Vikram Suryawanshi

Vikram Suryawanshi Lives in Latur, Maharashtra, India

portrait drawing and painting artist । agriculturist । self thought writer । 😊

www.instagram.com/vic.vikram

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"Tunnel जब भी बुलाये जिंदगी आखरी बार गले लगानेको तो मेरे चहरेपर खाँफ ना रहे। बस दुआ है कब्र पर लेटे हुए रुह पर 'शायद थोडा और जिया होता ' इस चीजका बोझ ना रहे । - विक्रम"

Tunnel जब भी बुलाये जिंदगी आखरी बार गले लगानेको तो मेरे चहरेपर खाँफ ना रहे।
बस दुआ है कब्र पर लेटे हुए रुह पर 'शायद थोडा और जिया होता ' इस चीजका बोझ ना रहे ।
- विक्रम

#जिंदगी

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"जब रास्ता धुंदला दिखे और कदम रुठ जाये तो हौसला साथ देता है , और जब अपने हि रुढ जाये तो खुदा साथ देता है । -विक्रम"

जब रास्ता धुंदला दिखे और कदम रुठ जाये तो हौसला साथ देता है , और जब अपने हि रुढ जाये तो खुदा साथ देता है ।
-विक्रम

#खुदा

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#dukh

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"हम इतना जो चल रहे है आखीर काहां तक जायेंगे ? आखोंके अथरूसे ना जाने कब छुटकारा पायेंगे बेखाँफ कलम को कब रझा अदा फर्मायेगी 'तेरी बेवफाईसे कब तक मेरे पंने भिगायेगी हर रोज निकलता हूँ यही सोचके कि आज तेरा जिक्र ना होगा चार कदम चलनेके बाद रुक जाता हुं सोचके तेरे बिना इस कलमकार का आकार क्या होगा माना मै गलत था तो तुने हाथ छोड दिया अब किसी राहपे टकरा भी गयी तो मुझे देख मुस्कुरानेका भी तुझे अधिकार ना होगा गलत तो वक्तभी होता है जब हम ऊसे किसी औरको सौप देते है उसी नजदिकियो कि वजहसे गलत वक्तमे भी हम मदहोश होते है हम इतना जो चल रहे है आखीर काहां तक जायेंगे ? आखोंके अथरूसे ना जाने कब छुटकारा पायेंगे किसी गौहर से भी अब बात करता हुं जैसे मेरी जुबान असुरी हो वजह मेरी रुह पर भी 'तेरी याद लिपटी है जैसे हिरन कि कस्तुरी हो इंतजार के राही संग कच्ची सडकेभी लगे जैसे नायाब हो भगवान ने झोली मे अमृत दिया वो भी तेरे बिना लगा जैसे वाह्यात हो हम इतना जो चल रहे है आखीर काहां तक जायेंगे ? आखोंके अथरूसे ना जाने कब छुटकारा पायेंगे"

हम इतना जो चल रहे है आखीर काहां तक जायेंगे ?
आखोंके अथरूसे ना जाने कब छुटकारा पायेंगे 

बेखाँफ कलम को कब रझा अदा फर्मायेगी
'तेरी बेवफाईसे कब तक मेरे पंने भिगायेगी 
हर रोज निकलता हूँ यही सोचके कि आज तेरा जिक्र ना होगा 
चार कदम चलनेके बाद रुक जाता हुं सोचके तेरे बिना इस कलमकार का आकार क्या होगा 
माना मै गलत था तो तुने हाथ छोड दिया 
अब किसी राहपे टकरा भी गयी तो मुझे देख मुस्कुरानेका भी तुझे अधिकार ना होगा 
गलत तो वक्तभी होता है जब हम ऊसे किसी औरको सौप देते है 
उसी नजदिकियो कि वजहसे गलत वक्तमे भी हम मदहोश होते है 

हम इतना जो चल रहे है आखीर काहां तक जायेंगे ?
आखोंके अथरूसे ना जाने कब छुटकारा पायेंगे 

किसी गौहर से भी अब बात करता हुं जैसे मेरी जुबान असुरी हो
वजह मेरी रुह पर भी 'तेरी याद लिपटी है जैसे हिरन कि कस्तुरी हो 
इंतजार के राही संग कच्ची सडकेभी लगे जैसे नायाब हो
भगवान ने झोली मे अमृत दिया वो भी तेरे बिना लगा जैसे वाह्यात हो 

हम इतना जो चल रहे है आखीर काहां तक जायेंगे ?
आखोंके अथरूसे ना जाने कब छुटकारा पायेंगे

#Endless

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"मत आजमा जवानी और जोश किसी बेबस लाचार पर कुछ पल और हव-ऐ-सुकून के लिये किसी को ताउम्र बरबाद मत कर डर उस खुदसे जो शर्मीन्दा है तुझे इन्सान बना कर इंसाफ जब होगा उन चिख-ऐ-दर्द का तो आग होगी तेरे जीसममे और जलेगी 'तेरी रुह तक"

मत आजमा जवानी और जोश किसी बेबस लाचार पर 
कुछ पल और हव-ऐ-सुकून के लिये किसी को ताउम्र बरबाद मत कर 
डर उस खुदसे जो शर्मीन्दा है तुझे इन्सान बना कर 
इंसाफ जब होगा उन चिख-ऐ-दर्द का तो आग होगी तेरे जीसममे और जलेगी 'तेरी रुह तक

#JusticeAndRevenge

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