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surjeetsinghgowa8915
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अजनबी

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अजनबी

अब हम खुद से खुद का हाल लेते हैं ,
थोड़े बहुत ख्वाब हम भी पाल लेते हैं ।

इश्कबाजी में नफा नुकसान कौन देखता है , 
 लो  हम  अपनी  मिसाल  देते  हैं......

फैसला करो ये बला किसके हिस्से आई , 
चलो   सिक्का उछाल  लेते  हैं......

वफा, जफा ,इश्क ,ना इनके बस की बात नहीं ,
इनसे  मिलिए ये  धोखे  कमाल  देते हैं..... 

वो कुछ इस तरह से रुखसत करते हैं ,
बो, वो जैसे दूध से मक्खी निकाल देते हैं....

रूह, धड़कन, सांसे ,रवानी सब नाबूत ,
 मरने नहीं देते बस कलेजा निकाल लेते हैं...... 

थोड़े बहुत ख्वाब हम भी पाल लेते हैं....!

©अजनबी #boatclub
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अजनबी

अब हम खुद से खुद का हाल लेते हैं ,
थोड़े बहुत ख्वाब हम भी पाल लेते हैं ।

इश्कबाजी में नफा नुकसान कौन देखता है , 
 लो  हम  अपनी  मिसाल  देते  हैं......

फैसला करो ये बला किसके हिस्से आई , 
चलो   सिक्का उछाल  लेते  हैं......

वफा, जफा ,इश्क ,ना इनके बस की बात नहीं ,
इनसे  मिलिए ये  धोखे  कमाल  देते हैं..... 

वो कुछ इस तरह से रुखसत करते हैं ,
बो, वो जैसे दूध से मक्खी निकाल देते हैं....

रूह, धड़कन, सांसे ,रवानी सब नाबूत ,
 मरने नहीं देते बस कलेजा निकाल लेते हैं...... 

थोड़े बहुत ख्वाब हम भी पाल लेते हैं....!

©अजनबी #boatclub
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अजनबी

White प्रेम ...? 

चक्षुओ के मिलन को...
हृदय की अगन को....
वाणी के संतुलन को...
उसके चिंतन मनन को...
स्पर्श के व्यसन को...
हर्ष के उन्मूलन को...
ख्यालों में खोए मन को..
वियोग के रूदन को...
भावनाओ के हनन को...
बंधनों के समन को...
तोड़ोगे या धार में बहोगे
इसे आकर्षण नाम दोगे या प्रेम कहोगे।।

©अजनबी
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अजनबी

" अप्रत्याशित "

सीधे सीधे नाम बता दूं !
  या  पहले  संकेत करू ?
जिह्वा को निश्लता दूं  !
बोलो तो नाद निषेध करू? 
क्रमवार रखू उपक्रम सारे ! 
या काट छाट भी करना है ? 
 पारदर्शी प्रतिबिंब बना दूं !
 चाहो तो प्रतिषेध करू ? 
 मैं जल दर्पण की भाती हूं !
मुझसे नहीं विनोद करो ?
मैं बिंब विहीन ना हो जाऊ ! 
इतना नहीं अबोध करो ? 
 जल छुओ नहीं तो विंब बने ! 
स्पष्ट अधिक सुंदरता से !
स्थिरता प्राणवायु मेरी! 
 मुझे नहीं दुर्बोध करो ??

©अजनबी #snowpark
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अजनबी

ज्यों हार के पहले किया एक आखिरी प्रयास हो, 
मात खाकर गिर गए का तुम नया उल्लास हो, 
जब लगा कि घिर रहा हूं फिर नहीं आफत से मैं, 
जो गर्त से बाहर निकाले ईश्वरीय आभास हो।

प्राणहीन से हो चले की चेतना तुम स्वास हो, 
ज्यों बंद पिंजरे के कबूतर के लिए आकाश हो, 
तम के बादल फिर छटेंगे दृढ़ हुआ विश्वास हो, 
शाब्दिक समर्थ के स्पर्श से जो दूर है....
 भावना में तर - बतर अनकहां एहसास हो ।

मौन वाणी के स्वरों का सार्थक सारांश हो, 
मुझ में मेरा कुछ नहीं तुम मेरा अधिकांश हो, 
कल शिखर को छू गया भूला भटक में अगर, 
महफिलों में, मैं कहूंगा तुम मेरा श्रेयांश हो ।।

अजनबी "सुरजीत "

©अजनबी 
  #FallAutumn
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अजनबी

" राही " 

एक बस्ता चंद ख्वाब गमछा डाले निकल पड़ा ,
तुम  सब  रहो  पिंजरो  में  राही  तो  चल  पड़ा ,

साथ चिड़ियों का ,बात बदल से ,
 मशरूफ आज मे,बेफिक्र कल से ,
नदियों के किनारे तारे-सितारे फीका है महल बड़ा ,
 तुम सब रहो पिंजरो में राही तो चल पड़ा ....

झरनों का सुर , नदियों का संगीत  ,
पत्थरों  के  वाद्य , चिड़ियों के गीत ,
 बंदिश बड़ी लंबी है पर राही अटल बड़ा ,
 तुम सब रहो पिंजरो में राही तो चल पड़ा ,

गाता   गुन - गुनाता  ,  रास्ते  बनता ,
सफर में ही जीता,सफर को सजाता ,
 अकेला  चला  था  अब है दल बड़ा  ,
तुम सब रहो पिंजरो में राही तो चल पड़ा ।।

©अजनबी #sadak
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अजनबी

शोर तो बहुत हैं  पर जैसे सन्नाटा व्याप्त हो,
आकांक्षाओं के बादल अपेक्षाओं की घटाएं निराशाएं प्राप्त हो,
तिरस्कार के थपेड़े जब सहजता की चादर ना झेल पाए,
जैसे मन का धीरज मन को ही खा जाए,
 बेमोल हो जाए जब अश्रु धारा,
तिनका भी छोड़ दे जब सहारा,
"सुनो"-  डूबते तुम क्या करोगे,
स्वास सहेजोगे या तिल - तिल मरोगे?

©अजनबी #Sawera
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अजनबी

4. भैया मैं बहन तुम्हारी, वनवासियों की अद्भुत नारी,
     लंका की रानी बनाओ, भैया सीता को हर लाओ  ,
     मरीच की माया स्वर्ण हिरण, 
    लक्ष्मण की रेखा सीता हरण, 
    रावण क्रुध , जटायु से युद्ध ....
   गिद्ध के भाग जागे राम की गोद प्राण त्यागे 
  
5. श्री राम लखन हनुमत से मिलन 
   सुग्रीव कॉ ओज , सीता की खोज  ,
    नल नील महान ,सेतु निर्माण ,
   अशोक वाटिका, अक्षय कुमार का वध किया ,
   राक्षसों का  नाश , लंका का विनाश  ,
   इंद्रजीत मारा , कुंभकरण संहारा 
  असत्य पर सत्य भारी अब रावण मरण की  तैयारी...

6. भीषण युद्ध , श्री राम क्रुद्ध ,
    वान , कृपान ,  गदा हनुमान  ,
   दस सीस बीस भुजाए , कैसे मार गिराए ,
   विभीषण ने समझाया , नाभि का भेद बताया,
   लाल हुआ गगन, थम गई पवन ,
  पृथ्वी डोली, शिव ने समाधि खोली ,
  चारों ओर विनाश, रावण का अट्टहास ,
  अग्नि बाण चलाया , प्रभु ने रावण मार गिराया ,
              
                  7. राम की दीक्षा , सिय की अग्नि परीक्षा ,
                      राम सीता मिलन , राजा विभीषण ,
                      देवताओं ने पुष्प बरसाए ,
                     पुनः प्रभु अवध को आए ।।
                     

                  " पुनि पुष्पक चढ़ी कपिह्न समेता ,
                            अवध चले प्रभु कृपा निकेता ।।".
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©अजनबी
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अजनबी

देवासुर संग्राम याद है जब दशरथ हुये अभागे थे,
कैकई मां ने प्राण बचाकर वरदान दो उनसे मांगे थे।

1. षड्यंत्र की आग , अयोध्या के अभाग ,
     मंथरा का मरम , कैकई का मतिभ्रम ,
    खुशियों का अंत ,  अंधकार अनंत ,
     दशरथ हुए साहस, चारों ओर विनाश,
    भारत का तिलक ,राम को वनवास  ।

2.  हुआ वन गमन ,राम वैदेही और लखन ,
     वन पर्वत प्रभास , चित्रकूट में वास ,
     केवट के भाग्य न्यारे, प्रभु के पांव पखारे ,
     गंगा की धारा , केवट ने पर उतारा ,
     बरगद की छांव , निषाद का गांव ,
     भारत का आगमन , प्रभु से मिलन ,
    अश्रु बहुत बहाए, पादुका सर ले आए ,
   कुछ दिन ढले ,  अब प्रभु आगे चले ...
 
3.  मुनि अगस्त का संग , दंडक का वन ,
     ऋषियों को निर्भय, प्रभु पंचवटी में बस गए ,
     सूर्पनखा की दृष्टि , लक्ष्मण की चढ़ी भृकुटी ,
     क्रोध से निकला कृपान , काट दिए नाक कान , 
     शूर्पणखा के भाई  , खरदूषण संग ले आई  ,
     प्रभु ने एक बाण संहार , सेना सहित खरदूषण को मारा ,
    प्रभु से जीत न पाई , अब सूर्पनखा लंका आई .....

©अजनबी #NojotoRamleela
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अजनबी

" रहस्य " 

मेरी आंखों के  सम्मुख ही है पर जैसे ओझल है ,
मृगमारीचिका जैसी है लगती जल है होती थल है ,

पढ़ो उसे तो उपन्यास कभी कविता कभी गजल है ,
 मानो झील सी स्थिर है कभी लहरों सी विहल है ,

नौसिखिये सी आतुरता तो धैर्य धरने में कुशल है ,
स्वीकार लेती है सहजता से तो कभी आइडियल है ,

 जैसे सर्द में दूर कहीं जलती आग हो ...
 ऊष्म मिजाजी है स्वभाव से शीतल है  ,

जैसे दुर्गम वनों में ऊपजी जड़ी हो ...
सुगंध जो दूर तक फैले हां बासमती चावल है ,

कठिन ऐसे जैसे गणित का सवाल हो...  
" अजनबी " वह स्वयं अपना हल है  ,

इतना सामर्थ मुझ में नहीं की पढ़ सकूं ...
 जितना समझा धसता गया वो लड़की नहीं दलदल हैं।।

©अजनबी #Women
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