

©theABHAYSINGH_BIPIN #सदैवचलनाहोगा
     
 Rakesh Srivastava  happydil  Internet Jockey  Anupriya  Author Shivam kumar Mishra (Shivanjal) 

मन का दुश्मन बनना होगा

मन का दुश्मन बनना होगा,
खुद से भी तो लड़ना होगा।

#सदैवचलनाहोगा Rakesh Srivastava happydil Internet Jockey Anupriya Author Shivam kumar Mishra (Shivanjal) मन का दुश्मन बनना होगा मन का दुश्मन बनना होगा, खुद से भी तो लड़ना होगा। #कविता

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theABHAYSINGH_BIPIN

White एक हार जरूरी है जीवन में

एक हार जरूरी है जीवन में,
एक जीत जरूरी है जीवन में।
हार से संवरना सीखोगे तुम,
जीत से निखरना सीखोगे तुम।

हार जलाएगी आग में,
जीत देगी उड़ान को राग में।
हार से सहनशील बनोगे तुम,
जीत से खुद को पहचानोगे तुम।

हार धैर्य सिखाएगी,
जीत विश्वास जगाएगी।
इसीलिए हार जरूरी है जीवन में,
एक जीत भी जरूरी है जीवन में।

हार और जीत हैं जीवन के रंग,
इन्हीं से सजे हैं जीवन के संग।
इनसे ही उत्साह मिलता है जीवन में,
सपनों को आकार मिलता है जीवन में।

चढ़ते रहो छोटी-छोटी सीढ़ियाँ,
ऊँचा शिखर पाओगे जीवन में।
संघर्ष से जो निखर जाएगा,
हर मुकाम पाएगा जीवन में।

निरंतर चलते रहना पथ पर,
लक्ष्य जरूरी है जीवन में।
ना मिले गर कोई साथी राह में,
अकेले ही बढ़ते रहना जीवन में।

चढ़ते रहो शिखर की ओर,
छोटों को देना स्नेह और सम्मान।
गिरो तो जल-सा निर्मल रहना,
सदैव शीतल रहना जीवन में।

संघर्ष ही सार है जीवन का,
रुकने से पहले सोचना जरा।
जो ठहर गया, वो हार गया,
चलते रहो, जीत है जीवन में।

©theABHAYSINGH_BIPIN #एकहारजरूरीहैजीवनमें

एक हार जरूरी है जीवन में,
एक जीत जरूरी है जीवन में।
हार से संवरना सीखोगे तुम,
जीत से निखरना सीखोगे तुम।

हार जलाएगी आग में,

#एकहारजरूरीहैजीवनमें एक हार जरूरी है जीवन में, एक जीत जरूरी है जीवन में। हार से संवरना सीखोगे तुम, जीत से निखरना सीखोगे तुम। हार जलाएगी आग में, #कविता

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theABHAYSINGH_BIPIN

बंदिशें और ख्वाब

दिन कट जाते हैं हंसते-गाते,
कटती नहीं हैं ये लंबी रातें।
उसके ख्वाबों में जागता रहता हूं,
पर साथ देती नहीं हैं सांसें।

याद आती हैं उसकी बातें,
पर अब धीमी हैं ज़ज़्बातें।
मैं बुलाने की कोशिश करता हूं,
पर सुनती नहीं वो मेरी बातें।

कितना लंबा वक्त गुज़र गया,
देखे बिना सूनी हैं ये आंखें।
किसी बहाने से ही आ जाओ,
तुमसे करनी, तुम सी बातें।

कितने दूर चली गई हो तुम,
और कब से सुनी मेरी ये बाहें।
प्यार न सही, लड़ने ही आओ,
तेरे बिना भारी रहती हैं आंखें।

नहीं जानता कितना कसूर था,
सुकून न सही, देने आओ तकलीफें।
सज़ा मुकर्रर करने ही आ जाओ,
लेकर आना तुम  वक्त सी ज़ंजीरें।

क्या पता आज़ाद हो जाऊं,
और खत्म हो जाए मेरी बंदिशें।
छुपा कर रखूंगा जख्म सारे,
तुम लेकर आना अपनी शमशीरें।

©theABHAYSINGH_BIPIN #बंदिशेंऔरख्वाब
बंदिशें और ख्वाब

दिन कट जाते हैं हंसते-गाते,
कटती नहीं हैं ये लंबी रातें।
उसके ख्वाबों में जागता रहता हूं,
पर साथ देती नहीं हैं सांसें।

#बंदिशेंऔरख्वाब बंदिशें और ख्वाब दिन कट जाते हैं हंसते-गाते, कटती नहीं हैं ये लंबी रातें। उसके ख्वाबों में जागता रहता हूं, पर साथ देती नहीं हैं सांसें। #ishq #शायरी #Din #saja #yandey

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theABHAYSINGH_BIPIN

White डूब जाता हूँ मैं,
अपनी आकांक्षाओं के गर्त में।
मेरी जीत, हार में बदल जाती है,
हर जीत की एक शर्त में।
थकता नहीं है राही अपने लंबे सफर पर,
थक जाता है, बोझ लिए मन में।

©theABHAYSINGH_BIPIN #GoodMorning 

"डूब जाता हूँ मैं,
अपनी आकांक्षाओं के गर्त में।
मेरी जीत, हार में बदल जाती है,
हर जीत की एक शर्त में।
थकता नहीं है राही अपने लंबे सफर पर,
थक जाता है, बोझ लिए मन में।" Anupriya  Sandeep Kumar Saveer  Author Shivam kumar Mishra (Shivanjal)  gudiya  Saurabh Tiwari

#GoodMorning "डूब जाता हूँ मैं, अपनी आकांक्षाओं के गर्त में। मेरी जीत, हार में बदल जाती है, हर जीत की एक शर्त में। थकता नहीं है राही अपने लंबे सफर पर, थक जाता है, बोझ लिए मन में।" Anupriya Sandeep Kumar Saveer Author Shivam kumar Mishra (Shivanjal) gudiya Saurabh Tiwari #विचार

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theABHAYSINGH_BIPIN

राहों की खोज

चलते रहिए आगे,
बढ़ते रहिए आगे,
कहीं तो मक़ान होगा,
कहीं तो मंज़िल होगी।

मिलते रहिए अपनों से,
मिलते रहिए गैरों से,
कहीं तो एहसास होगा,
कहीं तो पहचान होगी।

हाथ बढ़ाते रहिए,
हिम्मत बढ़ाते रहिए,
कहीं तो पुकार होगी,
कहीं तो सांस होगी।

लड़ते रहिए अंधेरों से,
लड़ते रहिए धुंध-कोहरे से,
कहीं तो आसमान होगा,
कहीं तो रोशनी होगी।

सदैव बढ़ते रहिए,
चौकस रहिए हर वक्त,
कहीं तो लकीर होगी,
कहीं तो नज़र होगी।

डरना क्यों है दोपहरी से,
उत्साह भरते रहिए,
कहीं तो धूप होगी,
कहीं तो छांव होगी।

अग्रसर रहिए जलधारा में,
थमने न पाए विजयी रथ,
कहीं तो मिट्टी होगी,
कहीं तो पत्थर होगी।

साधते रहिए हिम्मत,
सौर्य के गीत भी गाते रहिए,
कहीं तो सफ़लता होगी,
कहीं तो विजयी होगी।

©theABHAYSINGH_BIPIN #walkingalone 

राहों की खोज

चलते रहिए आगे,
बढ़ते रहिए आगे,
कहीं तो मक़ान होगा,
कहीं तो मंज़िल होगी।

#walkingalone राहों की खोज चलते रहिए आगे, बढ़ते रहिए आगे, कहीं तो मक़ान होगा, कहीं तो मंज़िल होगी। #कविता

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theABHAYSINGH_BIPIN

White एक अधूरा सफ़र

एक सफ़र अधूरा रहा,
ख्वाहिशों का साथ छूट गया।
मंज़िल मेरी रूठ गई,
मैं खुद से ही तो रूठ गया।

दरिया में कश्ती डूब गई,
पतवार मेरी टूट गई।
मैं खुद से ही तो रूठ गया,
मैं खुद से ही तो टूट गया।

ख़्वाब सजाए आँखों ने,
एक पल में सब टूट गया।
सफ़र पर निकला जब,
खुद ही रास्ता भटक गया।

रुका मैं अभिलाषा में,
मुश्किल दौर से गुज़र गया।
माया के भंवर में फँसकर,
भरी ज्येष्ठा में सर्द सा सिहर गया।

एक महल बनाया रेत सा,
जो पल भर में ढह गया।
ख़्वाबों की दीवारें टूटीं,
और दिल भी कहीं बह गया।

साथ किसी का छूट गया,
दर्द सा दिल में बैठ गया।
मैं खुद से ही तो रूठ गया,
मैं खुद से ही तो टूट गया।

दिल मासूम फिर से टूट गया,
मंज़िल मेरी फिर छूट गई।
महबूब मुझसे रूठ गया,
मैं खुद से ही तो टूट गया।
मैं खुद से ही तो रूठ गया।

©theABHAYSINGH_BIPIN #sad_qoute  
एक अधूरा सफ़र

एक सफ़र अधूरा रहा,
ख्वाहिशों का साथ छूट गया।
मंज़िल मेरी रूठ गई,
मैं खुद से ही तो रूठ गया।

#sad_qoute एक अधूरा सफ़र एक सफ़र अधूरा रहा, ख्वाहिशों का साथ छूट गया। मंज़िल मेरी रूठ गई, मैं खुद से ही तो रूठ गया। #कविता

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theABHAYSINGH_BIPIN

गुज़रा हुआ वक्त अब किस दौर से आयेगा,
गुज़रा हुआ साथी अब किस ओर से आयेगा।
बिछड़े कारवां जिंदगी से लौटने की उम्मीद है,
मुकरा हुआ शख़्स अब किस ओर आयेगा।

वाजिब है मुझे छोड़कर उसका जाना भी,
रास्ते बहुत हैं, जाने कौन किस मंज़िल को जायेगा।
जुदाई बहुत हो चुकी, अब उसको पाने की उम्मीद है,
तलाश में जंगल अब किस शहर को जायेगा।

अकेला सफ़र किस मंज़िल तक जायेगा,
दिल की बेचैनी अब किससे सुकून पायेगा।
यादों के नक्शे पर कदमों के कई निशान हैं,
खुद को खोकर शायद कोई राज़ पायेगा।

©theABHAYSINGH_BIPIN 
गुज़रा हुआ वक्त अब किस दौर से आयेगा,
गुज़रा हुआ साथी अब किस ओर से आयेगा।
बिछड़े कारवां जिंदगी से लौटने की उम्मीद है,
मुकरा हुआ शख़्स अब किस ओर आयेगा।

वाजिब है मुझे छोड़कर उसका जाना भी,
रास्ते बहुत हैं, जाने कौन किस मंज़िल को जायेगा।

गुज़रा हुआ वक्त अब किस दौर से आयेगा, गुज़रा हुआ साथी अब किस ओर से आयेगा। बिछड़े कारवां जिंदगी से लौटने की उम्मीद है, मुकरा हुआ शख़्स अब किस ओर आयेगा। वाजिब है मुझे छोड़कर उसका जाना भी, रास्ते बहुत हैं, जाने कौन किस मंज़िल को जायेगा। #शायरी

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theABHAYSINGH_BIPIN

वो हक जताती है कभी-कभी

वो हक जताती है कभी-कभी,
प्यार जताती है कभी-कभी।
डूब जाओगे गहरी आँखों में,
पलके झुकाती है कभी-कभी।

मासूमियत से भर जाती नज़रें,
आँखें झुकाती है कभी-कभी।
जज़्बातों को बयां किए बिना,
बहुत कुछ कह जाती है कभी-कभी।

कितनी गर्मजोशी है अदाओं में,
वो बिजलियाँ गिराती है कभी-कभी।
इशारों में कह जाती है बातें,
पास बुलाती है कभी-कभी।

वैसे गुस्से में लाल हो जाती,
शरमाती भी है कभी-कभी।
बातों में अपनी उलझा कर,
दिल चुराती है कभी-कभी।

इश्क़ का आलम कुछ ऐसा,
कि पास बुलाती है कभी-कभी।
दिल के करीब रहकर भी,
फासले बढ़ा जाती है कभी-कभी।

ख्वाबों में छुपा लेती है खुद को,
हकीकत में दिख जाती है कभी-कभी।
साज़िश सी लगती है ये मोहब्बत,
हद से गुजर जाती है कभी-कभी।

©theABHAYSINGH_BIPIN #fog 

वो हक जताती है कभी-कभी

वो हक जताती है कभी-कभी,
प्यार जताती है कभी-कभी।
डूब जाओगे गहरी आँखों में,
पलके झुकाती है कभी-कभी।

#fog वो हक जताती है कभी-कभी वो हक जताती है कभी-कभी, प्यार जताती है कभी-कभी। डूब जाओगे गहरी आँखों में, पलके झुकाती है कभी-कभी। #बहुत #कविता

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