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Sunita Pathania

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kajal kannaujiya

जख्मों को अपने दिखाऊँ किसे
मैं अंदर से बहुत टूट रही हूँ ये बताऊँ किसे!!

©kajal kannaujiya #poem #Poet #Love #heartvoicekk 
#Childhood

Ganesh Parihar

*#_बचपना*
*भाई साहब बचपन तो बचपन ही था वास्तव में आज एक दम से बचपन की याद आई, वो रेत के घर , वो बहन भाईयों के साथ में खेलना, मां के गोदी में खेलना और पापा के कंधों पर घुमना!
दादाजी की उंगली पकड़ कर चलना, बात बात में भाई बहनों के कहने पर मां से डांट खाना! हर खाने की चीज के लिए भाई बहनों से और मां से झगड़ना!बचपन तो ऐसा था कि मां पापा के आगे किसी भी चीज की अगर हठ कर लेते तो वह उनकी पुर्ती कर देते !
लेकिन अब बारी आई मां बापू को वह सब लोटाने की तो जिंदगी इतनी उलझी पड़ी है साहब की अब ना तो हम घर से मांग सकते ना घरवालों को कुछ दे सकते हैं सोचा नहीं था कि ऐसा भी समयआएगा!कितने खुबसूरत हुआ करते थे बचपन के वो दिन सिर्फ दो उंगलिया जुड़ने से दोस्ती फिर से शुरु हो जाया करती थी*
*MISS YOU CHILDILDHOOD😌😔* #childhood #childhood #love

Abhishek Tiwariz

तेरी थोड़ी सी बेवफ़ाई मेरी जान ले गई,
इश्क़ में कैसा तू इम्तेहान ले गई,
दिल , चैन,रूह,जिस्म और जान ले गई,
इश्क़ में कैसा तू इम्तेहान ले गई,
मुद्दतों से ढूंढा, जिसको,
शिद्दतों से चाहा जिसको,
तू ही जोश- होश इश्क़ का सारा
अरमान के गई,
ज़मीन ले गई मेरा आसमान ले गई
Abhishekism
22nd May 2019
(1:59 PM) #abhishekism #poet #poem #poems #poets #writer #love

AAYUSH SHUKLA

 #poem #childhood

ödd Noor

#poem #Childhood

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     वो लम्हें बचपन के 
                       
                                 ✍️ नूरबसर 

चलो कुछ बात करे
बचपन से शुरुआत करे
सुख का दिवस था
दुःख बेबस था
अपनो की बस्ती थी
कागज की कश्ती थी
सबका गोद ही अपना बसेरा था
हर गली मोहल्ले में लगता अपना डेरा था
मां के आंचल में होता सबेरा था
आज दिल फिर बच्चा बनना चाहता है 
वो लम्हा कितना सुनहेरा था।


अपने रंगों पे न हम में गुरूर था 
भेदभाव के बंधन से मन कोसो दूर था
हमारी खुशी देख,अंधेरा भी मजबूर था 
उजाला तो होना ही था 
क्योंकि आस पास नूर था
आज दिल फिर बच्चा बनना चाहता है
वो लम्हा आज भी मशहूर है 
कल भी मशहूर था। 


मनचाहा पाने के लिए, 
मिट्टी में लोट जाना अपना कर्म था 
सल्तनत भी घुटने टेक दे
हौसला इतना गर्म था 
बदतमीजी की हदें पार कर देते
न लगता हमें शर्म था
आज दिल फिर बच्चा बनना चाहता है
वो लम्हा का न होता धर्म था ।


न अपनों का आश था
न जीवन सपनों का दास था
न मन होता उदास था
आज दिल फिर बच्चा बनना चाहता है
वो लम्हा कितना खास था।  #poem #childhood
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