Dhruv Bali aka Darvesh Danish

Dhruv Bali aka Darvesh Danish Lives in Ahmedabad, Gujarat, India

A Renowned Author , Shayar, Lyricist, Composer, Comparee, Ghazal writer, Singer , Trainer, Graphologist, Vastu Shastri , Consultant, Motivational speaker & Technocrat. Contact n Whatsapp --8754822401.

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"Happy Holi दोस्ती और मुहब्बत का अबीर गुलाल रहे हरियाली चेहरों की इस साल बेमिसाल रहे सुनहरे सूरज का भी पूरा रंगो जमाल रहे दिल सभी का उमंगों से मालामाल रहे दफन हो जायें सब के बीच के फासले भी ऐ ऊपर वाले इस होली पर कुछ ऐसा कमाल रहे"

Happy Holi  दोस्ती और मुहब्बत का अबीर गुलाल रहे
हरियाली चेहरों की  इस साल बेमिसाल रहे
सुनहरे सूरज का भी पूरा  रंगो जमाल रहे 
दिल सभी का  उमंगों से मालामाल रहे 
दफन हो जायें सब के बीच के फासले भी
ऐ ऊपर वाले इस होली पर कुछ ऐसा कमाल रहे

#होली की शुभकामनाएं

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"ललकार कह दो जाकर देश के सारे जय चंदो गद्दारों से नहीं बंटा है नहीं बंटे गा देश ये झूठे नारों पे आओ याद रखें ना भूलें ,लहूलुहांन उस घरती को वीर जवानों का बलिदां उस पुलवामा के शानों पे आतंकवाद से डर कर रहना नहीं कोई मजबूरी है नहीं रुकेंगे नहीं सहेंगे खेल जायेंगे प्रा णों पर अभिनंदन का अर्थ शौर्य है परिभाषित नव भारत मैं जिसने साहस को तोला है दुश्मन की तलवारों पे अब न सुनेंगे बात तुम्हारी चैनो अमन के रखवाले नाच रहे तुम. शत्रु देश के नीच निक्रिष्ट इशारों पे वीर जवानों के बलिदान को तुम क्या खाक समझ पाओगे बेच आये हो देशभक्ति तुम सत्ता के बाज़ारों पे ये भी नहीं समझ पाये तुम पिछले 70 सालों में भ्रष्टाचार तुम्हारा लाया ,देश को इन अंगारों पे राफेल मांग रही है सेना उस पर राजनीति करते हो शऱम करो तुम सोच पे अपनी , अपने तुच्छ विचारों पे कह दो जाकर देश के सारे जय चंदो गद्दारों से नहीं बंटा है नहीं बंटे गा देश ये झूठे नारों पे...... #NojotoQuote"

ललकार
कह दो जाकर देश के  सारे जय चंदो  गद्दारों से
नहीं बंटा है नहीं बंटे गा  देश ये  झूठे नारों पे
आओ याद रखें ना भूलें ,लहूलुहांन उस घरती को
वीर जवानों का बलिदां उस पुलवामा के शानों  पे
आतंकवाद से डर कर रहना नहीं कोई मजबूरी है
नहीं रुकेंगे नहीं सहेंगे खेल जायेंगे प्रा णों  पर
अभिनंदन का अर्थ शौर्य है परिभाषित नव भारत मैं
जिसने साहस को तोला है दुश्मन की  तलवारों पे
अब न सुनेंगे बात तुम्हारी चैनो अमन के  रखवाले
नाच रहे तुम.    शत्रु  देश  के  नीच निक्रिष्ट इशारों पे
वीर जवानों के बलिदान को तुम क्या खाक समझ पाओगे 
बेच आये हो  देशभक्ति  तुम सत्ता के बाज़ारों पे
ये भी नहीं समझ पाये तुम पिछले 70 सालों में
 भ्रष्टाचार तुम्हारा  लाया  ,देश को इन अंगारों पे
राफेल मांग रही है सेना उस पर राजनीति करते हो
शऱम  करो  तुम सोच पे  अपनी , अपने तुच्छ विचारों पे
कह दो जाकर देश के  सारे जय चंदो  गद्दारों से
नहीं बंटा है नहीं बंटे गा  देश ये  झूठे नारों पे...... #NojotoQuote

ललकार

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"मंजिलें वो भी उसने तय की हैं, जो थीं नामुमकिन, उसने ज़मींन को , आसमान करके रखा है... मेरे वजूद का एक हिस्सा है वो भी दानिश पर मेरी जिंदगी को इक इम्तहान कर के रखा है सच को सच ही कहता है, झूठ बोलता ही नहीं, सारी बस्ती को भी पशेमान करके रखा है... ये दुनिया इश्क को कत्ल करने पे आमादा है, उसने इस दिल को इश्क का सामान करके रखा है.. मुझसे क्या पूछते हो , मुझको पता है उसका पता मेरे साथ ही उसने , अपना मकान करके रखा है.. वो आप ही के अंदर है, उसको कहते हैं ज़मीर, जिसने इंसान को आज भी, इंसान करके रखा है...."

मंजिलें वो भी उसने तय की हैं, जो थीं नामुमकिन, 
उसने ज़मींन को ,  आसमान करके रखा है... 
मेरे वजूद का एक हिस्सा है वो भी दानिश 
पर मेरी जिंदगी  को इक इम्तहान  कर के रखा है
सच को सच ही कहता है, झूठ बोलता ही नहीं, 
सारी बस्ती  को  भी पशेमान करके रखा है... 
ये दुनिया इश्क को कत्ल करने पे आमादा है, 
उसने इस दिल को इश्क का सामान करके रखा है.. 
मुझसे क्या पूछते हो , मुझको पता है उसका पता
मेरे साथ ही उसने , अपना मकान करके रखा है.. 
वो आप ही के अंदर है,  उसको कहते हैं ज़मीर, 
जिसने इंसान को आज भी, इंसान करके रखा है....

कौन है वो

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"वो पलकों पे ठहरे हुए चंद लम्हे कि जिनमें चाहत का इक आसमां था उसी से चिरागों मे थी रौशनी भी उसी से तो रौशन ये सारा जहां था जिसे तुम कयामत समझते रहे थे वही तो खुशी का छुपा सायबां था वो झुकती निगाहें, वो दिलकश अदाएं यही फ़लसफ़ा था यही इम्तेहां था वो नज्मों में ढलते हुए चंद लम्हे जिन्हें तुमने छू कर कहीं कुछ कहा था हैं मेरी अमानत वो अहसास तेरे, जिन्होंने बसाया मेरा आशियां था मेरी ये गज़ल सिर्फ मेरी नहीं है इसे तुमने सदियों से पहले लिखा था मेरे सारे जज़बात तुमसे जवां हैं तुम्हीं ने तो इनको मुहब्बत कहा था #NojotoQuote"

वो पलकों पे ठहरे हुए चंद लम्हे
कि जिनमें चाहत का इक आसमां था
उसी से चिरागों मे थी रौशनी भी
उसी से तो रौशन ये सारा जहां था
जिसे तुम कयामत समझते रहे थे
वही तो खुशी का छुपा सायबां था
वो झुकती निगाहें, वो दिलकश अदाएं
यही फ़लसफ़ा था यही इम्तेहां था
वो नज्मों  में ढलते हुए  चंद लम्हे
जिन्हें तुमने छू कर कहीं कुछ कहा था
हैं मेरी अमानत वो अहसास तेरे,
जिन्होंने बसाया मेरा आशियां था
मेरी ये गज़ल सिर्फ मेरी नहीं है
इसे तुमने सदियों से पहले लिखा था
 मेरे सारे जज़बात तुमसे जवां हैं
तुम्हीं ने तो इनको मुहब्बत कहा था

 #NojotoQuote

मुहब्बत

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"मेहरबानी कर दो जो नज़र देख ले दानिश उसको गज़ब की हैरत हो, अपनें अंदाज़े बयां से लफ्जों में, ऐसा इक असर भर दो... तवारीख़ में हो जिक्र जिसका ऐसी काबिलियत , ये अशआर जो भी समझे उसमें ऐ अक़बर भर दो.. ऐसा कुछ लिख दो कि वक्त भी बेशक उसे अपना माने , कायनात संभल जाये कुछ ऐसा वक्त पर कर दो.... लोग तनहा हों तो सबक़ लें औ सब्र से जीना सीखें , इस तरह की हकीकत , मेरे किस्सों में बा बशर भर दो... वो जो लाखों के काम आये , हर सदी में हर तरीके से, ऐसे मरहम को मेरी नज्मों में, मेरे मौला काबिज़ कर दो... मैं तो बस तेरा मुलाजिम हूं और तुझसे क्या मांगूं मिटा दो स्याह रातों को, दिलों में खुशनुमा सहर भर दो.. #NojotoQuote"

मेहरबानी कर दो
जो नज़र  देख  ले दानिश उसको गज़ब की हैरत हो, 
अपनें अंदाज़े  बयां से लफ्जों में, ऐसा इक असर  भर दो...
तवारीख़ में हो जिक्र जिसका ऐसी काबिलियत , 
ये  अशआर जो भी समझे उसमें ऐ अक़बर भर  दो.. 
ऐसा कुछ  लिख दो कि वक्त भी बेशक उसे अपना माने , 
कायनात संभल जाये कुछ ऐसा वक्त पर कर दो.... 
लोग तनहा हों तो  सबक़ लें औ सब्र से जीना  सीखें ,
इस तरह की हकीकत ,  मेरे किस्सों में बा बशर  भर दो...
वो जो लाखों के काम आये , हर सदी में हर तरीके से, 
ऐसे मरहम को मेरी नज्मों  में, मेरे मौला काबिज़ कर दो...
मैं तो बस तेरा मुलाजिम हूं और  तुझसे क्या  मांगूं
मिटा  दो स्याह रातों को, दिलों में खुशनुमा  सहर भर दो.. #NojotoQuote

रहमत

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