INDRAJEET KUMAR ,

INDRAJEET KUMAR ,

गीतकार , कवि, लेखक

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"सूरज उगता है तो जग उजाली लगती हैं यदि सूरज डूबे तो ये धरा काली लगती हैं ये धरा हमारी जान हैं ये धरा हमारी शान हैं अगर इसे सवारे रहे तो ये धरा निराली लगती हैं Earth day 22april"

सूरज उगता है तो जग उजाली लगती हैं 
यदि सूरज डूबे तो ये धरा काली लगती हैं 
ये धरा हमारी जान हैं ये धरा हमारी शान हैं 
अगर इसे सवारे रहे तो ये धरा निराली लगती हैं


Earth day 
22april

#Earth_Day_2020 आओ मिलकर धरा बचाये

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"पल के जिनके आंचल में मेरे उदय हुये थे भाग कभी खिलाती थी दूध रोटी कभी खिलाती थी मेथी पालक की साग मां तुम मां हो इस नन्ही सी दुनिया में तुम प्यारी सी जहां हो मां तुम मां हो"

पल के जिनके आंचल में 
मेरे उदय हुये थे भाग 
कभी खिलाती थी दूध रोटी 
कभी खिलाती थी मेथी पालक की साग मां तुम मां हो 
इस नन्ही सी दुनिया में 
तुम प्यारी सी जहां हो 
मां तुम मां हो

नयी कलम से - मेरी प्यारी माँ

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"पलको में झिलमिलाहट सासो में धीमा पन न जाने क्या क्या छा रहा है उमर ढल जाने की न जाने खबर अब याद आ रहा है"

पलको में झिलमिलाहट 
सासो में धीमा पन 
न जाने क्या क्या छा रहा है 
उमर ढल जाने की 
न जाने खबर अब 
याद आ रहा है

सच्चाई है

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"बचपन में जो देखा है वो सपना कब आयेगा जो रात सदियों से है वो अंधेरा कब जायेगा यू बदलते रहते हैं दिन को रात में पर सदियों तक सबेरा कब आयेगा"

बचपन में जो देखा है वो सपना कब आयेगा 
जो रात सदियों से है वो अंधेरा कब जायेगा 
यू बदलते रहते हैं दिन को रात में 
पर सदियों तक सबेरा कब आयेगा

नया सबेरा कब आयेगा

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"बाग बगीचे औ चौबारे खेल खिलौने आंगन की क्या होगा कीमत ,आ जाये वापस दिन वो मेरे बचपन की साथ में हंसी और ठिठोली भी बचपन की पहली बोली भी क्या होगी कीमत, उन लोगों की जिनमें चाहत होती अपने पन की"

बाग बगीचे औ चौबारे 
खेल खिलौने आंगन की  
क्या होगा कीमत ,आ जाये वापस 
दिन वो मेरे बचपन की  
साथ में हंसी और ठिठोली भी 
बचपन की पहली बोली भी 
क्या होगी कीमत, उन लोगों की 
जिनमें चाहत होती अपने पन की

बचपन भी प्यारा दिन था

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