New जलता दिया Quotes, Status, Photo, Video

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- Arun Aarya

#moonlight #रो दिया है

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उसे इतना तवज्जों दिया है 

      तभी तो उसे खो दिया है !

     पत्थर सा एक लड़के ने 

          आज अचानक ही रो दिया है..!!

                    - अरुन आर्या

©- Arun Aarya #moonlight #रो दिया है

Kuldeep KumarAUE

#sad_quotes ज़माना सिर्फ दूसरों की खुशी देखकर जलता है अपननी खुशी देखकर सिर्फ दुखी होता है #kuldeepkumaraue

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White ज़माना सिर्फ दूसरों की खुशी देखकर जलता है अपननी खुशी देखकर सिर्फ दुखी होता है

©Kuldeep KumarAUE #sad_quotes ज़माना सिर्फ दूसरों की खुशी देखकर जलता है अपननी खुशी देखकर सिर्फ दुखी होता है #kuldeepkumaraue

RAVI PRAKASH

#Thinking तुमने मजबूर कर दिया

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White तुमने मजबूर कर दिया
 जुदा होने पर, 
वरना हमे तुम्हारे झूठे इश्क़ से

भी मोहब्बत थी !!

©RAVI PRAKASH #Thinking तुमने मजबूर कर दिया

unique writer

अपनों ने ही ठुकरा दिया

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unique writer

अपनों ने ही ठुकरा दिया

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unique writer

कहना छोड़ दिया

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अनिल कसेर "उजाला"

रोने न दिया

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unique writer

बदल दिया हमने

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Shashi Bhushan Mishra

#दिल पर लगा दिया#

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New Year 2024-25 दिल की किताब आंखों से पढ़ने को बेक़रार,
नज़रें मिलाकर देख लो तुम मुझसे एकबार,

दिल में रहा  क़ायम ये भ्रम  है प्यार उन्हें भी,
नज़रें  बचाकर   देखते   देखा  है  कई  बार,

सूरजमुखी  सा  आफ़ताब  देख  खिल उठे,
हर सुब्ह  रहा करता है  इस कद्र  इंतज़ार,

फ़ुरसत  में  किसी  रात  चांद  डूबता  नहीं,
मिलती तो मांग लाते हम भी चांदनी उधार,

हुस्न-ओ-अदा पर फ़िदा हुए  राह के पत्थर,
रुक जाए मुसाफ़िर भी राह चलते कई बार,

महफूज़ मेरा चैन-ओ-सुकूं उनकी फ़ज़ल से,
बख़्शी ख़ुदा ने  दुआ की दौलत भी बेशुमार,

दीदार-ए-हुस्न   मुकम्मल  होता नहीं कभी,
होती है नुमाइश में झलक गोया क़िस्त बार,

फूलों  के  ईर्द-गिर्द  सुनूं  भ्रमर का 'गुंजन',
दिल पर लगा दिया खाली है का इश्तिहार,
    ---शशि भूषण मिश्र 'गुंजन' 
            प्रयागराज उ०प्र०

©Shashi Bhushan Mishra #दिल पर लगा दिया#

Shashi Bhushan Mishra

#दीप जलता है सदन में#

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दीप जलता है सदन में,
अंधेरा है व्याप्त मन में,

चलाता है श्वास सबका,
वही रक्षक  है  भुवन में,

प्रेम और विश्वास से ही,
प्रकट होते  ईश क्षण में,

कर रहे  गुणगान  सारे,
धरा से लेकर  गगन में,

सिंधु से जलश्रोत लेता,
वही भरता नीर घन में,

जागता है साथ हरपल,
साथ रहता है  सयन में,

हृदय में है व्याप्त गुंजन,
बसा ले उसको नयन में,
-शशि भूषण मिश्र 'गुंजन'
      प्रयागराज उ०प्र०

©Shashi Bhushan Mishra #दीप जलता है सदन में#
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