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दीप चन्नाल
चोट लगी है जिसके दिल पर वो खुद के घाव सहलाता रह पूछ ना ले कोई वजह दर्द की वो हस कर अपने गम को छुपाता रहा ©दीप चन्नाल चोट लगी है जिसके दिल पर #AloneInCity love quotes quotes loves quotes a love quotes
चोट लगी है जिसके दिल पर #AloneInCity love quotes quotes loves quotes a love quotes
read moreRameshkumar Mehra Mehra
White जिस्म की दरारों से........ रुह नजर आने लगी........! बहुत अंदर तक तोड गई......!! मुझे इश्क तेरा.......💕 ©Rameshkumar Mehra Mehra # जिस्म की दरारों से,रुह नजर आने लगी,बहुत अंदर तक तोड गई,मुझे इश्क तेरा....
# जिस्म की दरारों से,रुह नजर आने लगी,बहुत अंदर तक तोड गई,मुझे इश्क तेरा....
read moreAnjali Singhal
"तलब जब उनकी बढ़ने लगी, दीवानगी मुझ पर चढ़ने लगी! तब धड़कन दिल की कहने लगी, हुआ है इश्क़ तुझे! तूने क्या सोचा, साँसें उनके ख़्याल में यूंँ ही महकने लगीं!!" ©Anjali Singhal #Heart "तलब जब उनकी बढ़ने लगी, दीवानगी मुझ पर चढ़ने लगी! तब धड़कन दिल की कहने लगी, हुआ है इश्क़ तुझे! तूने क्या सोचा, साँसें उनके ख़्याल म
#Heart "तलब जब उनकी बढ़ने लगी, दीवानगी मुझ पर चढ़ने लगी! तब धड़कन दिल की कहने लगी, हुआ है इश्क़ तुझे! तूने क्या सोचा, साँसें उनके ख़्याल म
read morePraveen Jain "पल्लव"
White पल्लव की डायरी परिवार की परवरिश को नारी नकारने लगी है नैनो परिवार में सिमट कर भी कामकाज को खुद नॉकरानी बताने लगी है नर से बराबरी की दुआई देकर आबरू घरो की जाने लगी है समर्पण त्याग की देवी थी वो हर बात पर ऐठ कर अशांति क्लेश का माहौल बनाकर जंग का मैदान परिवार को बनाने लगी है खुद की सन्तति को पालने में गुलामी की जंजीर में जकड़ी बताने लगी है प्रवीण जैन पल्लव ©Praveen Jain "पल्लव" #women_equality_day परिवार के परवरिश को नारी नकारने लगी है
#women_equality_day परिवार के परवरिश को नारी नकारने लगी है
read moreरिपुदमन झा 'पिनाकी'
White ज़िन्दगी पूछती है ज़िन्दगी जियोगे कब। स्वाद इस ज़िन्दगी की मौज का चखोगे कब। ऊम्र अपनी बिता रहे हो फंँस के उलझन में - आसमाँ पर उड़ानें सपनों की भरोगे कब। आप खुद से बताओ यार अब मिलोगे कब। क़ैद कर रखा है खुद को जो तुम खुलोगे कब। पालते हो क्यूँ दिल में ग़म उदास रहते हो- रंग जीवन में अपने खुशियों की भरोगे कब। जी रहे हो घुटन में खुल के साँस लोगे कब। दुःख के दुश्मन को हौसलों से मात दोगे कब। कुछ नहीं मिलता है औरों के लिए जीने से- हो चुके सब के बहुत अपने बता होगे कब। रिपुदमन झा 'पिनाकी' धनबाद (झारखण्ड) स्वरचित एवं मौलिक ©रिपुदमन झा 'पिनाकी' #कब
Himanshu Prajapati
White तुझे चाहूं तुझे देखूं कब तक, तुझे बुलाऊं तुझे तराशूं कब तक, तु तो रहतीं हैं अब किसी और के जहां में.. तुझे अपनाऊं या भुल जाऊ कब तक..! ©Himanshu Prajapati #love_shayari तुझे चाहूं तुझे देखूं कब तक, तुझे बुलाऊं तुझे तराशूं कब तक, तु तो रहतीं हैं अब किसी और के जहां में.. तुझे अपनाऊं या भुल जाऊ कब
#love_shayari तुझे चाहूं तुझे देखूं कब तक, तुझे बुलाऊं तुझे तराशूं कब तक, तु तो रहतीं हैं अब किसी और के जहां में.. तुझे अपनाऊं या भुल जाऊ कब
read moretheABHAYSINGH_BIPIN
दुखों का घड़ा सिर पर रख कब तक घूमोगे, जज़्बातों से भरा है दिल तेरा, कब बोलोगे। खुद की बंदिशों में दम अब घुट रहा है मेरा, पड़ी ज़ंजीरों से ख़ुद को कब तक बाँधोगे। वक़्त के साथ बेहिसाब ग़लतियाँ की हैं तुमने, सलाखों के पीछे ख़ुद को कब तक छुपाओगे? जो कभी साथ छांव सा था, वह अब छूट गया, आख़िर खुद से ये जंग कब तक लड़ोगे। लोग माफ़ी देते हैं एक-दूसरे को अक्सर, आख़िर तुम खुद को कब तक सताओगे। रिहाई जुर्म से नहीं मिलती, यह तो मालूम है, आख़िर ग़लतियों पर कब तक पछताओगे। प्रकृति में सूखी डालें भी बहार में पनपती हैं, खुद को सहलाने का वक़्त कब तक टालोगे। वक्त हर नासूर बने ज़ख्मों को भी भरता है, आख़िर ज़ख्मों को भरने से कब तक डरोगे। ©theABHAYSINGH_BIPIN दुखों का घड़ा सिर पर रख कब तक घूमोगे, जज़्बातों से भरा है दिल तेरा, कब बोलोगे। खुद की बंदिशों में दम अब घुट रहा है मेरा, पड़ी ज़ंजीरों से ख़
दुखों का घड़ा सिर पर रख कब तक घूमोगे, जज़्बातों से भरा है दिल तेरा, कब बोलोगे। खुद की बंदिशों में दम अब घुट रहा है मेरा, पड़ी ज़ंजीरों से ख़
read moretheABHAYSINGH_BIPIN
White वक़्त के तराजू पर कब तक तौलते, बुरे वक्त की आहट को कब तक टालते। एहसासों को रखकर हाशिये पर, प्यार से यूँ ही कब तक भागते। हर दर्द के पीछे कोई बात होती है, हर खामोशी में एक आवाज़ होती है। पलकों के साए से कब तक छिपोगे, दिल की पुकार से कब तक बचोगे। प्यार बुरा है, ये बहाना कब तक, खुद से दूरी का फसाना कब तक। वक्त की इस रेत पर नाम लिखो, एक बार प्यार से अपनी राह चुनो। ©theABHAYSINGH_BIPIN #love_shayari वक़्त के तराजू पर कब तक तौलते, बुरे वक्त की आहट को कब तक टालते। एहसासों को रखकर हाशिये पर, प्यार से यूँ ही कब तक भागते। हर
#love_shayari वक़्त के तराजू पर कब तक तौलते, बुरे वक्त की आहट को कब तक टालते। एहसासों को रखकर हाशिये पर, प्यार से यूँ ही कब तक भागते। हर
read moreParasram Arora
Unsplash मेरी बिगड़ेल चाहतो से मुझे राहत मिलेगी कब? मेरे शरारती स्वार्थी तत्व आखिर कब समझ पायगे जीवन का यथार्थ? मेरा मौन चिल्लाना चाहता है युगो से आखिर उनकी आवाज़ मै सुन पाऊंगा कब? ©Parasram Arora कब?
कब?
read morePraveen Jain "पल्लव"
White पल्लव की डायरी कब छटेगे दुविधाओं के बादल साफ कभी अरमानो का आसमान होगा खता हमने कुछ की नही फिर कहर कियो हम सत्ता का झेल रहे है कण कण में भगवान रहते फिर सर्वे कर गुमराह कियो है सियासी दाँव मजहब बन गया इंसानियत का आसमान कब तक साफ होगा प्रवीण जैन पल्लव ©Praveen Jain "पल्लव" #sad_quotes इंसानियत का आसमान कब तक साफ होगा
#sad_quotes इंसानियत का आसमान कब तक साफ होगा
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