KM Jaya

KM Jaya Lives in Durg, Chhattisgarh, India

Hay , I am km Jaya Date of birth:22-dec-1998 I am student of BCOM (fist year) Book : kavita kash ( Km Jaya)

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20. शहीद का परिवार
चलो आपको ले चलते हैं शहीद के परिवार तक
जिसने अपनी घर के दीपक को कुर्बान किया है देश के खातिर,
उसके बलिदान को कैसे भूल जाते।

वक्त का सफर चल रहा था रेत की धार सा, तुम्हें बताती हूं रणवीरो की हाल को ,
सरहद पर जब कोई वीर है लड़का यमराज खड़े हो सामने फिर भी नहीं वो डरता ।
इस देश की आन बचाने को यम से वह भीड़ जाता है ,
प्राणों को भी गवा कर वो देश की आन बचाता है ।

भूलकर मां के प्यार को, दूध के कर्ज को वो तो देश का कर्ज चुकाना है ।
एक प्रश्न में पूछूंगा सिंह के राजाओं की मूरत से ,
राजनीति के उड़न खटोला पर चढ़ने वालों से ,
मर वीर जो देश की खातिर क्या उसकी परिवारों को भी भूल गए हो ,

वह तो इस देश के खातिर अपने प्राण गवाता है ।
और पीछे छोड़ जाता है अपने परिवार को,
रोती उस वीर की मां की आंखों में गर्भ देखो ,
उसकी पत्नी के सुनने मन को देखो ,
देखो उसके सोने संसार को देखो,
रोते ब्लैक ती संतानों को देखो ,
माना कि हम उस कमी को दूर तो नहीं कर सकते हैं ,
पर उनकी मदद कर सकते हैं ।
क्यों भूल जाते हे ,क्यों भूल जाते हो उस परिवार को ,
जिसने अपनी घर के दीपक को कुर्बान किया है देश के खातिर,
उसके बलिदान को कैसे भूल जाते हैं ।।

writen by k.m jaya

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तिरंगा ( कविता) By KM Jaya
तिरंगा

तिरंगा
हैं आँख वो तेरा ही दर्शन करुँ,
है शीश वो जो तिरंगे वंदन करे,
है सुर वो जो तेरी विजय का ही गान गाए,
हैं हाथ वो जो दूसमनो का सिर काटे तिरंगे के खातिर ।
मर कर भी अमर उनका नाम है, जीसने माँ को शीश चढ़ाया,
उन वीरों के चरणों मेरा नमन है ।
देश- भगत वो है, जो देश पर प्राण निछावर कर दे,
बस प्रभू इतनी सी वंदन मेरी है ,
हम जिए तो वतन के खातीर, मरे तो वतन के खातीर ।
जय हिंद
writen by kM Jaya

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जो मेरी प्रतिमा आँखो मे भिगोकर गढ होगा!!!😘
🙏👏👍एक प्यारी शायरी👍👌👏👏


जो मेरी प्रतिमा आँखो मे भिगोकर गढ होगा,
अकिंचन पाँव तब अगे तुम्हारा बढा लिया होता,
मेरी आँखो मे भी अंकित समर्पण की ॠचाए थी,
उन्हे अन्य कुछ अर्थ मील जाते,
जो तुमने पढ लिया होता ।।
****

Writen By : KM. Jaya

plize shear it 👌👍👏👏

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विधाता से एक प्रश्न करती है बेटी

कलयुग में विधाता से एक प्रश्न करती है बेटी
जिन पर करते थे विश्वास,
उन से जब आ- विश्वास मिले ,
जब फूलो को कलीयों को ,
पेड़ो से घाव मीले,
तब यह जग बतलाए ,बेटी कैसे करे विश्वास
कैसे तेरी बिटिया बन कर तेरे आँगन में आऊ माँ!
विधाता से छीन कर अपना सारा पुरुषार्थ लगा दूंगा कहते हो
मूझे भरोसा दिलाने में कि
"मर्द" होने से पहले "इंसान" होता है असली "पुरुष"!
पर कैसे मर्द आपनी इंसानीयत कैसे भूल जाता है ,हैवानीयत में।
तो तूम ही कहों , कैसे करू तूम पर विश्वास।
Writen By k.m jaya
#nojotophoto

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😘. तुमने पूछा है ?


😘



प्यारी कविता 😇😇😇😘👏👏👏
pliz अपना प्यार हम तक जरूर पहूचए।🙏🙏🙏🙏


तुमने पूछा है ?

तुम से पूछा है यह जिंदगी क्या है ,
दिल ही जाने की आरजू क्या है ,
तेरी सांसों का होना ही जिंदगी है मेरी l


तुमने पूछा है फिर रब कौन है ,
मैं नहीं जानती कि रब कौन है ,
खुद की आंखों में जो खुशी पाई ,
उसी में उस रब की छव पाई l
उसी गम में डूबी जो जिंदगी पाई ,ll

दिल, जिगर ,प्यार ,समर्प ण, का भाव पाकर भी ,
तुमको देने में कुछ कमी पाई l

ए खुदा सब कुछ तेरा ही तो है ,
तुम से ही सब कुछ पाया है मैंने ,
फिर भी तुझको देने में कुछ कमी पाया ,
तेरा तुझको अर्पण कर रही हूं ,
बस इसी में जिंदगी जीने की खुशी पाई ll

By KM. Jaya
#nojotophoto

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