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पार्क

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दोस्तो हर इंसान की जिंदगी अलग होती है और अलग होती है उनकी कहानियां लेकिन कभी कभी कुछ लोगों की कहानी एक जैसी होती है
वैसे ही हमारी लिखी ये कहानी किसी की तो होगी। मेरी कहानी जब तक आप पूरा नहीं पढ़ोगे समझ नहीं आऐगी तो कहानी अंत तक जरूर पढ़ें। इससे पहले भी एक कहानी 7-8पेज मे लिख कर पोस्ट की है उसे भी पूरा जरूर पढ़ें।आपको जरूर पंसंद आऐगी.....🙏☺🙏
दीपक और ज्योति दोनों एक दूसरे से बेपनाह मोहब्बत करते थे 
प्रति दिन ज्योति का कालेज समाप्त होने के बाद वे दोनों पार्क, काँफी की दुकान या आइसक्रीम पार्लर मे मिलते लगभग एक घंटे बातें करते और फिर घर की ओर चले जाते दीपक ज्योति को उसके घर से थोडा दूर ही छोड़ता उसके बाद अपने घर की ओर निकल जाता । घर पंहुच कर फोन पे दोनों की बाते होती रहती थी । यही सिलसिला काफी महिनों से चल रहा था । एक दिन दीपक और ज्योति एक पार्क मे बैठकर बातें कर रहे थे तभी ज्योति का भाई अपने दोस्तों के साथ मोटर बाईक  से उसी रास्ते से गुजर रहा था उसने चेहरे पर हेलमेट पहनी थी इसलिए ज्योति ने उसकी ओर ध्यान नहीं दिया अब थोड़ी बातें ज्योति के भाई जीवन के बारे मे बता देती हूं वह एक पढ़ा लिखा सुलझा नौजवान था अच्छे बुरे की समझ थी तथा वह नौकरी की तैयारी मे लगा हुआ था 

 #NojotoQuote

दोस्तो हमारी किसी भी पोस्ट का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है ये कहानी जातीवाद पर आधारित हैं तो अगर आप नही चाहोगे तो हम आगे की कहानी पोस्ट नहीं करेगें ...आप हमें कामेंट करके जरूर बताये तभी हम आगे की कहानी लिखेंगे ...
Kiran Bala Akshita Jangid(poetess) Parul Sharma @tul maurya(IT) Mukesh Poonia सागर चौहान Dev Faizabadi Smiley tiwari Mannu Satyaprem Shivam Mishra Shivansh Mishra Abhishek Kumar आर.के.चौहान दोस्तो हम आप सब को टेग नही कर सकते है लेकिन आप सब जिनका नाम नहीं दे पाऐ वो भी इसमे टेग है 🙏

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एक बार रानी एलीजा बेथ दिल्ली में आई थी उस समय मनमोहन सरकार थी तो एलीजा बेथ के कहने पर मनमोहन जी ने बुराड़ी में एक पार्क बनवा दिया , कॉरोनेशन पार्क । इस पार्क में एलीजा बेथ के दादा , पर दादा की मूर्तियां लगाई है और 2018 में मोदी सरकार ने उस पार्क पर करोड़ों रुपए ख़र्च करके उसका निर्माण जल्दी ही पूरा करवा दिया ।
कवि नारायण

Aazadi - Kavi Narayan
#kavi#narayan#aazadi#gulaami#sarkar#gulaamsarkar#bharat#gulaambharat

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आजादी की शर्त...

शाम 6 बजे का वक़्त, ढलते सूरज की गर्मी और ठंढी हवाओं के बीच हो रही लड़ाइयों का आनंद लेता हुआ मैं पास के एक पार्क की तरफ टहलने का मन बना रहा था । हवा चल रही थी और आजादी का खुमार वातावरण में था । कमरे के बालकनी में एक सफेद कबूतर 🕊️ मेरे रखे गेहूं के दाने को बड़ा ही निडर होकर अपने गले मे भरे जा रहा था..। एक शरारत सूझी... उस कबूतर पर मैंने नील की डिब्बी से कुछ बूंदे छिड़क दिए... । उसकी सफेदी दागदार हो गयी । अब मेरे लिए पहचान पाना आसान हो गया कि ये वही कबूतर है जिसे मैं रोज दाना देता हूँ और जो मुझसे अब बिल्कुल नहीं डरता । बेजुबान जब आपका दोस्त बन जाये तो वो आपकी जुबान बड़ी आसानी से समझ लेता है । उसे दोस्ती के कुछ दिनों बाद ही इंसानी सोच से ऊपर इतनी समझ आ गयी थी कि उसे कब अपनी गुटर गू से मुझे disturb करना है और कब नहीं ।
तो ये हरकत करने के बाद, अपने बेजुबान दोस्त को एक पहचान देने के बाद मैं पार्क की तरफ निकला..। कान में ईरफ़ोन ठूसे...कुछ पुराने गजलों के बोल सुनते । अचानक पार्क पहुचने से करीब 100 मीटर पहले...आजाद देश के उस बीच सड़क पर... अचानक आसमां से कुछ गिरा... धब्ब सा...ठीक मेरे से 2 कदम आगे । डर गया मैं... पहले तो लगा जैसे किसी ने छत से कचरा फेंका होगा आजाद देश के आजाद नागरिक की तरह..। मगर... देखा... कोई और नही...मेरा बेजुबां दोस्त था वो... वही सफेद कबूतर..जिसको नीले रंगों की पहचान दी थी मैंने..। पतंग उड़ाने वाले धागों में उलझा हुआ... रगड़ से कटे हुए डैनों से निकलता खून,...पंख बेतहास छितराये हुए सड़क पर गिर कर आंखें हमेशा के लिए बन्द कर चुका था वो... । रफ्तार से उड़ता हुआ शायद किसी के मांझे से टकराया था वो... । एक पंख उड़ान की गति की वजह से रगड़ खा कर आधे से ज्यादा चीरे जा चुके थे । बदहवास गिरते वक़्त भी अपने जख्मी पंखों को एक आखिरी बार फड़फड़ा कर खुद को फिर से उड़ा पाने की नाकाम कोशिश की थी उसने शायद, ये उसके शरीर मे जंजीर की तरह लिपटे मांझे बता रहें थे । इंसानी शौक और मौज ने किस कदर आतंक मचाया है ये पहलीं बार महसूस हो रहा था...। आँखें भीग चुकी थी, दिल मायूसियों ने खंडहर में कहीं दब सा गया था । मैंने उसे उठाया..कोई हलचल नहीं थी... चोंच खुले हुए ढीले पड़ चुके थे... आँखें बंद थी.. । उसे देखते हुए मैं पार्क की तरफ बढा, उसे दोनो हाथों के गोद मे लिए... रास्ते मे मिलने वाले हर बच्चे दिखाते और अपनी ख़ामोश हों रहीं आवाज से उनसे कहते हुए की भगवान के लिए पतंग मत उड़ाओ...देखो इसे... मत उड़ाओ । 😢
जमीन पर रहकर ये महसूस नही कर पाएंगे आप की हवा में उड़ रहा जीव जब जरा सी भी बाधा से टकराता है तो वो आपकी तरह रुकता, सम्भलता और बढ़ता नहीं हैं बल्कि ठीक अगले ही पल वो जमीन की तरफ उसी रफ्तार से गिरता है..। आप जमीन पर होते हैं, आपके पैर पे धागा फस जाएं तो आप रुक कर पूरे वक़्त लेकर उसे निकाल कर फिर अपनी मंजिल की तरफ बढ़ जातें हैं । आसमां में उड़ते परिन्दें के पास इतना वक़्त कहाँ..? वो हवा में रुक नहीं सकता... उसके बाद उसे बस गिरना है... आखिरी बार आसमान को देखते हुए... ।
उस पार्क में उसे दफना कर आ रहा हूँ...उसके शरीर से उस माँझें को निकाल कर जला कर भी ।
आजादी है... खुशियां मनाइए, जरूर मनाइए मगर आजादी की एक छोटी सी शर्त है कि आपकी आजादी वहां खत्म हो जाती हैं जहाँ से वो दूसरों को तकलीफ देने लगे.. । ये बात याद रखिये । पतंग मत उड़ाइये...भगवान के लिए नहीं तो इस बेजुबान के लिए ही सही... 😢😢
- ©PrakashChandra❣️🕊️❣️
#prakashvaani #Nojoto

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विचरती कल्पनाएं
मेरी स्कूल की खिड़की से विशाल एक पार्क नजर आता है
बड़ा ही मनोरम हृदयस्पर्शी नज़ारा नज़र आता है 
मोटे ,पतले ,जवान ,बुजुर्ग सभी चहल कदमी करते नज़र आते हैं
कुछ बेंच पर बैठे आसन लगाए ध्यान मग्न नज़र आते हैं 
कई चलते-चलते अपने मोबाइल में व्यस्त नजर आते हैं 
कुछ लोगों की ज़ोर से हंसने की आवाज तालियां बजाने की आवाज़
मानो शांत वातावरण में मधुर संगीत घोलती हैं 
हरे-भरे वृक्ष, पौधे, खिलखिलाते फूल मुझे मुस्कुराने के लिए प्रेरित करते हैं 
ठंडी हवाओं के झोंके मुझे गुनगुनाने के लिए कहते हैं
पक्षियों की चहचहाहट कुछ मधुर सा संगीत सुनाती है
हर रोज़ यह पार्क मुझे बड़े ही दिल से बुलाता है 
मेरी मजबूरियों पर भी मुस्कुराता है 
मैं रोज़ पार्क से कहती हूं जिस दिन मैं रिटायर हो जाऊंगी 
ख़ुशी-ख़ुशी तुम्हारे परिसर में विचरण करने जरूर आऊंगी 
पार्क मुझे देख कर मुस्कुराता है मैं भी उसे देख कर मुस्कुरा देती हूं 
अपना वादा निभाने का आश्वासन दे देती हूं
उसे भी मेरी मजबूरी समझ आती है 
अपनी डालियों को लहरा कर मेरा अभिवादन कर देता है 
यह कहानी पिछले 19 सालों से चली आ रही है 
इस पार्क ने मुझे बदलते देखा मैंने इसको बदलते देखा है
@_muskurahat_

विचरती कल्पनाएं
मेरी स्कूल की खिड़की से विशाल एक पार्क नजर आता है
बड़ा ही मनोरम हृदयस्पर्शी नज़ारा नज़र आता है
मोटे ,पतले ,जवान ,बुजुर्ग सभी चहल कदमी करते नज़र आते हैं
कुछ बेंच पर बैठे आसन लगाए ध्यान मग्न नज़र आते हैं
कई चलते-चलते अपने मोबाइल में व्यस्त नजर आते हैं
कुछ लोगों की ज़ोर से हंसने की आवाज तालियां बजाने की आवाज़
मानो शांत वातावरण में मधुर संगीत घोलती हैं
हरे-भरे वृक्ष, पौधे, खिलखिलाते फूल मुझे मुस्कुराने के लिए प्रेरित करते हैं
ठंडी हवाओं के झोंके मुझे गुनगुनाने के लिए कहते हैं
पक्षियों की चहचहाहट कुछ मधुर सा संगीत सुनाती है
हर रोज़ यह पार्क मुझे बड़े ही दिल से बुलाता है
मेरी मजबूरियों पर भी मुस्कुराता है
मैं रोज़ पार्क से कहती हूं जिस दिन मैं रिटायर हो जाऊंगी
ख़ुशी-ख़ुशी तुम्हारे परिसर में विचरण करने जरूर आऊंगी
पार्क मुझे देख कर मुस्कुराता है मैं भी उसे देख कर मुस्कुरा देती हूं
अपना वादा निभाने का आश्वासन दे देती हूं
उसे भी मेरी मजबूरी समझ आती है
अपनी डालियों को लहरा कर मेरा अभिवादन कर देता है
यह कहानी पिछले 19 सालों से चली आ रही है
इस पार्क ने मुझे बदलते देखा मैंने इसको बदलते देखा है
#Raj #Poet #shares #nojotohindi #nojotopoetry

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बाल किलकारी के मार्च अंक में मेरी कहानी "होली वाला बर्थडे"

होली वाले दिन "मेरा हैप्पी बर्थडे है ..."कहते हुए सात साल का गोलू सारे घर के कमरों में घूम रहा थाI
घर के सभी सदस्य होली के तैयारियों में व्यस्त थे इसलिए कोई भी उसकी बात पर ध्यान नहीं दे रहा थाI
थक हार कर वह अपनी माँ को सब जगह देखते हुए राजू भैया के कमरे में जा पहुँचा, जहाँ पर वह पोंछा लगा रही थीI
गोलू माँ का पल्लू पकड़ते हुए बोला-"कल होली है और मै सबको बता रहा हूँ कि कल ही मेरा "हैप्पी वाला बर्थडे" है पर कोई नहीं सुन रहाI"
माँ माथे का पसीना पोंछते हुए बोली-"मैं जल्दी से काम कर लूँ फ़िर तुझे कल मिठाई खिलाऊंगी..अच्छी वाली"
"नहीं ..मुझे वो अखबार में लिपटी हुई मिठाई नहीं खानीI मुझे भी जन्मदिन पर चमकीली पन्नी में लिपटे हुए उपहार चाहिए, जैसे मोनू भैया को मिलते हैI"
मोनू जो कि आठवीं कक्षा का छात्र था और वहीँ बैठकर पढ़ाई कर रहा था, अपना नाम आने पर चौंक गयाI
माँ ने खिसियाते हुए मोनू को देखा और गोलू से बोली-"कमरे के बाहर जाओI"
माँ का गुस्से से लाल होता चेहरा देखकर गोलू सहम गया और आँसूं रोकते हुए कमरे के बाहर चला गया पोंछा लगाने के बाद माँ जब बाल्टी रखने के लिए बाहर निकली तो उन्होंने गोलू को इधर उधर देखाI
गोलू अभी भी मोनू के कमरे की दीवार से चिपका खड़ा रो रहा थाI
माँ का दिल भर आयाI
वह उसके पास आकर बोली-"मेरे पास इतने पैसे नहीं है कि मैं तेरा जन्मदिन मना सकूँi"
गोलू ने आँसूँ पोंछते हुए माँ को देखा जो उसे बहुत उदास नज़र आईI
वह माँ की बात को पता नहीं कितना समझ पर वह माँ को उदास नहीं देख सकता था इसलिए तुरंत माँ के गले से लग गयाI
आँसूं पोंछते हुए माँ ने प्यार से उसका नन्हा सा हाथ पकड़ लिया और अपनी झुग्गी की तरफ़ चल दीI
सुबह से चहकने वाला गोलू अब बिलकुल शाँत हो चुका थाI
माँ बार-बार पैसे निकाल कर गिनती कर रही थी पर पैसे बढ़े हुए नहीं निकलेI वे हर बार उतने ही निकलते जितने माँ ने पहली बार गिने थे और उतने पैसे तो घर के ज़रूरी खर्चों के लिए ही कम पड़ रहे थेI वह चाहकर भी गोलू का जन्मदिन मनाने के लिए नहीं सोच सकीI
उधर मोनू ने जब से गोलू की बातें सुनी थी उसका मन पढ़ाई में नहीं लग रहा थाI
उसे अनमना सा देखकर उसकी मम्मी ने हँसते हुए कहा-"तुम तो होली के नाम से ही बहुत चहकते हो और आज होली के एक दिन पहले मुँह लटका कर घूम रहे होI"
मोनू ने गोलू और उसकी माँ की पूरी बात बताते हुए कहा-"मम्मी, गोलू क्या अपना जन्मदिन कभी नहीं मना पायेगा?"
मम्मी ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा-"तो तुम गोलू का जन्मदिन मनाकर उसे सरप्राइज़ दे दो I"
मोनू ने आश्चर्य से कहा-"मैं ..मैं भला कैसे कर पाउँगाI"
"जब हम कभी भी कोई अच्छा काम करने का सोचते है तो वह काम ज़रूर हो जाता हैI" कहते हुए मम्मी मुस्कुराते हुए कमरे से बाहर चली गई
मोनू दिन भर मम्मी की बात सोचता रहा और शाम होते होते उसका चेहरा ख़ुशी से चमक उठाI
वह दौड़ते हुए पार्क में गया और अपने सब दोस्तों को एक जगह इकठ्ठा होने के लिए बोलाI
थोड़ी ही देर में मोनू और उसके सारे दोस्त एक जगह पर इकठ्ठा हो गएI
मोनू कुछ कहता, तभी उसकी नज़र गोलू पर पड़ी जो सबसे छोटा होने के कारण सबसे पीछे खड़ा हुआ थाI
गोलू उसे देखकर मुस्कुराया और जैसे ही आगे आने को हुआ तो मोनू बोला-"तुम यहाँ से जाओI"
गोलू यह सुनकर सन्न हो गयाI उसने बड़े आश्चर्य से मोनू को देखा क्योंकि आज तक कभी भी मोनू ने उसे डाँटा नहीं थाI यहाँ तक कि उसके हाथ से मोनू का पेंसिल बॉक्स टूट जाने के बाद भी ...
उसने सब बच्चों की ओर आशा भरी नज़रों से देखा कि शायद कोई उसे रुकने को कह दे पर उसे किसी ने नहीं रोकाI
रुकने की एक कोशिश करते हुए वह बोला-"कल मेरा हैप्पी वाला बर्थडे हैI"
मोनू ने कहा-"हाँ, पता है, अब तुम यहाँ से जाओI"
गोलू ने दुखी होते हुए मोनू को देखा और वहाँ से भाग गयाI
अनु थोड़े से गुस्से से बोली-"तुम्हें उसके साथ ऐसा नहीं करना चाहिए थाI"
भागते हुए गोलू को देखकर मोनू बोला-" अरे, उसी के बर्थडे के लिए तो तुम सबको यहाँ बुलाया हैI"
"बर्थडे के लिए! गोलू ने आश्चर्य से कहा
"हाँ, कल उसका बर्थडे है और उसकी मम्मी के पास बर्थडे मनाने के लिए पैसे नहीं है, इसलिए मैंने सोचा है कि हम लोगो को जो होली मनाने के लिए पैसे मिले है उसी में से थोड़े पैसे बचाकर हम गोलू के लिए एक सरप्राइज़ पार्टी रखेI"
"अरे वाह, तब तो मज़ा आ जाएगा और मुझे बहुत कुछ खाने को भी मिलेगाI" अब्दुल अपने मोटे पेट पर हाथ फेरते हुए बोला, जो हमेशा खाने के लिए तैयार रहता थाI
उसकी बात सुनकर सभी खिलखिलाकर हँस पड़ेI
फ़िर क्या था अनु ने अपने साथ साथ गोलू की पिचकारी लाने की जिम्मेदारी उठा ली तो अब्दुल केक लाने के लिए तैयार हो गयाI सुमित और चीनू ने रंगबिरंगे गुब्बारें सजाने के लिए हामी भर दी तो गिन्नी और राहुल चिप्स का पैकेट लाने के लिए तैयार हो गएI
झालरें और रंगबिरंगे कागज़ों की जिम्मेदारी भोला और नूरु को दी गईI
रिमझिम चहकते हुए बोली -"मुझे किसी भी होली में इतना ज़्यादा मजा नहीं आया जितना कल के बारे में सोचकर हो रहा हैI
यह सुनकर सभी बच्चों ने तुरँत हामी भरी और थोड़ी ही देर बाद सभी बच्चे उछलते कूदते हुए वहाँ से चल दिएI
जब बच्चों ने अपने घर जाकर गोलू के जन्मदिन की बात बताई तो उनके मम्मी पापा भी इस मज़ेदार और अनोखे जन्मदिन में सम्मिलित होने के लिए तुरंत तैयार हो गएI
किसी की मम्मी ने पेंसिल बॉक्स ले लिया तो किसी ने लांच बॉक्स ..और हाँ कोई भी उन्हें चमकीली पन्नियों में पैक करवाना नहीं भूलाI
अगले दिन सुबह जब गोलू की माँ काम पर पहुँची तो मोनू के घर पर उसके दोस्त गुब्बारे और झालरें सजा रहे थेI
गोलू की माँ को गोलू की याद आ गई जो रात में भूखा प्यासा ही सो गया थाI पर उसने एक बार भी ना तो जन्मदिन मनाने के लिए कहा था और ना ही कोई उपहार लाने के लिए ..गोलू की माँ की आँखें भर आई और वह बर्तन माँजने के लिए रसोई घर की ओर चल दीI
जब काम खत्म करके वह जाने लगी तो मोनू बोला-"आंटी , आप शाम को ज़रूर आ जाइएगा और गोलू को लाना मत भूलनाI"
गोलू की माँ बोली-"हाँ, गोलू को यहाँ आकर बहुत अच्छा लगेगा, आज उसका भी तो...कहते कहते उसके शब्द गले में ही अटक गएI
जब वह घर पहुँची तब तक सब लोगो ने रंग खेलना शुरू कर दिया थाI आस पड़ोस के बच्चे खूब मस्ती कर रहे थेI गोलू भी बच्चो के साथ होली खेल रहा थाI
उसे देखते वह हँसता हुआ पास आकर बोला-"माँ,आज तो मेरा हैप्पी वाला बर्थडे हैI"
माँ ने प्यार से उसका माथा चूम लिया और बोली-"आज मोनू भैया के घर पर जन्मदिन की बहुत बड़ी पार्टी हैI उन्होंने कहा है कि गोलू को लेकर आनाI"
"मैं ज़रूर चलूँगा माँ..मुझे चमकीली पन्नी वाले उपहार देखना बहुत अच्छा लगता हैI गोलू ख़ुशी से उछलता हुआ बोला
उसके मासूम चेहरे पर आगे के दो टूटे हुए दाँतों की खाली जगह को देखकर माँ हँस पड़ी और उन्होंने गोलू को प्यार से गोद में उठा लियाI
शाम को गोलू बाहर जाने की एकमात्र हरी टीशर्ट और लाल नेकर पहन कर तैयार हो गयाI
"माँ, चप्प्पल तो टूटी हुई हैI" गोलू माँ को टूटी चप्पल दिखते हुए बोला
"आज तो होली के कारण कोई दुकान भी नहीं खुली होगीI" माँ परेशान होते हुए बोली
"कोई बात नहीं माँ..मोनू भैया का घर तो पास ही में हैI मैं नंगे पैर भी चल सकता हूँ...और वह रोड तो कितनी चिकनी और साफ़ सुथरी है..सिर्फ़ अपनी गली में ही तो कंकड़ है..मैं उनसे बचकर निकल जाऊँगा ...तुम देखना ..एक भी काँटा मेरे पैरों में नहीं चुभेगा..गोलू अपनी ही रौ में कहे जा रहा था और अपने बेबसी पर माँ की आँखों से टप टप आँसूं गिर रहे थेI
गोलू बोला-"चलो माँ..देर हो रही हैI"
माँ ने तुरंत अपने चेहरे पर ढेर सारा पानी डाल लिया ताकि गोलू को उनके आँसूं ना दिखेI
जब गोलू और उसकी माँ मोनू के घर पहुँचे तब तक वहाँ बहुत सारे बच्चे अपने मम्मी पापा के साथ आ चुके थेI गोलू जैसे ही उनके बीच में जाने लगा उसने मोनू को देखाI
पार्क वाली बात याद आते ही वह पीछे हो गया और सहमते हुए माँ के पास जाकर खड़ा हो गयाI
मोनू मुस्कुराता हुआ उसके पास आया और उसका हाथ पकड़कर उसे सभी बच्चों के बीचो बीच ले गया और मेज के पास जाकर रुक गयाI
फूलों से सजी मेज पर एक खूबसूरत सा केक रखा हुआ थाI
गोलू को लगा कि मोनू भैया का बर्थडे हैI
वह कुछ कहता इससे पहले ही मोनू ने गोलू को चाक़ू पकड़ाते हुए कहा-"केक काटो"
गोलू की आँखें अचरज से फ़ैल गईI उसके हाथ काँप उठे और उसने माँ की तरफ़ देखा जो आश्चर्य से उसे और मोनू को देखे जा रही थीI
मोनू ने गोलू का हाथ पकड़ते हुए उससे केक का टुकड़ा कटवायाI
सभी बच्चे जोर जोर से गा रहे थे "हैप्पी बर्थडे डियर गोलू"
गोलू जैसे किसी जादुई लोक में थाI मोनू ने बड़े ही प्यार से उसे केक का एक टुकड़ा खिलाया और मोनू के इशारा करते ही सभी दोस्त अपने हाथों में रंगबिरंगी पन्नियों से सजे उपहार लेकर आ गए और गोलू को देने लगेI
सब बच्चे गोलू को उपहार दे रहे थे और कह रहे थे-"आज तो तुम्हारा हैप्पी वाला बर्थडे हैI"
गोलू ख़ुशी से उछल रहा था ..कूद रहा था ...सबके गले लिपट रहा था ...और उसकी माँ उसे देखते हुए परदे के पीछे छिपकर हिलक हिलक कर रो रही थी और बुदबुदा रही थी-"हैप्पी बर्थडे गोलू"

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