ANAND KIEP

ANAND KIEP Lives in Motihari, Bihar, India

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"कल तुमसे नाराजगी आज गुफ्तगू हो गयी कल के सांचे में ढले नहीं आज सांचा ही बदल गयी"

कल तुमसे नाराजगी 
आज गुफ्तगू हो गयी

कल के सांचे में ढले नहीं 
आज सांचा ही बदल गयी

#Shayari

123 Love

हे पुस्तके तू ही तो दर्पण तू ही तो तर्पण तू ही मेरे कृपाण

122 Love
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"जब हमारे अंदर ज़िन्दगी की समझ विकसित होने लगती हैं तब हम अध्यात्म की ओर अग्रसर होने लगते हैं और हमारे जीवन से शिकायतें कम होने लगती हैं।"

जब हमारे अंदर ज़िन्दगी की समझ विकसित  होने लगती हैं तब हम अध्यात्म की ओर अग्रसर होने लगते हैं और हमारे जीवन से शिकायतें कम होने लगती हैं।

#जीवन

117 Love

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""*#* हे पुस्तक *#*" हे पुस्तक तू ही तो दर्पण तू ही तो तर्पण तू ही मेरे कृपाण तू ही मेरे जीवन के व्याकरण तू ही मेरे हाथों के बाण तेरे जो आया शरण कर्म को किया अर्पण खुद को किया समर्पण उसके दु:खों को किया तुने हरण तेरा जो किया प्रण वह रह न सका मन से रुग्ण उसके हुए नये अवतरण ------ ANAND KUMAR"

"*#* हे पुस्तक *#*"

हे पुस्तक
तू ही तो दर्पण
तू ही तो तर्पण
तू ही मेरे कृपाण 

तू ही मेरे जीवन के व्याकरण
तू ही मेरे हाथों के बाण 

तेरे जो आया शरण 
कर्म को किया अर्पण
खुद को किया समर्पण
उसके दु:खों को किया तुने हरण

तेरा जो किया प्रण
वह रह न सका मन से रुग्ण
उसके हुए नये अवतरण
------ ANAND KUMAR

#हेपुस्तक

110 Love

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"अलग होना भी ज़रूरी था, उन बुरी नज़रों से बचना भी ज़रूरी था हक़ीक़त ए ख़्वाब ही सही ऐसा होना भी ज़रूरी था"

अलग होना भी ज़रूरी था,
उन बुरी नज़रों से 
बचना भी ज़रूरी था
हक़ीक़त ए ख़्वाब ही सही 
ऐसा होना भी ज़रूरी था

#Shayari

90 Love