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pooja7092330500628
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Parastish

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Parastish

White ये  बर्ग, ग़ुंचे,  बहार-ओ-चमन  वहीं  के  हैं 
ज़मीं है  जन्नती  जिस की  उसी  हसीं के हैं  

ये कहकशाँ, ये सितारे, तजल्लियाँ ओ मह  
ये  ज़ाविए  उसी  की  नुक़रई  जबीं  के  हैं 

हैं  रौनकें उसी की  चश्म-ए-आब-दारी  से  
ये धुँदलके उसी की  चश्म-ए-सुर्मगीं  के हैं 

बनफ़्श  आसमाँ  हो  या हो  सौसनी  झीलें 
तिलिस्म ये उसी की  चश्म-ए-नीलमीं  के हैं 

फ़लक की गोद में  बिखरे  ये अब्र के  फाहे
ख़याल-ओ-ख़्वाब उसी हुस्न-ए-मर्मरीं के हैं

ये  ख़ुशबुएँ, ये परिंदे, ये  तितलियाँ,  जुगनू 
असीर  बस उसी के  जिस्म-ए-संदलीं के हैं 

लरज़ती शाख़  के दामन में  ओस के  मोती 
अरक़ हैं जो उसी रुख़्सार-ए-मह-जबीं के हैं

©Parastish तजल्लियाँ - lightnings, मह - moon 
ज़ाविए - angles
नुक़रई -made of silver
चश्म- eye आब-दारी - brightness 
बनफ़्श/सौसनी - Blue colour 
नीलमीं - sapphires,असीर - prisoner
संदलीं - made of sandal wood, अरक़ - sweat, essence

तजल्लियाँ - lightnings, मह - moon ज़ाविए - angles नुक़रई -made of silver चश्म- eye आब-दारी - brightness बनफ़्श/सौसनी - Blue colour नीलमीं - sapphires,असीर - prisoner संदलीं - made of sandal wood, अरक़ - sweat, essence

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Parastish

लगाना  रंग  कुछ  ऐसे  मिरे  दिल-दार  होली  पर
करे  दो चार को घायल  सर-ए-बाजार  होली  पर

हवा  में  हो  उठे  हल-चल, बहारें  रश्क  कर  बैठें 
यूँ  सर से पा  लगूँ  मैं  प्यार में  गुल-बार  होली पर 

निगाहों से छिड़क देना  यूँ चश्म-ए-शोख़ का जादू 
लगें  मय का कोई प्याला  मिरे अबसार  होली पर 

लबों की सुर्ख़ रंगत को, यूँ मलना तुम मिरे आरिज़ 
कि तितली गुल समझ के चूम ले रुख़्सार होली पर 

अबीरों ओ गुलालों से, हो  फ़नकारी  मुसव्विर सी 
धनक आ के गिरे  दामन में अब के बार  होली पर

©Parastish
  चश्म-ए-शोख़ - lovely eyes 
अब्सार - आँखें
आरिज़ - रुख़्सार/गाल
फ़नकारी - कलाकारी/ artistry 
मुसव्विर - चित्रकार/painter 
धनक - इंद्रधनुष/rainbow
#Holi #Shayari #ghazal #parastish #Poetry

चश्म-ए-शोख़ - lovely eyes अब्सार - आँखें आरिज़ - रुख़्सार/गाल फ़नकारी - कलाकारी/ artistry मुसव्विर - चित्रकार/painter धनक - इंद्रधनुष/rainbow Holi Shayari ghazal parastish Poetry

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Parastish

शराब  जैसी  हैं  उसकी  आँखें,  है  उसका  चेहरा  किताब  जैसा
बहार  उस  की  हसीं  तबस्सुम,  वो  इक   शगुफ़्ता  गुलाब  जैसा

वो ज़ौक़-ए-पिन्हाँ, वो सबसे वाहिद, वो एक इज़्ज़त-मआब जैसा
वो रंग-ए-महफ़िल, वो नौ बहाराँ, वो नख़-ब-नख़ है  नवाब  जैसा 

उदास  दिल  की  है  सरख़ुशी  वो,  वो  ज़िन्दगी के  सवाब  जैसा
वो  मेरी  बंजर सी  दिल  ज़मीं  पर,  बरसता है  कुछ सहाब जैसा

कभी   लगे    माहताब   मुझ  को,  कभी   लगे   आफ़ताब  जैसा
हक़ीक़तों की  तो  बात  छोड़ो, वो  ख़्वाब में भी  है  ख़्वाब  जैसा

न वो शफ़क़ सा, न बर्ग-ए-गुल सा, न रंग वो  लाल-ए-नाब जैसा 
जुदा  जहां का  वो रंग  सबसे,  है  उसके  लब  का  शहाब  जैसा

उसी  से  शेर-ओ-सुख़न  हैं  मेरे, उसी  से  तख़्लीक़  मेरी   सारी 
वो अक्स-ए-रू  है  मेरी  ग़ज़ल का,  मेरे  तसव्वुर के  बाब जैसा

©Parastish शगुफ़्ता - cheerful 
ज़ौक़-ए-पिन्हाँ - hidden desire
वाहिद - unique 
इज़्ज़त-मआब- most esteemed; respected
नख़-ब-नख़ - row by row, line by line 
सरख़ुशी - happiness
सवाब - reward 
सहाब - a cloud
बर्ग-ए-गुल- leaf of flower, petal
शफ़क़ - evening twilight
लाल-ए-नाब - clear ruby
शहाब- red colour
तख़्लीक़- creation
बाब - door, chapter

#ghazal #sher #Shayari #parastish

शगुफ़्ता - cheerful ज़ौक़-ए-पिन्हाँ - hidden desire वाहिद - unique इज़्ज़त-मआब- most esteemed; respected नख़-ब-नख़ - row by row, line by line सरख़ुशी - happiness सवाब - reward सहाब - a cloud बर्ग-ए-गुल- leaf of flower, petal शफ़क़ - evening twilight लाल-ए-नाब - clear ruby शहाब- red colour तख़्लीक़- creation बाब - door, chapter #ghazal #sher Shayari #parastish

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Parastish

ताश के खेल- सा इश्क़ अपना
दिल मिरा है मगर हुक्म उनका

©Parastish
  #sher #Shayari #Quotes #parastish #taash #Dil #ishq
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Parastish

जहाँ  की  भीड़  में  यकता  दिखाई   देता  है 
वो  एक  शख़्स  जो  प्यारा  दिखाई  देता  है

कभी  वो चाँद  जमीं का  मुझे है आता नज़र 
कभी  वो  आईना  रब  का  दिखाई  देता  है

वो ख़ामुशी भी है सुनता  मिरी सदा की तरह
वो   रूह  तक  से   शनासा  दिखाई  देता  है

उसी  के  प्यार में है  दिल की  धड़कनें  रेहन
फ़सील-ए-दिल  पे जो  बैठा  दिखाई  देता है

वो साज़-ए-हस्ती की छिड़ती हुई कोई सरगम
लब- ए- हयात   का  बोसा  दिखाई   देता  है

©Parastish
  यकता - अनुपम, अनोखा
सदा - आवाज़ 
शनासा- परिचित 
रेहन - क़ब्ज़े में होना 
फ़सील-ए-दिल - दिल की मुंडेर
साज़-ए-हस्ती - ज़िन्दगी का संगीत
हयात - ज़िन्दगी, बोसा - चुंबन 

#ghazal #sher #Shayari #Quotes #parastish #hindi_poetry

यकता - अनुपम, अनोखा सदा - आवाज़ शनासा- परिचित रेहन - क़ब्ज़े में होना फ़सील-ए-दिल - दिल की मुंडेर साज़-ए-हस्ती - ज़िन्दगी का संगीत हयात - ज़िन्दगी, बोसा - चुंबन #ghazal #sher #Shayari #Quotes #parastish #hindi_poetry

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Parastish

गर  साल  तरह  ही  जो  अहवाल बदल जाते
तो ज़ीस्त के  भी अपने  अश्काल बदल  जाते 

अफ़सुर्द मिरे दिल को  जो मिलता तिरा दामन
तक़दीर  बदल  जाती, तिमसाल  बदल  जाते

शतरंज सा  होता  कुछ  ये  खेल  मुहब्बत का
गर मिलती सिपर हमको हम चाल बदल जाते

इन  सर्द- सी  रातों  में  हो  तन्हा  बसर  कैसे
उफ़  हिज्र के ये मौसम  फ़िलहाल बदल जाते

ये दौर-ए-गम-ए-दिल का बस ख़त्म नहीं होता 
इक बार तो क़ुदरत के अफआ'ल बदल जाते

©Parastish
  अहवाल - हालात
अश्काल - सूरतें
तिमसाल - तस्वीर
अफआ'ल - काम/ actions 

#Ghazal #Quotes #parastish #sher #Shayari #Poetry #NewYearQuotes

अहवाल - हालात अश्काल - सूरतें तिमसाल - तस्वीर अफआ'ल - काम/ actions #ghazal #Quotes #parastish #sher #Shayari Poetry #NewYearQuotes

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Parastish

ख़्वाब इक उनके ही आँखों में बसा करते हैं
रत-जगे हों भी तो बस वो ही दिखा करते हैं

ये शब-ओ-रोज़ नहीं  यूँ  ही चराग़ाँ है सनम
शम्अ बन कर  तिरी यादों में  जला करते हैं

रूठा रूठा सा है अब चाँद फ़लक का हमसे
क्यूँ कि हम  चाँद जमीं पर है, कहा करते हैं

प्यार में  जिस्म से  आती है  गुलों-सी खुशबू
लोग  लम्हों  के   ख़याबाँ  में   रहा  करते  हैं

हम को मालूम न मस्कन या ठिकाना अपना 
हम तो बस इश्क़ में गुम-गश्ता फिरा करते हैं

©Parastish
  शब-ओ-रोज़= रात और दिन
ख़याबाँ= बाग़
मस्कन= घर 
गुम-गश्ता= गुम-शुदा, खोया हुआ

#ghazal #sher #Shayari #parastish #Quotes #Poetry

शब-ओ-रोज़= रात और दिन ख़याबाँ= बाग़ मस्कन= घर गुम-गश्ता= गुम-शुदा, खोया हुआ #ghazal #sher #Shayari #parastish #Quotes Poetry

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Parastish

किताब-ए-ज़ीस्त में मुझे कोई निसाब ना मिला
बहुत  सवाल थे  जिन्हें कभी  जवाब  ना मिला

मिले बहुत  मुझे, मगर  कोई  सवाब  ना मिला
मिरे  हिसाब का  कोई  भी  इंतिख़ाब ना मिला

गुज़र गई ये उम्र बस, चराग़-ए-ग़म  के साए में
जो  रौशनी करे  मुझे, वो  आफ़ताब  न  मिला

बड़ी  थी  आरज़ू   मिरी,  हक़ीक़तें   सँवार  लूँ
नसीब  ख़ार  ही  हुए,  कोई  गुलाब  ना  मिला

झुलस गए बुरी तरह से हम तो दश्त-ए-इश्क़ में
कि  आब, अब्र  छोड़िए,  हमें  सराब  न  मिला

किसी  हसीन  याद का  चलो  ये  फ़ायदा  हुआ
कटी है  उम्र  हिज्र  में,  मगर  अज़ाब  ना मिला

तलाशती रही सदा, वो  जिस में अक्स  पा सकूँ
पर आईने-सा, कोई शख़्स, बे-नक़ाब ना मिला

©Parastish किताब-ए-ज़ीस्त= ज़िन्दगी की किताब 
निसाब= मूल,आधार, सरमाया
सवाब= सही, ठीक
इंतिख़ाब= चयन, चुनाव, चुना जाने वाला 
ख़ार= काँटे
दश्त-ए-इश्क़= इश्क का रेगिस्तान
आब= पानी, अब्र=बादल, घटा
सराब= मरीचिका, वो रेत जो दूर से पानी की तरह दिखाई देती है

किताब-ए-ज़ीस्त= ज़िन्दगी की किताब निसाब= मूल,आधार, सरमाया सवाब= सही, ठीक इंतिख़ाब= चयन, चुनाव, चुना जाने वाला ख़ार= काँटे दश्त-ए-इश्क़= इश्क का रेगिस्तान आब= पानी, अब्र=बादल, घटा सराब= मरीचिका, वो रेत जो दूर से पानी की तरह दिखाई देती है #Quotes #ghazal #hindipoetry #sher #parastish #nojohindi

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Parastish

किसने दर पर ये आहटें कर दीं!
तेज़ दिल की ये धड़कनें कर दीं!

दश्ते दिल सब्ज़ हो उठा फिर से,
आपने  कुछ यूँ  बारिशें  कर दीं!

थी उदासी  फ़क़त  मिरे  घर  में,
आप  आए  तो  रौनकें  कर दीं!

उन की नज़रों ने यूँ तराशा मुझे,
जों  ख़ुदा  ने   इनायतें  कर  दीं!

उसकी चाहत में, मैं हूँ वारफ़्ता,
लो  बयाँ  मैंने, हसरतें  कर  दीं!

©Parastish
  दश्त-ए-दिल = दिल का रेगिस्तान/जंगल 
सब्ज़ = हरा 
वारफ़्ता = बेसुध, बेखु़द

#गजल #sher #Shayari #ghazal #Poetry #parastish #lovepoetry

दश्त-ए-दिल = दिल का रेगिस्तान/जंगल सब्ज़ = हरा वारफ़्ता = बेसुध, बेखु़द #गजल #sher #Shayari #ghazal Poetry #parastish #lovepoetry

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Parastish

किसने मुझको किया ग़म-ख़्वार न पूछो मुझसे
था  वो  दुश्मन  या  मेरा  यार‌  न  पूछो  मुझसे

धुँधला - धुँधला  है  मेरा  अक्स  मेरे  ज़ेहन  में
आईना  देखा  था  किस  बार  न  पूछो  मुझसे

मुझ को मुझ- सा नहीं बेज़ार कोई आता नज़र
किस  क़दर  हो  गई  मिस्मार  न  पूछो  मुझसे 

इश्क़ के  नाम  से  भी  ख़ौफ़ज़दा  हूँ  अब  तो
कौन  था  शख़्स  मिरा  प्यार  न  पूछो  मुझसे

ऐसा  टूटा है  कि हँसना  भी  ये दिल भूल गया 
था  मिरा   कौन   ख़ता-वार   न   पूछो  मुझसे

©Parastish बेज़ार= निराश, नाख़ुश
मिस्मार= बर्बाद , तबाह


#ghazal #sher #Shayari #Poetry #parastish

बेज़ार= निराश, नाख़ुश मिस्मार= बर्बाद , तबाह #ghazal #sher Shayari Poetry #parastish

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