SUBHAM KUMAR

SUBHAM KUMAR Lives in Jamshedpur, Jharkhand, India

मैं लिखता हूं इसलिए , मैं हूं......

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"इन शहरों के हवाओं से खुद को बचाएं रखे हैं, बड़ी इमारत और कारखानों के बीच शहर में एक छोटा सा गांव बसाए रखे है। सालो पहले लगाया नीम के पेड़ अब बड़ा हो चुका है, अब उसी नीम के छाव में एक छोटा खाट लगाए बैठे है। केवल कुछ ही मिनट के बत्ती गुल में लोग हंगामा कर जाते है, और मैं हूं जो रात में बिजली बुझा डीबरी जलाए बैठे है। इन ठंड के दिनों में ये शहरी लोग ना जाने कौन सा मशीन से अपने घर को गरमाए बैठे है, मैं तो गोबर के गोयथा जला अपना हाथ तपाए बैठे है। नशे के रूप में ये कैसा सफेद पाउडर और बड़ी बोतल अपने टेबल में सजाए बैठे हैं, और एक में हूं ना जाने क्यों मिट्टी के चूल्हे में चड़ी चाय को नशा माने बैठे है। -subham"

इन शहरों के हवाओं से खुद को बचाएं रखे हैं,
बड़ी इमारत और कारखानों के बीच शहर में एक छोटा सा गांव बसाए रखे है।

सालो पहले लगाया नीम के पेड़ अब बड़ा हो चुका है,
अब उसी नीम के छाव में एक छोटा खाट लगाए बैठे है।

केवल कुछ ही मिनट के बत्ती गुल में लोग हंगामा कर जाते है,
और मैं हूं जो रात में बिजली बुझा डीबरी जलाए बैठे है।

इन ठंड के दिनों में ये शहरी लोग ना जाने कौन सा मशीन से अपने घर को गरमाए बैठे है,
मैं तो गोबर के गोयथा जला अपना हाथ तपाए बैठे है।

नशे के रूप में ये कैसा सफेद पाउडर और बड़ी बोतल अपने टेबल में सजाए बैठे हैं,
और एक में हूं ना जाने क्यों मिट्टी के चूल्हे में चड़ी चाय को नशा माने बैठे है।

-subham

 

9 Love

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"राते बुलाती है, हवाएं पुकारती है, तारे हंसती है, चांद चिढाती है और क्या बोलूं जब तुम मेरे साथ नहीं होती तो क्या क्या जुल्मे मेरे साथ होती है"

राते बुलाती है, हवाएं पुकारती है, तारे हंसती है, चांद चिढाती है और क्या बोलूं जब तुम मेरे साथ नहीं होती तो क्या क्या जुल्मे मेरे साथ होती है

 

6 Love

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"बहुत दिनों बाद आज बिना अंधेरे का रात हुआ है जो दिन के उजाले में दिखता था आज वह परछाई रात में दिखा"

बहुत दिनों बाद आज बिना अंधेरे का रात हुआ है
जो दिन के उजाले में दिखता था आज वह परछाई रात में दिखा

#चंदनी_रात

6 Love

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"शाम की धूप में तुम यूं कभी दिख जाना, बस नज़रों की तो बात है मिला के चले जाना।"

शाम की धूप में तुम यूं कभी दिख जाना, बस नज़रों की तो बात है मिला के चले जाना।

 

6 Love

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"तुम लबों से वार और आंखों से कतल- ए- आम कर देती हो, कसम से लाल साड़ी में तुम यूपी को बिहार कर देती हो। यूं तो तुझमें कोई ऐब नहीं है गालिब, पर ना जाने क्यों दो रुपए की बीड़ी से अपनी आंखे लाल कर लेती हो।"

तुम लबों से वार और आंखों से कतल- ए- आम कर देती हो,
कसम से लाल साड़ी में तुम यूपी को बिहार कर देती हो।
यूं तो तुझमें कोई ऐब नहीं है गालिब,
पर ना जाने क्यों दो रुपए की बीड़ी से अपनी आंखे लाल कर लेती हो।

#sasti_sharyi

5 Love