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kavi Ravi Srivastava
Unsplash मुझमें 'कबीर' का फक्कड़पन, मुझमें 'तुलसी' की समता है !! है 'सूर' का मुझमें 'वात्सल्य' 'मीराबाई' की ममता है !! मुझमें प्रकृति का 'पंत' प्रेम, मुझमें 'दिनकर' की है 'हुँकार' मुझमें 'रसखान' का प्रेम भरा, 'रहिमन' की भाव प्रवणता है !! ✍️✍️ रवि श्रीवास्तव ( स्कूल डायरी-'बच्चों के बीच में !' ) ©Ravi Srivastava #Book
Himshree vlog youtube channel
Unsplash जिंदगी की एक किताब ऐसी लिखूंगी कि पढ़ने वाला भी भावो को पड़ेगा तो रोएगा ©Himshree vlog youtube channel #Book #Book #Nojoto #Best #Shayari
vipinekshayar
White पाबंदियां कितनी लगाओगे मुझ पर मैं एक दिन वैसे भी तुझसे बहुत दूर चला जाऊंगा कितना रोक-टोक करोगे मेरी बातों पर मैं बस एक दिन नॉर्मल सा सवाल रह जाऊंगा तुझे मिल जाएगी मुझ से भी अच्छी तेरा ये जवाब रहेगा मगर ये इंसान चला जाएगा ©vipinekshayar #good_night ek tarfa Mohabbat Ki kahaniyan...
#good_night ek tarfa Mohabbat Ki kahaniyan...
read moreSanoj Kumar
Unsplash i am reading this book ©Sanoj Kumar #Book this is the book
#Book this is the book
read moreAabid Maroof Mughal Advocate
Unsplash سال 2024 کا آخری شعر کل نئے سال میں داخل ہوں گے لوگ سب خواب پرانے لے کر شاعر:: عابد معروف مغل ©Aabid Maroof Mughal Advocate #Book
Naveen Mishra
Unsplash हमें यह स्वीकार करना होगा कि गुरु और शिष्य एक दूसरे कि ताकत हैं, और एक दूसरे के बिना अधूरे। जब कहीं कोई प्रशन पूछने वाला नहीं होगा तो उत्तर देने वाले कि भी महत्वत्ता नहीं होगी। एक के पास जिवन भर का अपना अनुभव हैं, वहीं दूसरे के पास नये युग का अपना नजरिया। दोनों मिलकर हीं एक दूसरे को पूरक बनाते हैं... ©Naveen Mishra #Book
Narendra kumar
स्वयं ही कर्ता है, स्वयं ही अकड़ता है। न जाने क्यों, मानव अहंकार करता है। मानव के मन में युद्ध ही युद्ध है, अपने ही विरुद्ध युद्ध ही युद्ध है। स्वयं ही लड़ता, स्वयं ही घायल होता है। जीतता है तो, स्वयं ही स्वयं का कायल होता है। हारता है तो, स्वयं ही स्वयं से जिद करता है। अपने ही विरुद्ध, स्वयं ही स्वयं से युद्ध करता है। न जाने क्यों, मानव स्वयं को विषयुक्त करता है। अपने ही आप, स्वयं को अपने विरुद्ध करता है। ©Narendra kumar #Book